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पड़ोस में पृथ्वी जैसे ग्रह पर जीवन संभव

Posted On September - 10 - 2019

बाहरी ग्रह खोजने वाले नासा के टेस टेलीस्कोप ने तीन नए ग्रहों का पता लगाया है और वैज्ञानिकों के अनुसार इनमें हमारी पहली समीपवर्ती ‘सुपर-अर्थ’ शामिल है। यह पृथ्वी जैसा ग्रह आवास योग्य हो सकता है। इस सुपर-अर्थ का नाम जीजे357-डी है जो 31 प्रकाश वर्ष दूर एक तारे का चक्कर काट रही है। यह ग्रह अपने तारे के आवास योग्य क्षेत्र में स्थित है। इसका अर्थ यह हुआ कि यह अपने तारे के बहुत नजदीक नहीं है और उससे बहुत दूर भी नहीं है। यदि यह तारे के नजदीक होता तो बहुत गर्म होता और बहुत दूर होने पर बहुत ठंडा होता।
इस क्षेत्र में ग्रह की सतह पर तरल जल का मौजूद होना संभव है बशर्ते वह ग्रह चट्टानी हो। जीजे357-डी का वायुमंडल कितना घना है और वह तरल जल की मौजूदगी के लिए कितना गर्म है, इसका पता लगाने के लिए अभी और रिसर्च की आवश्यकता है। जर्मनी में हाइडलबर्ग स्थित मैक्स प्लांक इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोनॉमी की खगोल वैज्ञानिक डायना कोस्साकोवस्की का कहना है कि जीजे357-डी अपने तारे के आवास योग्य क्षेत्र के बाहरी छोर पर स्थित है और यह अपने तारे से उतनी ही ऊर्जा प्राप्त करता है, जितनी कि मंगल सूरज से प्राप्त करता है। उन्होंने कहा कि यदि इस ग्रह का वायुमंडल घना है तो वह ग्रह को गर्म रखने के लिए समुचित ऊष्मा संचयित कर सकता है। इससे सतह पर तरल जल की मौजूदगी सुगम हो जाएगी।
अमेरिका में कॉर्नेल यूनिवर्सिटी के खगोल वैज्ञानिक लीसा काल्टेनेगर का मानना है कि इस ग्रह पर जीवन संभव है। उन्होंने कहा कि यह सचमुच रोमांचक बात है कि टेस टेलीस्कोप ने हमारे पड़ोस में एक ऐसी सुपर-अर्थ खोजी है जो जीवनधारी हो सकती है। घने वायुमंडल वाला यह ग्रह पृथ्वी की भांति अपनी सतह पर पानी को रोक सकता है। काल्टेनेगर ने कहा कि निर्माणाधीन नए टेलीस्कोपों की मदद से हम वहां जीवन के संकेत भी ग्रहण कर सकते हैं। जीजे357-डी हर 55.7 दिन में अपने तारे की परिक्रमा करता है और अपने तारे से इसकी दूरी सूरज से पृथ्वी की दूरी की करीब 20 प्रतिशत है।

