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बच्चों को समझाएं रिश्तों के मायने

Posted On September - 1 - 2019

मोनिका शर्मा

माता-पिता को चाहिये कि सबसे पहले वे बच्चों को रिश्तों का महत्व बताएं। यह समझाएं कि आपसी संबंधों के इस ताने-बाने की क्या अहमियत है? इस विषय में नियमित बातचीत करें कि क्यों जरूरी हैं रिश्ते?
रिश्तों का महत्व
बच्चों को यह बताना जरूरी है क्योंकि रिश्तों की अहमियत समझे बिना बच्चे संबंधों को समझना और सहेजना नहीं सीख सकते। यह वाकई सच भी है कि रिश्तों के बिना ज़िंदगी अधूरी-सी ही लगती है। जीवन की पूर्णता पीढ़ियों के जुड़ाव को बनाये रखने में ही है। नयी पीढ़ी रिश्तों का महत्व तभी जानेगी जब उनके मन में आपसी जुड़ाव की सोच और समझ पैदा होगी। यह समझ बच्चों में रिश्तों के प्रति अपनापन और साथ बने रहने का भाव लाती है।
सोशल इवेंट्स का हिस्सा बनाएं
आमतौर पर देखने में आता है कि बच्चे सोशल इवेंट्स में नहीं जाते। इसीलिए रिश्तों से परिचित भी नहीं हो पाते । अक्सर घर के बड़े तो इन सामाजिक समारोहों में जाते हैं पर बच्चे नहीं। पेरेंट्स को चाहिए कि वे बच्चों को भी ऐसे इवेंट्स का हिस्सा बनाएं। रिश्तेदारों से मिलवाएं। इससे बच्चे अपने सामाजिक-पारिवरिक परिवेश और अपनों से जुड़ पायेंगे । ख़ास अवसर पर या किसी रिश्तेदार के यहां होने वाली सोशल इवेंट‍्स के जरिये बच्चे अपनी पारिवारिक परम्पराओं को भी जान पायेंगें। अपने रीति-रिवाजों को समझना-जानना भी रिश्तेदारी का जुड़ाव बढ़ाता है। साथ ही उनके व्यवहार और संस्कार को भी सकारात्मक दिशा देता है। आज के समय में बच्चों के मन में आ रही असामाजिक सोच चिंता का विषय बनी हुई है। यही वजह है कि बाल मनोवैज्ञानिक भी अभिभावकों को बच्चों को सोशल बनाने के लिए ऐसे पारिवारिक इवेंट्स में ले जाने के गाइडलाइंस दे रहे हैं।
नकारात्मक बातों से बचाएं
बड़ों के बीच हुए मनमुटाव या रिश्तों में आई कड़वाहट की बात बच्चों से कभी न करें। ऐसी बातें उनके मन में रिश्तों और रिश्तेदारी की एक नकारात्मक छवि बनाती हैं। इसीलिए रिश्तेदारी में आपसी साथ, समझ और सहयोग से जुड़े अनुभव ही बच्चों से साझा करें। नयी पीढ़ी को रिश्तों के ऐसे खूबसूरत पहलुओं से परिचित करवाएं जो सुख-दुःख में आपका सम्बल बने हों। इतना ही नहीं, अभिभावकों को बच्चों के सामने रिश्तेदारों के फाइनेंशियल स्टेटस की बात भी नहीं करनी चाहिए। इन संबंधों में किसी भी तरह की ऊंच-नीच की बात बच्चों को भी उनमें कमियां देखना ही सिखाती है जो दूरियां बढ़ाने का काम करती है।


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