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निर्माण-निर्यात को तरजीह

Posted On September - 16 - 2019

सत्तर हजार करोड़ के पैकेज से उम्मीद
आखिरकार सरकार को एहसास हो गया है कि अर्थव्यवस्था के आधारभूत निर्माण और निर्यात सेक्टर को गति दिये बिना अर्थव्यवस्था की सुस्ती दूर नहीं होगी। सरकार ने अटकी हुई आवासीय परियोजनाओं को सिरे चढ़ाने के लिये बीस हजार करोड़ रुपये का कोष बनाने की घोषणा की है, जिससे देश के साढ़े तीन लाख फ्लैट खरीददारों को फायदे की उम्मीद है। ये प्रोजेक्ट साठ फीसदी निर्माण के बाद अधूरे पड़े हैं। इनमें दो लाख से अधिक अकेले राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में आते हैं। लेकिन, ये फंड उन्हीं हाउसिंग प्रोजेक्ट्स को मिलेगा जो एनपीए या नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल के तहत नहीं हैं। साथ ही डेवलेपर्स के लिए विदेशों से धन जुटाना आसान बनाया गया है। इसके अलावा सरकारी कर्मियों के लिये घर खरीदने हेतु प्रोत्साहन योजना भी शुरू की है। इसमें हाउस बिल्िडंग एडवांस पर ब्याज दर में कमी की गई है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर खरीदने वालों को भी राहत दी जायेगी। इसी तरह निर्यात सेक्टर में गिरावट को दूर करने के लिये पचास हजार करोड़ के प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा की गई है। अर्थव्यवस्था की सुस्ती दूर करने के लिये सरकार ने पिछले तीन सप्ताह में बड़े फैसले लिये हैं। इनमें अगस्त के अंतिम सप्ताह में अर्थव्यवस्था को गति देने के लिये तीस से अधिक फैसले, बैंकों के लिये सत्तर हजार करोड़, रिजर्व बैंक से 1.7 लाख करोड़ रुपये हासिल करने, विनिर्माण में सौ फीसदी विदेशी निवेश, सिंगल ब्रांड रिटेल कारोबार का सरलीकरण तथा दस सरकारी बैंकों का विलय करके चार बड़े बैंक बनाना भी शामिल है।
सरकार के हालिया पैकेज देने का रियल एस्टेट जगत ने स्वागत करते हुए कहा कि किफायती आवासीय क्षेत्र को सरकार द्वारा राहत दिया जाना समय की जरूरत है। इससे क्षेत्र में उत्पन्न चुनौतियों से निपटने में वह सक्षम बनेगा। साथ ही खरीददारों में भरोसा पैदा होगा। विभिन्न कारणों से फंसी परियोजनाओं में छत हासिल करने की प्रतीक्षा में बैठे लोगों को इससे राहत मिलेगी, जो कालांतर में अर्थव्यवस्था को गति देने में सहायक बनेगा। वहीं निर्यात के कारोबार से जुड़ी कंपनियों को सरकार के ताजा फैसले से अधिक कार्यशील पूंजी मिल सकेगी। नि:संदेह इससे निर्यात क्षेत्र को संबल मिलेगा। हालांकि, रोडटैप योजना का क्रियान्वयन जनवरी, 2020 तक होगा। सरकार ने कहा है कि हथकरघा उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देना उसकी प्राथमिकता है, जिसके लिये सहकारी संस्थाओं तथा कारीगरों को ई-कॉमर्स पोर्टल से जोड़ा जायेगा। बेशक कुछ महीनों के बाद ही इसके परिणाम सामने आयेंगे। रियल एस्टेट व निर्यात के लिये सत्तर हजार करोड़ का पैकेज जारी करते वक्त वित्तमंत्री का दावा है कि औद्योगिक उत्पादन व स्थायी निवेश में सुधार के स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं। उम्मीद की जानी चाहिए कि पिछले छह साल में जीडीपी के सबसे न्यूनतम दर पांच प्रतिशत रहने के बाद हरकत में आई सरकार के हालिया कदमों से अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी। मानसून से कृषि क्षेत्र में गति आने की आशा है। ऐसे में त्योहारी सीजन तक अर्थव्यवस्था में बेहतर परिणामों की उम्मीद सरकार लगा रही है।


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