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बाल कविता

Posted On September - 22 - 2019

हम पंछी
हम पंछी हैं नील गगन के
निकले हैं ऊंची उड़ा़न पर।
पंख पसारे मिलकर सारे
वार करते हैं तूफान पर।
राह खुली है, खुली मंजिलें
थक के नहीं होते चूर हम।
खुली हवा में उड़ते मिल के
लेते आनंद भरपूर हम।
पेड़ों पर बने घर हमारे
घास फूस के बड़े सलौने।
डाल-डाल के पत्ते-पत्ते
बन जाते हैं सभी बिछौने।
बंधे नहीं हम बंधनों में
आजादी के परवाने हैं।
दाना-पानी चुनने वाले
हम मनमौजी दीवाने हैं।
रहा है परों पर नाज हमें
नहीं पिंजरों में बंद करो।
शपथ उठाओ बच्चे सारे
हम से पक्का अनुबंध करो।
एक ही धर्म है हम सबका
राज हमारा इस जहान पर।
हम पंछी हैं नील गगन के
निकले हैं ऊंची उड़ान पर।

                          -गोविंद भारद्वाज


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