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सख्ती से पहले जागरूक करना जरूरी

Posted On September - 10 - 2019

अनूप भटनागर

देश में नया मोटर वाहन कानून लागू होने के बाद यातायात नियमों के उल्लंघन के आरोप में हजारों रुपये के चालान से जनता के बीच दहशत व्याप्त है। ऐसा भी देखा गया है कि यातायात पुलिस सड़क के किनारे खड़े वाहनों का भी चालान कर रही है और वाहनों के मालिकों द्वारा चालान की वजह पूछने पर वे कोई जवाब भी नहीं देते हैं।
नि:संदेह नये कानून का मकसद वाहन चालकों को यातायात नियमों के अनुसार ही वाहन चलाने और अपने साथ सभी आवश्यक दस्तावेज रखने के लिये बाध्य करना ही नहीं, बल्कि यातायात नियमों के अनुसार ही वाहन चलाना सुनिश्चित करना है। देखा जाता है कि लोग यातायात नियमों को धता बताते हुए दोपहिया वाहन और कार चलाते हुए मोबाइल पर बात कर रहे हैं या फिर इयर फोन लगाकर गाने सुनते हुए वाहन चलाते हैं। ऐसी स्थिति में दुर्घटना होने की संभावना काफी रहती है। इस पर भी जुर्माना किया जा रहा है।
इसके बावजूद बेहतर होता यदि कानून पर सख्ती से अमल करने से पहले यातायात पुलिस जनता को इस बारे में जागरूक करती। ऐसा करने पर संभव था कि इस कानून के तहत भारी-भरकम जुर्माने से बचने का लोग प्रयास करते। देश के विभिन्न हिस्सों में, खासकर राजमार्गों पर हो रही दुर्घटनाओं को देखते हुए लंबे समय से मोटर वाहन कानून में संशोधन कर यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के लिये कड़ी सजा का प्रावधान करने की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सड़क दुर्घटनाओं की बढ़ती संख्या पर चिंता व्यक्त करते हुए संसद को बताया था कि देश में हर घंटे 53 सड़क हादसे होते हैं और इनमें 17 व्यक्ति जान गंवाते है। उन्होंने बताया था कि 2017 में सड़क दुर्घटनाओं में 1,47,913 व्यक्तियों की जान गयी थी। इनमेेें उ. प्र. का अव्वल स्थान था। इन दुर्घटनाओं की मुख्य वजह लापरवाही के साथ तेज रफ्तार में वाहन चलाना, सीट बेल्ट तथा हेलमेट पहनने से गुरेज, नशे में तेज रफ्तार से वाहन चलाने की भी भूमिका रही है। नशे में वाहन चलाने और राजमार्गों पर सहजता से शराब उपलब्ध होने के तथ्यों के मद्देनजर ही उच्चतम न्यायालय ने राजमार्गों से शराब की दुकानों को कम से कम पांच सौ मीटर दूर करने का आदेश भी दिया था।
सड़क परिवहन मंत्रालय के अनुसार 2015 में वाहन चालकों की गलती के कारण हुई 3,86,481 सड़क दुर्घटनाओं में से 2,40,463 दुर्घटनायें तेज रफ्तार से वाहन चलाने की वजह से हुईं, जिनमें 64633 व्यक्तियों की मृत्यु हुयी थी। प्राप्त जानकारी के अनुसार देश में राजमार्गों पर 2015 में 1,42,269 दुर्घटनायें हुईं जबकि 2016 में ऐसी दुर्घटनाओं की संख्या 1,42,359 थी। वर्ष 2017 में राजमार्गों पर होने वाली दुर्घटनाओं में मामूली कमी आयी और इनकी संख्या 1,41,466 थी।
एक तथ्य यह भी है कि राजमार्गों पर होने वाली दुर्घटनाओं में 2012 में 48768 व्यक्ति मारे गये थे जबकि 2015 में इनकी संख्या बढ़कर 51204 पहुंच गयी थी।
वाहन चालकों पर भारी जुर्माना किये जाने को लेकर व्याप्त आक्रोश के संबंध में परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने सफाई दी कि नये कानून का उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा पैसा वसूलना नहीं बल्कि जनता को नियमों का पालन करने के लिये बाध्य करना है। नये कानून के तहत हो रहे चालान और इसमें हजारों रुपये का जुर्माना लगाये जाने की घटनाओं को देखते हुए अकेले दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण में होने संबंधी प्रमाणपत्र के लिये प्रदूषण जांच केन्द्रों पर लगी वाहनों की लंबी कतारों से ही अनुमान लगाया जा सकता है कि वाहन चालक किस हद तक नियमों की धज्जियां उड़ाते रहे हैं।
नये यातायात नियमों को लागू करते समय यातायात पुलिस को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि किसी भी सरकारी वाहन को नियमों का उल्लंघन करने पर बख्शा नहीं जाये। यातायात पुलिस को यह ध्यान रखना चाहिए कि देश के डिजिटल युग में प्रवेश करने के साथ ही अब छोटी-छोटी घटनाओं के वीडियो क्लिप वायरल हो रहे हैं। यातायात पुलिस को भी अपने रवैये में बदलाव करना होगा क्योंकि अब लोग ऐसी घटनाओं का वीडियो क्लिप बनाकर उसे सोशल मीडिया पर साझा करने लगे हैं।
नये कानून को हालांकि मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और तेलंगाना सरकार ने अभी लागू नहीं किया है जबकि हरियाणा में इस कानून के तहत चालान करने के मामलों में ढील दिये जाने की खबर है। इसके बावजूद, उम्मीद की जानी चाहिए कि नये कानून में चालान के कठोर प्रावधानों का उपयोग जनता को परेशान करने के लिये नहीं बल्कि उसे यातायात नियमों का पालन करने के लिये बाध्य करने के लिये होगा।


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