मुकुल व्यास

टेस टेलीस्कोप द्वारा खोजे गए तीनों ग्रह जीजे357 नामक तारे की परिक्रमा कर रहे हैं। यह एम श्रेणी का बौना तारा है जो हमारे सूरज की तुलना में 40 प्रतिशत ठंडा है तथा द्रव्यमान व आकार की दृष्टि से उसका एक-तिहाई है। टेस टेलीस्कोप ने गत फरवरी में यह पता लगाया कि यह तारा हर 3.9 दिन बाद मंदा पड़ जाता है। यह इस बात का संकेत था कि ग्रह इस तारे की परिक्रमा कर रहे हैं। इनमें सबसे नजदीकी ग्रह, जीजे357-बी पृथ्वी से करीब 22 प्रतिशत बड़ा है। वैज्ञानिकों ने इसे ‘गर्म पृथ्वी’ बताया है। गर्म होने के कारण इस पर जीवन होना नामुमकिन है लेकिन नजदीकी चट्टानी ग्रह होने के कारण खगोल वैज्ञानिक इसके वायुमंडल की संरचना का अध्ययन अवश्य करना चाहेंगे। इस सिस्टम के मझोले ग्रह, जीजे357-सी का द्रव्यमान पृथ्वी से 3.4 गुणा अधिक है और यह अपने तारे की परिक्रमा 9.1 दिन में पूरी करता है।
इस खोज से पहले खगोल वैज्ञानिकों ने पृथ्वी से 73 प्रकाश वर्ष दूर तीन ग्रहों का पता लगाया था। इनमें दो ग्रह ऐसे हैं जो ग्रहों के निर्माण में बीच की कड़ी हो सकते हैं। टीओआई-270 नामक इस सिस्टम में एक चट्टानी ग्रह है जो हमारी पृथ्वी से थोड़ा बड़ा है। दो ग्रह गैसीले हैं, जिनका आकार पृथ्वी से करीब दोगुना है। इस सिस्टम के सबसे दूरवर्ती ग्रह पर तापमान की रेंज जीवन के कुछ रूपों के लिए अनुकूल हो सकती है लेकिन इसका वायुमंडल बहुत घना होने के कारण वहां ग्रीनहाउस प्रभाव बहुत तीव्र है, जिसकी वजह से वहां पानी और जीवन होने की संभावना बहुत कम है।
इन नए ग्रहों की खोज मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के खगोल वैज्ञानिक मैक्सिमिलियन गुंथर और उनके सहयोगियों ने की है। इसके लिए उन्होंने टेस टेलीस्कोप का प्रयोग किया। गुंथर ने कहा कि यह एक अनोखा सिस्टम है, जिसमें हमें पृथ्वी जैसे चट्टानी ग्रहों और गैस-प्रधान लघु नेपच्यूनों के बीच की कड़ी को समझने का मौका मिलेगा क्योंकि इस सिस्टम में सभी प्रकार के ग्रह मौजूद हैं। हमारे यहां पृथ्वी, बुध, शुक्र और मंगल जैसे चट्टानी ग्रह तथा शनि, बृहस्पति, यूरेनस जैसे विशाल गैसीले ग्रह हैं लेकिन बीच में कुछ भी नहीं है। उन्होंने कहा कि टीओआई सिस्टम बाहरी ग्रहों के विज्ञान का डिज्नीलैंड जैसा है। यह खगोल विज्ञान के लिए एक बहुत बड़ी प्रयोगशाला है। इस सिस्टम के सबसे नजदीकी ग्रह टीओआई270-बी को अपने तारे की परिक्रमा पूरी करने में तीन दिन लगते हैं जबकि टीओआई270-सी को 5.7 दिन और टीओआई270-डी को 11.4 दिन लगते हैं।
इस बीच, खगोल वैज्ञानिकों ने एक ऐसे बाहरी ग्रह का पता लगाया है जहां लोहे और मैग्नेशियम जैसी धातुएं गैस में बदल कर वायुमंडल से बाहर अंतरिक्ष में जा रही हैं। वैज्ञानिकों ने हबल स्पेस टेलीस्कोप के जरिए फुटबाल जैसे आकार का एक ऐसा ग्रह देखा जहां धातुएं प्रचंड गर्मी से वाष्पित होकर वायुमंडल से बाहर निकल रही हैं। इस ग्रह का नाम डब्ल्यूएएसपी121-बी है और यह पृथ्वी से 900 प्रकाश वर्ष दूर है। यह अपने तारे के इतने ज्यादा नजदीक है कि वायुमंडल का तापमान 2538 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। इस तापमान पर ग्रह की लोहा और मैग्नेशियम जैसी धातुएं उबल कर वायुमंडल से बाहर जा रही हैं। ग्रह पर गुरुत्वाकर्षण की शक्तियां इतनी प्रबल हैं कि ग्रह के फटने का खतरा है। यही वजह है कि यह ग्रह फुटबाल जैसा दिखता है।
यह खोज महत्वपूर्ण है क्योंकि खगोल वैज्ञानिकों ने पहली बार इस किस्म के ग्रह से भारी धातुओं को वायुमंडल से बाहर निकलते हुए देखा है। इस किस्म के ग्रह ‘गर्म बृहस्पति’ या ‘हॉट जुपिटर’ कहलाते हैं। अमेरिका की जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के प्रमुख रिसर्चर डेविड सिंग ने कहा कि गर्म बृहस्पतियों पर पहले भी भारी धातुएं देखी गई हैं लेकिन इनकी मौजूदगी सिर्फ निचले वायुमंडल में ही थी। ध्यान रहे कि बाहरी ग्रहों की खोज के लिए नासा के टेस (ट्रांजिस्टिंग एक्सोप्लेनेट सर्वे सेटेलाइट) को पिछले साल 18 अप्रैल को अंतरिक्ष में भेजा गया था। यह टेलीस्कोप समूचे आसमान के सर्वेक्षण के उद्देश्य से निर्मित किया गया है। यह टेलीस्कोप तारों के सम्मुख गुजरने वाले ग्रहों का पता लगाता है। इसकी रेंज केप्लर टेलीस्कोप के दायरे से 400 गुणा अधिक है।

लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।


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