अभी नहीं बताया-परिवार से कब मिलेंगे अंतिम बार !    भाजपा को सत्ता से बाहर चाहते थे अल्पसंख्यक : पवार !    सीएए समर्थक जुलूस पर पथराव, हिंसा !    टेरर फंडिंग : पाक के प्रयासों को चीन ने सराहा !    177 हथियारों के साथ 644 उग्रवादियों का आत्मसमर्पण !    चुनाव को कपिल मिश्र ने बताया भारत-पाक मुकाबला !    रोहिंग्या का जनसंहार रोके म्यांमार : आईसीजे !    डेमोक्रेट्स ने राष्ट्रपति ट्रम्प के खिलाफ रखा पक्ष !    आईएस से जुड़े होने के आरोप में 3 गिरफ्तार !    आग बुझाने में जुटा विमान क्रैश, 3 की मौत !    

दिनों में न सिमटे देवी पूजन

Posted On September - 29 - 2019

मंजरी शुक्ला
हिंदू संस्कृति में मातृ स्थान प्रथम है। सनातन आदि काल से नवरात्र पूजा चली आ रही है। पितृपक्ष की समाप्ति के दूसरे ही दिन कलश स्थापना के साथ ही मां दुर्गा की आराधना प्रारंभ हो जाती है।
यूं तो हम कन्या को मां दुर्गा का स्वरूप मानते हैं, पर जिस मां की आराधना करने के लिए हम मंदिरों और शक्तिपीठों में घंटों भक्ति भाव से लाइन लगाये खड़े रहते हैं, उसी के जीते जागते स्वरूप को समाज का एक बड़ा वर्ग इन नौ दिनों के अलावा सारे साल लड़की होने का ताना मारता रहता है। नवरात्र में हम कन्याओं का पूजन करते हैं, पर जैसे ही ये 9 दिन खत्म होते हैं, हम वापस अपनी दकियानूसी सोच पर आ जाते हैं।
मुझे याद आता है मेरा बचपन, जिसमें नवमी के दिन का मुझे और मेरी सहेलियों को बेसब्री से इंतजार रहता था। बहुत ही प्यार और दुलार के साथ हमें बुलाया जाता। बुलावा तो मात्र नौ लड़कियों को दिया जाता था, पर हर घर से हम मिलती-जुलती कब बीस लड़कियों की टोली बन जाती, हम जान ही न पाते। कइयों को हमें जबरदस्ती छोड़ना पड़ता। इसमें हमारे साथ एक लंगूर का होना भी बड़ा जरूरी होता था और वो हमें बड़ी मुश्किल से मिलता था। हमारे पहुंचते ही दरवाजे पर एक बड़ी-सी परात में हमारे पैर धोये जाते। फिर साफ सूती कपड़े से थपथपाकर हमारे पैर सुखाये जाते। उस अलौकिक अनुभूति का शब्दों में वर्णन करना बड़ा ही कठिन है। उसके बाद शुरू होता मनुहार का सिलसिला, क्योंकि बहुत सारे घरों में खा-खाकर हमारा पेट नाक तक भर गया होता था। इसके बावजूद उनका प्यार भरा कौर हम खा ही लेते। और आखिरी में हमें एक रुपये का चमचमाता सिक्का मिलता, जिसे पाकर हमारे अंदर एक नयी ऊर्जा का संचार हो जाता और हमारे कदमों में हिरन सी चौकड़ी भरने की फुर्ती आ जाती। आज के दौर में यह हालत हो गई है कि नवमी के दिन 9 कन्याएं तलाशनी भी मुश्किल हो जाती हैं। पहले से दस घरों में कहना पड़ता है, तब कहीं जाकर बमुश्किल 9 कन्याएं इकट्ठी होती हैं। अगर कन्या भ्रूण हत्या चलती रही तो वो दिन दूर नहीं जब नवरात्र में कन्या पूजन के लिए एडवांस बुकिंग करवानी पड़ेगी।
समय बदल रहा है तो भला पूजा के तौर तरीके कैसे न बदलते। आश्चर्यजनक तरीके से अचानक दबे पांव एक आंधी आई और किसी को पता भी नहीं चला। अगर हम कुछ साल पहले की दुर्गा पूजा और सजे हुए पंडालों को याद करें तो हमारे अवचेतन मन में एक सुखद-सी अनुभूति होती है। तब आज की तरह हर घर में कार और प्रत्येक सदस्य के दोपहिया वाहन नहीं होते थे। इसलिए हम कारों की लंबी कतारों और घंटों ट्रैफिक में फंसे होने का दुखद अनुभव प्राप्त नहीं कर पाते थे। आराम से खा-पीकर मां दुर्गा के विविध रूपों को देखने की उत्सुकता हमारे अन्य कार्यों में भी दिखाई देती थी। हम रात मैं दौड़कर पड़ोस की चाची, ताई, बुआ और मौसी को बुला लाते। तब आजकल की तरह आंटी वाला फैशन नहीं था। धर्म संप्रदाय एक न होते हुए भी एक अनजानी आत्मीयता की मजबूत डोर सबको कसकर बांधे हुए थी। हंसी ठिठोली करते हम कब मां दुर्गा के भव्य और सुन्दर पंडालों में पहुंचकर अपना शीश नवा देते और श्रद्धा से हमारी आंखें आसुओं से झिलमिला उठतीं, हम जान ही न पाते। जब भी मां की तरफ देखते तो ऐसा लगता वो मुस्कुराती हुई हमसे बोल पड़ेंगी। अद‍्भुत ऊर्जा का संचार हो जाता। तब मां की झांकी की कीमत रुपये-पैसों से नहीं आंकी जाती थी। पर समय ने करवट ली और लोगों ने पैसा कमाने की रेस में अंधाधुंध दौड़ना शुरू किया तो देवी-देवताओं को भी नहीं बख्शा। सच्ची भक्ति की जगह प्रतिस्पर्धा की भावना आ गई। उसका पंडाल अगर एक लाख में सजने वाला है तो मैं चाहे जान की बाजी लगा दूं, पर दो लाख से कम नहीं लगाऊंगा। वहीं, पंडाल के सामने बनी झोंपड़ी के आगे भूख से बेहाल बच्चे रो-रोकर चाहे अधमरे हो जायें, पर किसी दुकान से एक बिस्कुट का पैकेट खरीद कर नहीं दूंगा।
मां दुर्गा की कृपा तो मात्र ‘जगदम्बिका’ नाम का सच्चे मन से उच्चारण करने से ही प्राप्त हो जाती है, फिर महज दिखावे के लिए करोड़ों रुपये बहा देना कहां की अक्लमंदी हैं। हमें समाज की मदद करते हुए और आडंबरों पर न जाते हुए नवरात्र के असल मायने समझने हाेंगे, तभी हम पर भगवती की कृपा वास्तव में
बरसेगी।


Comments Off on दिनों में न सिमटे देवी पूजन
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading...
Both comments and pings are currently closed.

Comments are closed.

Powered by : Mediology Software Pvt Ltd.