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जन संसद

Posted On September - 16 - 2019

यातायात नियमों में सख्ती

सख्ती जरूरी मगर…
नये मोटर वाहन अधिनियम को सख्त बनाया जाना समय की मांग थी। लेकिन जिस तरह से वाहनों की कीमतों से भी अधिक राशि के चालान काटने के उदाहरण तथा जनमानस की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं, उसे देखकर लगता है कि अधिनियम ज्यादा ही सख्त बना दिया गया है। मोटर वाहन अधिनियम के निर्धारित लक्ष्य के लिए इतनी सख्ती की नहीं, बल्कि लोगों को जागरूक करने की जरूरत है। वहीं चालान राशि अधिक होने के कारण भ्रष्टाचार की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इस अधिनियम की सख्ती केवल सरकारी खजाना भरने मात्र का जरिया न बने।

राजकुमार, राजौंद

जिम्मेदारी निभाए सरकार
भारत में सबसे ज्यादा कानून बनते हैं। लेकिन जरूरत है उन कानूनों का ठीक से पालन और ईमानदारी से क्रियान्वयन करवाने की। यह जरूरी है कि ट्रैफिक नियमों की अवहेलना करने वालों को कठोर आर्थिक दण्ड मिलना ही चाहिए। वैसे प्रतिवर्ष डेढ़ लाख मरने वाले सारे लोग ट्रैफिक नियमों की अवहेलना से नहीं मरते, अपितु सड़क के गड्ढों में अचानक गिरने और पीछे से आ रहे वाहनों से कुचलकर भी मरते हैं। इसलिए केवल कठोर आर्थिक दण्ड ही काफी नहीं है अपितु सरकार अपने दायित्वों को भी ईमानदारी से निभाए।

निर्मल कुमार शर्मा, गाजियाबाद, उ.प्र.

भ्रष्टाचार भी रुके
यातायात नियमों की अनदेखी के कारण हर वर्ष देश में लाखों लोग या तो काल का ग्रास बन जाते हैं या चोटिल हो जाते हैं। अत: यातायात नियमों को सख्त बनाने के लिए जुर्माने की राशि में बढ़ोतरी करना सराहनीय कदम है। सरकार द्वारा जुर्माने की राशि में भारी इजाफा करने से चालकों की लापरवाही पर नकेल कसी जा सकती है, दुर्घनाटओं में कमी आयेगी और जानी नुकसान में कमी होगी। भारी जुर्माने को लेकर भ्रष्टाचार से भी इनकार नहीं किया जा सकता। सरकार से अपेक्षा की जानी चाहिए कि भ्रष्टाचार रोकने के लिए भी कोई पुख्ता इंतजाम करे।

रूप सिंह नेगी, सोलन, हि.प्र.

जागरूक भी करें
ट्रैफिक नियमों की अवहेलना करने वालों पर लगाम कसने हेतु नया मोटर वाहन अधिनियम स्वागतयोग्य है। निश्चय ही मोटर नियमों की अवहेलना दुर्घटनाओं को जन्म देती है। लेकिन दोपहिया वाहनों पर भारी-भरकम जुर्माना तर्कसंगत नहीं है क्योंकि अधिकतर मामलों में जुर्माना वाहन की कीमत से भी ज्यादा है। सुधार मात्र राजस्व वसूलने के लिए न हो बल्कि सरकार लोगों को भी जागरूक करे। साथ ही लोगों को सुरक्षा एवं सुविधा देने के लिए भी जवाबदेही तय हो।

रवि नागरा, नौशहरा, साढौरा

समय की मांग
सरकार द्वारा लागू किए गये नये मोटर व्हीकल अधिनियम में जुर्माने के तौर पर वसूलने वाली धनराशि बहुत ज्यादा है। दूसरा पक्ष देखा जाए तो अधिक राशि वसूलने पर लोग नियमों का पालन करेंगे। लोगों को स्वयं जागरूक व सतर्क रहने की जरूरत है। रिपोर्ट के अनुसार 2018 में देश में तकरीबन 1.49 लाख से ज्यादा सड़क दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। हर साल राज्यों में सड़क दुर्घटनाएं बढ़ी हैं न कि कम हुई। लोग भी बिना किसी सख्त कानून के मानते नहीं हैं। ऐसे में नया मोटर वाहन अधिनियम समय की मांग है।

जानवी बिट्ठल, जालंधर

ईमानदारी से पालन हो
देश में अधिकतर सड़क दुर्घटनाएं वाहन लापरवाही से चलाने के कारण होती हैं। नया मोटर वाहन अधिनियम लागू होने से दुर्घटनाओं में कमी अवश्य आयेगी। लोग भारी-भरकम जुर्माने से बचने के लिए निश्चय ही ट्रैफिक नियमों का पालन करेंगे। सरकार की भी जिम्मेदारी बनती है कि वह भी लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करे। सड़कों का रखरखाव, ट्रैफिक लाइटें, सिगनल दुरुस्त हो और ट्रैफिक पुलिस ईमानदारी से काम करे। ट्रैफिक नियमों के प्रति लोगों में जागरूकता पैदा करे। भारी जुर्माना केवल राजस्व प्राप्ति तक सीमित न रह जाये।

सत्यप्रकाश गुप्ता, खलीलपुर, गुरुग्राम

जवाबदेही सुनिश्चित हो
पूरे विश्व में लगभग 14 लाख लोग सड़क हादसों में अपनी जान गंवाते हैं, जिसमें से दस फीसदी भारत के हिस्से में आता है। इन हादसों में मरने वाले केवल वयस्क और बुजुर्ग ही नहीं, बल्कि बड़ी संख्या उन मासूम व नाबालिग बच्चों की भी है, जिनके कंधों पर देश के सुनहरे भविष्य की जिम्मेदारी है। जरूरी है कि नए नियमों का क्रियान्वयन हो व निगरानी-तंत्र को सुदृढ़ किया जाए। ट्रैफिक पुलिस द्वारा घूस लेने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाना होगा तभी कठोर नियमों का सकारात्मक परिणाम आ सकेगा तथा सड़क पर सुरक्षित सफर की जवाबदेही सुनिश्चित हो सकेगी।

देवेंद्रराज सुथार, जालोर, राजस्थान


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