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Posted On September - 11 - 2019

गुरु का सम्मान
5 सितंबर के दैनिक ट्रिब्यून में कृष्ण प्रताप सिंह का लेख ‘दर्शन मूल्यों पर केंद्रित शिक्षा का लक्ष्य’ अध्यापक दिवस के पर्याय डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन प्रतिमूर्ति का साक्षात्कार कराने वाला था। डॉक्टर कृष्णन के सपनों को साकार करने वाले शिक्षकों की कार्यशैली व शैक्षिक ढांचे में भारी बदलाव आ गया है। भारतीय संस्कृति में गुरु को भगवान से ऊपर बताया गया है, वर्तमान में शिष्य की भौतिक सोच ने गुरु के सम्मान को घटाया है।
अनिल कौशिक, क्योड़क

जाने नयी पीढ़ी
भारत में गाय का प्राचीन काल से खासा धार्मिक महत्व है। गांवों में लोग गोमूत्र, गोबर, दूध आदि का उपयोग करते आए हैं। गाय से जुड़े बहुत से कार्य गांव तक ही सीमित रह गए। नयी पीढ़ी इससे दूर होती जा रही है। गाय से जुड़े त्योहारों को नयी पीढ़ी को समझने में कठिनाई होगी क्योंकि ये त्योहार शहरों में विलुप्त होने लगे हैं। गाय के महत्व और गौ पालन नई पीढ़ी को समझाना आवश्यक है।
संजय वर्मा,मनावर, धार, म.प्र.

साक्षरता के मायने
8 सिंतबर को हर साल विश्व साक्षरता दिवस मनाया जाता है। इस साल की थीम, ‘साक्षरता एवं बहुभाषावाद’ था। यह दिवस मनाने का एक मात्र कारण लोगों में जागरूकता लाना है ताकि उन्हें अहसास हो कि जिंदगी के विकास के लिए शिक्षा कितनी जरूरी है। शिक्षा के क्षेत्र में भारत अभी भी पीछे है। बहुत से ऐसे गांव हैं, जहां आज भी स्कूलों तक की सुविधा नहीं है। सरकार को इस क्षेत्र में अधिक कार्य करने की जरूरत है।
जानवी बिट्ठल, जालंधर

सख्ती के सबक
वाहन चालकों पर वर्तमान सख्ताई सरकार के लिए मुश्किल तो साबित नहीं होगी, देखने की बात है। अभी तीन राज्यों हरियाणा, महाराष्ट्र और झारखंड के चुनाव सिर पर हैं और उसके बाद दिल्ली के चुनाव भी निकट हैं। लोगों का मानना है कि वर्तमान हालात को देखते हुए उठाये गये कदम बिल्कुल सही हैं।
वेद मामूरपुर, नरेला

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