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अद्भुत हैं ये टूल्स

Posted On September - 29 - 2019

कुमार गौरव अजीतेन्दु

किसी भी उस दूसरे राज्य, जहां की भाषा हम समझ न पाते हों, वहां जाने पर काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
इसी को ध्यान में रखते हुए गूगल फॉर इंडिया ने ‘गूगल लेंस’ एप में यह सुविधा देनी शुरू कर दी है कि तुम किसी भी भारतीय भाषा में लिखे शब्द और वाक्यों को मलयालम, तमिल, तेलुगु और मराठी में पढ़ सकते हो।
गूगल लेंस एप करेगा सभी भाषाएं पढ़ने में सहायता
‘गूगल लेंस’ एप के जरिए तुम कैमरे को जहां फोकस करोगे, वहां तमिल, मलयालम, मराठी या अन्य भाषा में जो भी लिखा है वह तुमको हिंदी में उसी रंग, उसी आकार के अक्षरों में नज़र आएगा। और तो और अगर तुम चाहते हो कि वह तुमको बोलकर सुनाए कि क्या लिखा है, तो ऐसा भी हो सकेगा। गूगल के अधिकारी ने बताया कि यह एप पहले से उपलब्ध है, लेकिन अभी तक अंग्रेजी में इसके नतीजे आते थे और इसका सबसे ज्यादा उपयोग भारतीय छात्र अपना होमवर्क पूरा करने के लिए कर रहे थे। गूगल असिस्टेंट एप पर गूगल ने फोन कॉल के जरिए मदद की सुविधा भी प्रदान की है। देश के जिन हिस्सों में इंटरनेट की कनेक्टिविटी कम है, उन क्षेत्रों के लिए गूगल ने एक नंबर जारी किया है- 000-800-9191-000। इस नंबर को डायल कर हिंदी या अंग्रेजी में गूगल असिस्टेंट का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसमें फोन कर किसी भी किस्म की सहायता मांगी जा सकती है और तुम तत्काल जवाब पा सकते हो। गूगल असिस्टेंट एप पर आवाज के जरिए मदद लेने में अंग्रेजी के बाद हिंदी दूसरी सबसे लोकप्रिय भाषा बन गई है। इस एप पर आने वाले कुछ महीनों में एक इंटरप्रेटर मोड भी उपलब्ध होगा, जो रियल टाइम ट्रांसलेटर की तरह काम करेगा। यानी दो अलग-अलग भाषाओं के लोग भी इसकी मदद से अपनी-अपनी भाषा बोलते हुए बातचीत कर सकेंगे।
एयरबैग वाला हेलमेट
सड़क पर कोई भी दुपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट एक ज़रूरी चीज़ है। आज जब सबकुछ स्मार्ट हो रहा है तो हेलमेट भला कैसे पीछे रहे? स्वीडिश ब्रांड होवडिंग ने अपना थर्ड जनरेशन साइकलिंग हेलमेट ‘होवडिंग 3’ लॉन्च किया है जो कि आम हेलमेट से बिल्कुल अलग है। यह कॉलर की तरह दिखता है, इसके अंदर एयरबैग लगा है। क्रैश या एक्सीडेंट होने की स्थिति में यह एक सेकेंड से भी कम समय खुल जाता है। यह खुलने पर सर और गर्दन के आसपास एक सुरक्षा कवच तैयार कर लेता है। कंपनी का दावा है कि दुनिया का सबसे सुरक्षित बायसाइकिल हेलमेट है। इसके कॉलर में सेंसर लगे हैं। यह सेंसर प्रति सेकंड 200 बार साइकिलिस्ट के मूवमेंट रीड करता है। क्रैश या एक्सीडेंट के समय जैसे ही कुछ अबनॉर्मल मूवमेंट का पता चलता है यह एयरबैग तुरंत खुल जाता है और गर्दन और सिर को चोट लगने से बचाता है। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की साइंटिफिक स्टडी के अनुसार, एयरबैग टेक्नोलॉजी ट्रेडिशनल बायसाइकिल हेलमेट से 8 गुना ज्यादा सुरक्षित है। इस हेलमेट में बैटरी लगी है, जो सिंगल चार्जिंग में 12 घंटे का बैकअप देती है। इसे ब्लूटूथ की मदद से स्मार्टफोन से कनेक्ट किया जा सकता है और एंड्रॉयड/आईओएस ऐप से कंट्रोल किया जा सकता है। ऐप में बैटरी नोटिफिकेशन समेत कई सारे एडिशनल फीचर्स मिलते हैं। ऐप की मदद से साइकिलिस्ट डेटा एनालिसिस किया जा सकता है कि कैसे एक्सीडेंट हुआ? कंपनी इसे और बेहतर बनाने पर काम कर रही है। इसकी खास बात यह भी है कि एक्सीडेंट होने पर हेलमेट की मदद से अन्य यूजर से संपर्क किया जा सकता है।
यह सिर्फ एक ही साइज में उपलब्ध है। यूजर इसे पीछे दिए डायल के जरिए अपने अनुसार एडजस्ट कर सकता है। यह ऑफिशियल वेबसाइट पर बिक्री के लिए उपलब्ध है। इसकी कीमत 22 हजार रुपए रखी गयी है।


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