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एकदा

Posted On September - 17 - 2019

राजाश्रय से निर्लिप्ता
प्रसिद्ध संत नीत्शे अपनी विद्वत्ता के चलते खूब लोकप्रिय हो रहे थे। दिन-रात दर्शनार्थियों का तांता उनके द्वार पर लगा रहता था। उनके भक्तों और प्रशंसकों की बढ़ती संख्या देखकर, वहां के राजा ने भी अपना कर्तव्य समझते हुए संत के लिए उनके घर पर पर्याप्त मात्रा में रेशमी वस्त्र, बढ़िया खाद्य सामग्री और ढेरों आराम की सामग्री भिजवा दी। साथ में चार सेवक भी उनकी सेवा में नियुक्त कर दिए। इतना सारा सामान घर में आया देखकर संत की पत्नी अति प्रसन्न होते हुए संत से बोली- चलो, अब कुछ दिन तो सुख-चैन से बीतेंगे। हमारा राजा कितना अच्छा है। मगर इन सबसे निर्लिप्त नीत्से ने सेवकों सहित सारा सामान उसी समय वापिस राजा के पास भिजवा दिया। संत के इस व्यवहार से खिन्न पत्नी ने संत से सामान वापस लौटाने का कारण पूछा। इस पर संत ने गम्भीर स्वर में जवाब दिया- आज लोगों की बातें सुनकर राजा ने मेरा आदर-सम्मान करते हुए यह सब सामग्री उपहार स्वरूप भिजवाई है। कल को यही राजा अगर लोगों से मेरे बारे में कुछ गलत बातें सुन लेगा, तो उसे भी सच मानकर मेरा अपमान करते हुए नगर से बाहर भी कर सकता है। ऐसी सुनी-सुनाई बातों पर अमल करने वाले लोगों से हमें सावधान रहना चाहिए।
प्रस्तुति : मुकेश कुमार जैन


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