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रोबोटिक की अलबेली दुनिया

Posted On September - 8 - 2019

कुमार गौरव अजीतेन्दु

जब सब-कुछ रोबोटिक हो रहा है तो भई पूंछ भी रोबोटिक क्यों न हो? शायद यही सोचकर जापान की किओ यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने रोबोटिक पूंछ बना ली है।
वैज्ञानिकों ने बनाई रोबोटिक पूंछ
इसे पहनने पर इनसान को गिरने से बचाया जा सकता है। शोधकर्ताओं के मुताबिक डिवाइस को कमरबंद की तरह तैयार किया गया है, जिसे कमर पर बांधकर इसमें लगी पूंछ का इस्तेमाल किया जा सकता है। गिरने की स्थिति में यह विपरीत दिशा में मूव करती है और गिरने से बचाती है। उन्होंने इसका नाम आर्क्यू रखा है।
इसका डिजाइन समुद्री घोड़े से प्रेरित है। यह जलीय जंतु अपनी पूंछ से शिकार पर अटैक करता है और कई चीजों को एक साथ जकड़ने में सक्षम है। रोबोटिक पूंछ को भी ऐसा ही तैयार करने की कोशिश की गई है। इसे छोटा या बड़ा भी किया जा सकता है। ये पूंछ छोटे-छोटे खंडों से मिलकर बनी है। हर खंड भारी है जो पहनने वाले को भारी सामान उठाकर चलने के दौरान बैलेंस बनाने में मदद करता है। रोबोटिक पूंछ में लगे हार्डवेयर का इस्तेमाल गेमिंग और वर्चुअल रिएल्टी में भी किया जा सकता है। शोधकर्ताओं ने फिलहाल इसका एक प्रोटोटाइप तैयार किया है, जिसे हाल ही में लॉस एंजिलिस के वार्षिक अधिवेशन में पेश किया गया था। खास बात ये कि आर्क्यू में कई तरह की रोबोटिक मांसपेशियां लगाई गई हैं। ये मांसपेशियां इसकी लंबाई और इसमें बनने वाले एयर दबाव से संचालित होती हैं। ये शरीर के मूवमेंट के आधार पर खिंचती और सिकुड़ती हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि आर्क्यू का इस्तेमाल एक कंकाल के तौर पर रोबोट में भी किया जा सकेगा जो इनसानी क्षमता वाला होगा।

आयी कंप्यूटर बस लैब
राजस्थान के नागौर जिले में एक कंप्यूटर लैब वाली बस बनाई गई है। इसके माध्यम से 100 सरकारी स्कूलों के 6000 बच्चों को कंप्यूटर, गणित और अंग्रेजी की पढ़ाई कराई जा सकेगी। सूरजमल तापड़िया मेमोरियल ट्रस्ट और सुप्रीम फाउंडेशन ने एक कंप्यूटर लैब मोबाइल बस सेवा (लैब) शुरू की है।
इनमें कंप्यूटर और आधुनिक उपकरण लगे हैं। सूरजमल तापड़िया संस्कृत महाविद्यालय के सचिव जुगल किशोर बियानी ने बताया कि बस उन सरकारी स्कूलों में पहुंचेगी, जहां 11वीं और 12वीं में अंग्रेजी, विज्ञान और कंप्यूटर जैसे विषयों वाले विद्यार्थियों के लिए लैब की व्यवस्था नहीं है।
दावा किया जा रहा है कि यह राजस्थान की पहली आधुनिक बस (लैब) है।
यह प्रयोग सफल रहा तो मोबाइल कंप्यूटर बसों की संख्या और बढ़ाई जाएगी। लाडनूं इलाके में 192 सरकारी स्कूल हैं। 100 स्कूलों में कंप्यूटर लैब और अन्य आधुनिक संसाधन नहीं हैं। ऐसे में यह बस हर दिन तीन स्कूलों तक पहुंचेगी। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. हेमंत कृष्ण मिश्र ने बताया कि बस करीब 45 लाख रुपए में तैयार हुई है।
बस में एक एसी और 21 कंप्यूटर लगे हैं। इनमें एक साथ 21 स्टूडेंट्स को पढ़ाया जा सकेगा। बच्चों को पढ़ाने के लिए हर विषय के तीन शिक्षक भी तैनात किए गए हैं।


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