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टिक्कू का गिफ्ट

Posted On September - 8 - 2019

बाल कहानी

मंजरी शुक्ला
‘मम्मी मुझे एक छोटा-सा बिल्ली का बच्चा चाहिए।’ आठ साल का टिक्कू मम्मी से बोला।
मम्मी तुरंत बोली, ‘बिल्ली सारा दूध पी जाया करेगी।’
‘पर मम्मी मेरे सभी दोस्तों के पास पालतू जानवर हैं, मुझे भी एक चाहिए।’
मम्मी ने बात बदलते हुए कहा, ‘जाओ, जल्दी से जाकर पार्क में अपने दोस्तों के साथ खेल लो, वरना अंधेरा हो जाएगा।’
‘मैं अभी जाता हूं।’ टिक्कू खुश होते हुए बोला और बिल्ली की बात भूल कर पार्क की ओर दौड़ पड़ा।
थोड़ी देर बाद जब वह पार्क से लौटकर आया तो मम्मी से बोला, ‘मेरे दोस्त कह रहे हैं कि मैं कुत्ता पाल लूं।’ मम्मी कुत्ता पालने की बात सुनकर घबरा गई। वह तुरंत बोली,‘कुत्ते को सुबह-शाम सैर कराने के लिए बाहर ले जाना पड़ेगा। वह सारी रात भौंकेगा तो मैं ठीक से सो भी नहीं पाऊंगी।’
टिक्कू को मम्मी की बात सही लगी। वह कुछ देर बाद सोचने के बाद बोला,‘हम खरगोश पाल लेते है।’
‘खरगोश!!’ मम्मी ने टिक्कू की तरफ़ आश्चर्य से देखते हुए पूछा
‘सफ़ेद रंग के प्यारे-प्यारे खरगोश कितने सुंदर लगेंगे।’ कहते हुए टिक्कू के चेहरे पर चमक आ गई।
मम्मी तुरंत बोली,‘तुम्हें पता है, गाजर के साथ-साथ खरगोश तुम्हारे जूते, मोज़े, कपड़े और किताबें भी चबा जाएगा।’ यह सुनकर टिक्कू उदास हो गया और पढ़ाई करने बैठ गया। पर उसके दिमाग में लगातार पालतू जानवर घूम रहे थे। वह सोच रहा था कि कौन सा जानवर पाले।
तभी अचानक उसे कुछ याद आया और वह दौड़ते हुए मम्मी के पास जाकर बोला,‘हम कछुआ पाल लेते हैं। वह एक कोने में चुपचाप बैठा रहेगा।’
मम्मी हमेशा की तरह बोली,‘क्यों चुपचाप बैठा रहेगा। अरे, वह धीरे-धीरे सारे घर में चलता रहेगा और उसे ढूंढना तो बहुत ही मुश्किल काम होगा।’ टिक्कू यह सुनकर चुपचाप अपने कमरे में चला गया। तभी उसके मामा का फ़ोन आया, जो उसे बहुत प्यार करते थे। टिक्कू ने जब उनसे फ़ोन पर बात की तो उन्हें मम्मी की बातें बताते हुए वह बहुत दुखी हो गया। उसके मामा हंसते हुए बोले,‘तुम बिल्कुल परेशान मत हो। मैं कल तुम्हारे लिए एक बढ़िया सा गिफ्ट लेकर आऊंगा।’ सुनते ही टिक्कू मुस्कुरा दिया।
मामा बोले,‘मम्मी को इस बारे में कुछ मत बताना। यह उनके लिए भी एक सरप्राइज गिफ्ट होगा।’
अगले दिन रविवार था। इसलिए उसने देर रात तक मम्मी से ढेर सारी बातें की और एक जादूगर की कहानी भी सुनी। सुबह नहा धोकर तैयार होकर टिक्कू मामा का रास्ता देखने लगा। तभी डोर बेल बजी। मम्मी दरवाज़ा खोलने के लिए जाती, इससे पहले ही टिक्कू ने दौड़ कर दरवाजा खोल दिया। सामने मामा खड़े मुस्कुरा रहे थे। टिक्कू ने मम्मी की ओर देखा। मम्मी ने घबराकर कुर्सी का हत्था पकड़ लिया।
मामा यह देखकर जोरों से हंस पड़े और अंदर आ गए।
‘यह क्या है?’ मम्मी ने थूक निगलते हुए मामा से पूछा।
मामा ने अपने दाएं कंधे की ओर देखा, जिस पर एक छोटा सा बंदर का बच्चा बैठा हुआ था।
‘यह टिक्कू का गिफ्ट है।’
मम्मी ने बन्दर के बच्चे को घूरते हुए कहा,‘गिफ्ट..पर ये बंदर!’
‘हां, तुम्हें यह तो कुत्ता, बिल्ली, खरगोश, कछुआ…कोई भी पसंद नहीं है, इसलिए मैं बंदर ले आया हूं।’
‘क्यों टिक्कू तुम्हें पसंद है ना?’ मामा ने मुस्कुराते हुए पूछा।
टिक्कू तो खुशी के मारे ताली बजा-बजा कर हंसने लगा और बोला,‘मुझे बहुत, बहुत और बहुत पसंद है।’ और यह कहते हुए वह डाइनिंग टेबल से एक केला उठा कर ले आया और बन्दर के बच्चे को दिया। बंदर के बच्चे ने तुरंत केला पकड़ लिया और छिलका छील कर खाने लगा। मामा और टिक्कू ठहाका मारकर हंस पड़े और मम्मी, वह सोच रही थी कि उन्होंने शुरुआत में ही बिल्ली का बच्चा लाने के लिए क्यों मना कर दिया था।


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