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असंयमित मन की भटकन

Posted On September - 15 - 2019

केवल तिवारी

खासतौर से बच्चों, शिक्षकों, अभिभावकों के लिए मजेदार कहानियां लिखने वाले रस्किन बॉन्ड ने इस बार लीक से एकदम हटकर रचना लिखी है। कथ्य, कथानक ही नहीं शैली और शिल्प की दृष्टि से भी यह रचना बिल्कुल अलहदा है। इंसान के अंदर यौनेच्छा एक स्वाभाविक गुण होता है, लेकिन इनसान समस्त जीवों में इसीलिए ‘श्रेष्ठ’ है कि वह संयम रखना भी जानता है। रस्किन बांड के इस ताजा उपन्यास में कहानी एक ऐसे व्यक्ति की है जो यौनेच्छा पर संयम रखता ही नहीं है, उसकी परवरिश का ही एक ‘डिफॉल्ट’ है। उपन्यास की शुरुआत इसी भटकाव के साथ होती है जहां पहाड़ों पर एक गुफा में उसे कोई योगी मिलता है। फ्लैशबैक की तरह कहानी चलती है। वह योगी को भी अपने कामोत्तेजना वाली कहानी सुनाना चाहता है।
कहानी के मूल पात्र बचपन से ऐसी परिस्थितियों का ‘शिकार’ होता है। किशोरावस्था के दौरान अपने से बहुत बड़ी एक महिला के संबंध में वह कहता है, ‘मेरे भीतर इच्छा उमड़ पड़ी। मैं उसके खुरदुरे चुंबनों और रूखे स्पर्श के लिए तड़पने लगा।’
किताब में एक जगह लिखा गया है, ‘अट्ठारह साल का नौजवान, जो अचानक खुद को कामुकता के एक योद्धा के तौर पर पाता है, काफी उग्र हो जाता है। इतने विवेकहीन तरीके से कि वह खुद उसके लिए अच्छा नहीं होता।’
दरअसल, ‘रसिया’ मूलत: रस्किन बॉन्ड किताब ‘द सेंसुअलिस्ट’ की अनुवादित रचना है और ‘बेस्ट सेलिंग’ नॉवेल है।
पुस्तक : रसिया लेखक : रस्किन बॉन्ड, प्रकाशक : राजपाल एंड संस, दिल्ली पृष्ठ : 95 मूल्य : रु. 140.


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