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आस्था के कारोबार का स्याह सच

Posted On September - 15 - 2019

जोगिंद्र सिंह

आज हम जिस भागमभागम और आपाधापी वाले दौर में जी रहे हैं वहां कोई भी सुखी, प्रसन्न नहीं है। बेशक हम आर्थिक तौर पर समृद्ध हो गये हों और हमने अपने ऐशोआराम की तमाम सुविधाएं जुटा ली हों मगर हमारा मन फिर भी भीतर से एक अज्ञात भय के चलते अशांत और उद्वेलित रहता है। शांति और सुकून की तलाश में लोग गुरुओं और डेरों का रुख करते हैं। डेरों और आश्रमों का धंधा भी इसीलिये चमक रहा है क्योंकि इनके यहां दुखी, अशांत और भयग्रस्त लोग सुख प्राप्ति, शांति और सुकून की चाह में अपना सर्वस्व कुर्बान करने को तत्पर रहते हैं। जिसका ये बाबा लोग जमकर दोहन करते हैं और अपनी दुकानदारी चमकाते हैं। दरअसल, भक्त लोग अपना ज्ञान व अपने अहम‍् और अपनी रोशनी को बाबा की बड़ी ईगो और बड़ी रोशनी में डुबा देते हैं जो एक बड़े ब्लैक होल की तरह ही है, यही ‘महामृत्यु का ब्लैक होल’ की तरह है।
जिस तरह से ब्लैक होल बड़ी-बड़ी आकाशगंगाओं तक को खा जाता है, उसी तरह से बाबा भी सभी के वजूद को खत्म कर उन्हें पहचान आदि से काटकर पूरी तरह ब्लैक होल में पहुंचा देता है। आत्मा-परमात्मा, ज्ञानी-अज्ञानी जैसे सभी गूढ़ विषयों के बारे में बाबाओं के ट्रेनर व टीचर बने चेले अपने अधकचरे आध्यात्मिक ज्ञान से भरमाने में लगे रहते हैं। कई आकाश जैसे ढीठ किस्म के ‘भक्त’ कुछ ज्यादा तर्क-वितर्क और यहां तक कि कुतर्क से करते भी प्रतीत होने लगते हैं जो उनके धंधे के लिये खतरा मालूम पड़ने लगते हैं। इन बाबाओं के तिलिस्मी किले से कोई बाहर नहीं जा सकता। चाहे वह रूसी बाबा हो, स्वामी शिवानंद हों या फिर स्वामी नित्यानंद हों। एक बार आये तो फिर डेरे रूपी ‘भूलभुलैया’ वाले किले की दीवारें उसे ‘कैद’ कर लेती हैं।
‘महामृत्यु का ब्लैक होल’ लेखक डॉ. अजय शर्मा का 12वां उपन्यास है, जो डेरों और आश्रमों के गोरखधंधे और डर के आधार पर खड़े किये गये एक बड़े साम्राज्य की पोल खोलता है। दरअसल, बाबाओं के चेलों की एक लंबी-चौड़ी लाइन ऐसा भ्रमजाल बुनती है कि उसमें एक बार फंसने वाला फंसता ही चला जाता है। ढोंगी बाबा अपने चेले को अपना सर्वस्व उनको ही समर्पित कर देने को विवश कर देता है। वैसे तो लेखक पेशे से डॉक्टर है और आकाशानंद के नाम से जाना जाता है। अखबार में काम करने के कारण उसमें चीजों को जानने की ललक भी है, जिस कारण वह अंदर तक झांकने का प्रयास करता है। कई बार खतरों का सामना करते हुए जिज्ञासु किस्म का यह भक्त बड़े ही प्रतिष्ठित लोगों के सामने डेरे के राज खोल देने पर वह मीडिया का चहेता बन जाता है। पूरा उपन्यास बड़ा ही रोचक है। शुरू से लेकर आखिर तक पढ़ने में कहीं भी नीरसता प्रतीत नहीं होती।
पुस्तक : महामृत्यु का ब्लैक होल लेखक : डॉ. अजय शर्मा प्रकाशक : लोकोदय प्रकाशन, लखनऊ पृष्ठ : 132 मूल्य : रु. 175


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