मां भद्रकाली मंदिर में नड्डा ने की पूजा-अर्चना !    अब कैथल भी चटाएगा सुरजेवाला को धूल : दिग्विजय !    मानेसर जमीन घोटाला : हुड्डा नहीं हुए पेश, चार्ज पर बहस जारी !    प. बंगाल सचिवालय पहुंची सीबीआई !    कोलंबिया विमान हादसे में 7 की मौत !    विरोध के बीच पार्किंग दरों का एजेंडा पारित !    एकदा !    कांग्रेस करेगी मौजूदा न्यायाधीश से जांच की मांग !    ‘कमलनाथ के खिलाफ मामला सज्जन कुमार से ज्यादा मजबूत’ !    मोहाली मैच के लिये पहुंचीं भारत और दक्षिण अफ्रीका की टीमें !    

जन संसद

Posted On September - 9 - 2019

खेलों में बेटियों की कामयाबी

बदलाव का दौर
खेलों में महिलाओं के योगदान की शुरुआत वर्ष 2000 के ओलम्पिक में कर्णम मल्लेश्वरी ने मेडल जीतकर की। जैसे-जैसे लड़कियों को अवसर मिल रहे हैं, सफलता मिलने के समाचार भी लगातार मिल रहे हैं। यानी देश बदल रहा है। पी.वी. सिंधु, एथलीट साक्षी मलिक, सुपर सीरीज विजेता सायना नेहवाल, मुक्केबाजी में विश्व चैम्पियन मैरीकॉम ऐसे बहुत से नाम हैं, जिन्होंने खेलों में नाम बढ़ाया। कह सकते हैं इन्होंने अन्य महिला खिलाड़ियों को आगे बढ़ने में सम्बल प्रदान किया है। यह देश के लिए भी सुखद है।

कपिल करवा, हनुमानगढ़, राजस्थान

सहयोग करें
पी.वी. सिंधु ने विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक अपने नाम करके सिद्ध कर दिया है कि लड़कियां किसी से कम नहीं हैं। पी.टी. उषा, साक्षी मलिक, दीपा कर्माकर, दीपिका कुमारी, साइना नेहवाल, गीता फोगाट, सानिया मिर्जा आदि अनेक खिलाड़ी हैं, जिन्होंने खेलों में प्रतिभा का हुनर दिखाकर दर्शाया कि अगर लड़कियों को उनकी काबिलियत दिखाने का मौका मिले तो वे जीत का परचम लहरा सकती हैं। लेकिन अफसोस इस बात का है कि आज भी हम लड़कियों के प्रति संकीर्ण सोच रखते हुए उनके सपनों को पूरा करने में सहयोग नहीं करते हैं।

राजेश कुमार चौहान, जालंधर

किसी से कम नहीं
पी.वी. सिंधु ने बैडमिंटन वर्ल्ड चैंपियनशिप जीतकर इतिहास रचा है। पिछले कुछ वर्षों में पुरुषों के मुकाबले बेटियों ने अंतर्राष्ट्रीय खेलों में भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में स्वर्णिम सफलताएं हासिल करके साबित कर दिया है कि वे भी किसी से कम नहीं हैं। हरियाणा की बेटियों ने तो सोने के तमगे जीतकर राज्य का नाम रोशन कर दिया। पी.वी. सिंधु ने बैडमिंटन में वर्ल्ड चैंपियनशिप जीतकर देश की बेटियों को प्रोत्साहन तथा प्रेरणा देने का काम किया है। खेलों में बेटियों की कामयाबी का मतलब है कि अगर लड़कियों को आवश्यक प्रशिक्षण दिया जाये तो वे किसी भी क्षेत्र में बाजी मार सकती हैं।

शामलाल कौशल, रोहतक

सुविधा-प्रशिक्षण मिले
भारत की बेटियों ने खेलों में बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। हिमा दास, पी.वी. सिंधु, मैरीकॉम, साइना नेहवाल, कर्णम मल्लेश्वरी, हिना सिद्धू, साक्षी मलिक, राही सरनोबत, श्रेयसी सिंह जैसी कई खिलाड़ियों ने देश का नाम विश्वस्तर पर रोशन किया है। बेटियों की कामयाबी दर्शाती है कि वे बेटों से हरगिज कम नहीं। उन्हें कमतर आंकने की भूल बिल्कुल न की जाए। अगर पर्याप्त सुविधाएं, प्रशिक्षण मिले तो बेटियां खेलों में भारत को विश्व के शिखर पर विराजमान कर सकती हैं।

ज़फर अहमद, रामपुर डेहरू, मधेपुरा

सोच बदली
पी.वी. सिंधु, हिमा दास, दुती चंद से लेकर मैरीकॉम, सानिया मिर्जा, गीता व बबिता फोगाट जैसे कुछ सितारे ऐसे हैं, जो सफलता के उस मुकाम पर हैं, जहां पहुंचना मुश्किल तो नहीं पर फिलहाल खिलाड़ियों के लिए आसान नहीं है। आज सोच बदल चुकी है। आज महिला खिलाड़ी आत्मनिर्भर व आत्मविश्वासी हैं, जो पुरुष प्रधान चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में भी अपनी योग्यता प्रदर्शित कर रही हैं। यदि देश का विकास करना है तो महिलाओं का उत्थान करना होगा।

अमन सिंह, बरेली, उ.प्र.

सुखद बयार
आज जिस तरह नारी प्रत्येक क्षेत्र में आगे आ रही है, उसे देखते हुए लग रहा है कि सच में देश विकास कर रहा है। जब बेटियां शिखर पर आती हैं तो वह न सिर्फ खुद विजय होती हैं बल्कि समाज की अन्य लड़कियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनकर अन्य लड़कियों का भविष्य भी संवारती हैं। आज जब देश की बेटियों की इन सफलताओं को देखते हैं तो बदलाव की भावना जागती है। पी.वी. सिंधु, मैरीकॉम व अन्य बेटियों की सफलता से लगता है कि अब कोचिंग का क्षेत्र भी काफी विकसित हुआ है। यानी देश इन बेटियों को वे सभी संसाधन दे रहा है, जिससे वे जीत हासिल कर सकें।

जानवी बिट्ठल, जालंधर

उम्मीदों की बेटियां
एक बार फिर दुनिया हिन्दुस्तान की बेटियों का लोहा मानने को मज़बूर हैं। खेलों के आसमान पर धाक जमाती बेटियों पर देश को गर्व है। इन बेटियों ने देश के सामने चुनौती रख दी है कि खेल कोई भी हो, बेटियों को कम आंकना बड़ी भूल होगी। जहां उनको पहचान और सही मंच देने की जरूरत है, वहीं खेलों के अलावा दूसरे क्षेत्रों में भी बढ़ावे की दरकार है। खेलों में लड़कियों का इस तरह आगे आना बदलते देश के लिए एक सुखद संकेत है। अपने इन होनहार खिलाड़ियों से देश बार-बार ऐसी जीत की उम्मीद रखता है। हमें लड़कियों के प्रति अपनी सोच बदलनी चाहिए।

एमके मिश्रा, रातू, झारखंड


Comments Off on जन संसद
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading...
Both comments and pings are currently closed.

Comments are closed.

Powered by : Mediology Software Pvt Ltd.