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आखिर घर से निकलो ही क्यों

Posted On September - 10 - 2019

आलोक पुराणिक

नेटफ्लिक्स, अमेजन प्राइम में गिरफ्तार पीढ़ी के लिए एक नयी हथकड़ी और आ गयी है। रिलायंस जियो वालों ने घोषणा कर दी है कि अब नयी तकनीक से घरों में ही नयी फिल्मों को फर्स्ट डे, फर्स्ट शो देखने की व्यवस्था हो जायेगी। कुछ खास प्लान लेकर बंदा घर में ही नयी रिलीज फिल्म देख सकता है।
इंटरनेट ने हर आइटम की होम डिलीवरी का इंतजाम कर दिया है। खाना खाना हो तो स्विगी, जोमोटो पर आर्डर कर दो। राशन-पानी मंगाना हो, बिग बास्केट से लेकर अमेजन तक का जुगाड़ है। फिल्म देखनी हो, अब फर्स्ट डे, फर्स्ट शो का जुगाड़ हो लेगा। फिल्म की बेहूदगियां अगर कम लग रही हों, तो भयंकर गाली-गलौज वाली वेब सीरीज के लिए नेटफ्लिक्स से लेकर एमेजन प्राइम तक पर जा सकते हैं।
घर से निकलो ही क्यों।
फोकटी की गप, चुगली चर्चा के लिए तो कहीं जाना पड़ेगा ना। नहीं, इसके लिए व्हाट्सअप ग्रुप हैं।
घर से निकलने की जरूरत तब तो पड़ेगी ना, जब कमाने धमाने के लिए जाना होगा। ना इसकी जरूरत भी अब खत्म-सी है। वर्क फ्रॉम होम-मेरे मोहल्ले में एक लेडी ने अपने घर में पार्ट टाइम किचन-टिफिन सप्लाई का काम शुरू किया। उस लेडी को अपनी सहेलियों के निकम्मेपन पर अटूट भरोसा था कि कोई भी शाम का खाना बनाना पसंद नहीं करती। वह किचन-टिफिन वाली लेडी भी घर से बाहर ना निकलती। घर से बाहर उनका खाना निकलता है और पैसे उनके खाते में आ जाते हैं।
पुराने वक्तों की बात है, फिल्म देखने जाना किसी सिनेमा हाल में, अपने आप में एक तर्जुबा हुआ करता था। बंदा सजधज कर निकलता था। खास प्रयोजनों से टिकट विंडो वाले से निवेदन भी करता था कि भाई कोने वाली सीट कर देना। अब कई सिनेमाहाल और खास तौर पर सिंगल स्क्रीन सिनेमा हाल तो एकदम खाली हो रखे हैं। कोने की सीट की क्या बात करें, पूरे के पूरे सिनेमा हाल को पब्लिक ने कोने में डाल रखा है।
पर घर से बाहर निकलना नहीं है तो बंदा काहे को नयी शर्ट-पैंट, साड़ी-सूट खरीदे। नयी पैंट, साड़ी, सूट आपको क्या लगता है, बाहर कहीं पहनकर जाने के लिए खरीदे जाते हैं। जी नहीं, उनका प्रयोग तो इतना है कि उनके फोटू फेसबुक पर अपलोड करके, दोस्तों और कम दोस्तों की पहचान कर ली जाये। जो सिर्फ लाइक करे साड़ी-सूट के फोटो, तो समझो कि बहुत घटिया टाइप का दोस्त है। और जो विस्तार से कमेंट लिखे, उसे समझो कि वही अच्छा दोस्त है और सबसे जिगरी दोस्त तो वह है कि एक ही सूट-साड़ी की फोटू पर दस-दस कमेंट ठोंक दे।
सूट साड़ी पहनकर अगर घर से बाहर जाना ही नहीं है तो इनका कारोबार बंद हो जायेगा क्या।
नहीं, हर सूट और साड़ी वाला अपनी दुकान के कोने में एक सेल्फी सेंटर खोल देगा, जहां जाकर बंदा या बंदी अपने पसंद के सूट और साड़ी के साथ सेल्फी खींच लेगा और उसे फेसबुक पर अपलोड कर देगा। साड़ी के शोरूम वाला कहेगा-बहनजी बिल्कुल नयी साड़ियां आयी हैं, अभी तक किसी ने सेल्फी ना ली है उनके साथ, आपके लिए एकैदम एक्सक्लूसिव टाइप।


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