सनी देओल, करिश्मा ने रेलवे कोर्ट के फैसले को दी चुनौती !    मेट्रो की तारीफ पर अमिताभ के खिलाफ प्रदर्शन !    तेजस में रक्षा मंत्री की पहली उड़ान, 2 मिनट खुद उड़ाया !    अयोध्या पर चुप रहें बयान बहादुर !    पीएम के प्रति ‘अपमानजनक' शब्द राजद्रोह नहीं !    अस्त्र मिसाइल के 5 सफल परीक्षण !    एनडीआरएफ में अब महिलाएं भी !    जेल में न कुर्सी मिली, न तकिया ; कम हुआ वजन !    दिल्ली में नहीं चलीं टैक्सी, ऑटो रिक्शा !    सीएम पद के लिए चेहरा पेश नहीं करेगी कांग्रेस: कैप्टन यादव !    

 हिंदी फीचर फिल्म : फेरी

Posted On August - 24 - 2019

शारा

गीता बाली के साथ स्क्रीन पर देवानंद की ट्यूनिंग ऐसी थी कि यह जोड़ी सामान्य-सी कहानी को हिट बनाने में माहिर थी। फिर ‘फेरी’ का कथानक तो कमाल का था, जहां पात्र आते-जाते हैं और सिचुएशन के अनुसार कहानी से एकाकार होते जाते हैं। इस फिल्म के संपादन का कसाव गजब का है। निर्देशन में एक छोटी-सी गलती भी नहीं, सिर्फ अंत में फिल्म की स्पीड का सहसा तेज होना खटकता जरूर है लेकिन निर्देशक के नाम के आगे दर्शक यह सोचने को विवश हो जाता है कि कहानी की डिमांड ही ऐसी रही होगी। फ्लैश बैक के पाठकों को फिल्म की कहानी बताने से पूर्व इसके निर्देशन की बागडोर संभालने वाले व्यक्ति के बारे में जानकारी देती चलूं क्योंकि उनके विवरण से ही फिल्म की महानता के बारे में पता चल सकेगा। इस फिल्म को निर्देशित किया था हेमेन गुप्ता ने और उन्होंने इसे प्रोड्यूस भी किया था। हेमेन गुप्ता ने चर्चित फिल्में बनाई हैं। ‘आनंद मंठ’ को कौन नहीं जानता—इन्हीं हेमेन गुप्ता की बनाई हुई है। फिर पाठकों ने बलराज साहनी अभिनीत काबुलीवाला फिल्म तो देखी होगी। निर्देशन हेमेन गुप्ता ने ही किया था। दरअसल, हेमेन गुप्ता 50वें दशक के उत्तरोत्तर में ऐसा चेहरा थे, जो ज़माने से काफी आगे चलते थे। फेरी भी उनकी प्रगतिशील सोच का नतीजा थी। हेमेन गुप्ता की इसी सोच की एक और मिसाल थी फिल्म ‘42’। अगर किसी ने भारत विभाजन का सांगोपांग दर्शन करना हो तो ये िफल्म देख ले। इस फिल्म ने ऐसा तहलका मचाया कि लोग इसे बार-बार देखना नहीं भूले। दरअसल, हेमेन गुप्ता आज़ादी के दीवानों की फौज के सर्वेसर्वा थे। फिल्मों में एंट्री से पूर्व वह आज़ाद हिन्द फौज के थिंक-टैंक थे और नेताजी सुभाष चंद्र बोस के पी.ए. भी रह चुके थे। जैसे ही देश आज़ाद हुआ, वह फिल्मों के निर्देशन से जुड़ गए। उन्होंने बेहतरीन फिल्में बनाईं। पहले उन्होंने फिल्मीस्तान के बैनर तले बनने वाली फिल्में निर्देशित कीं। फिर कालांतर वे खुद फिल्में बनाने लगे। इस फिल्म में जो गीत रत्ना नामक गायिका ने गाए हैं, वे हेमेन गुप्ता की पत्नी थी। सुरीली आवाज की मलिका रत्ना ने कुल छह या आठ गीत ही गाये, फिर गुमशुदगी के अंधेरों में खो गयीं। वैसे भी वटवृक्ष की छाया तले उगे पेड़ कहां पनप पाते हैं। इस फिल्म में बेबी बुल्ला के नाम से जो बाल चेहरा दिखाई देता है, वह कोई और न होकर हेमेन और रत्ना गुप्ता की बेटी अर्चना है। अर्चना वही है, जिन्होंने सत्तर के दशक में बनी फिल्म ‘बुड्ढा मिल गया’ में बतौर अभिनेत्री अभिनय किया था। इसमें एक अन्य बाल कलाकार बाबू नामक भी है। यह किरदार जयंत मुखर्जी ने अदा किया है। जयंत मुखर्जी फेरी में संगीत देने वाले हेमंत मुखर्जी के बेटे हैं, जिन्होंने बड़े होकर मौसमी चटर्जी से शादी की थी। मौसमी चटर्जी ने ‘बालिका वधू’ फिल्म से बॉलीवुड में डेब्यू किया था। चुलबुली नायिका मौसमी चटर्जी ने फिल्म ‘अनुराग’ में अंधी लड़की का अभिनय करने पर खूब वाहवाही बटोरी थी। देवानंद की ‘गाइड’ और फेरी मेरी फेवरिट फिल्मों में से है। कारण अनयूजुअल स्टोरी। फेरी के मायने किश्ती होता है। देशकाल पुरानी बम्बई का समुद्री तट लगता है। तमाम फिल्म इसी तट पर फिल्माई गयी लगती है। फैमिली/ड्रामा जोनर की यह फिल्म 1954 में रिलीज हुई थी। देवानंद विकास नामक व्यक्ति बने हैं, जो दुर्भाग्य से युवावस्था में विधुर हो गये। विकास समुद्र के किनारे बने एक आलीशान महल में रहता है। उसका राजू नामक बेटा भी है। चूंकि विकास अपने काम के सिलसिले में सारा दिन घर से बाहर रहता है, इसलिए उसके नन्हें बेटे राजू की देखभाल उसकी चाची करती है, जो उससे दुर्व्यवहार करती है। कभी-कभार वह उसे बांध भी देती है। मगर राजू है कि वह अपने दोस्तों मीनू की मदद से सारे बंधन तोड़ समुद्री तट पर उस किश्ती को देखने जाता है, जो शहर से सवारियां भरकर लाती है। चूंकि उसके पिता ने उसे उसकी मां की मृत्यु के बारे में नहीं बताया है, इसलिए उसे लगता है एक दिन इसी किश्ती से उसकी मां लौट आयेगी, जो किसी काम से शहर गई है। वह रोज किश्ती के चालक से अपनी मां के बारे में पूछता है और रोज नकारात्मक उत्तर मिलने पर मायूस हो जाता है। मां से मिलने की खातिर राजू अपने दोस्त को साथ लिये उसी फेरी में शहर की ओर चला जाता है, जहां पब्लिक ट्रांसपोर्ट की मदद से वह आलीशन बंगले के आगे रुक जाता है लेकिन रात घिर आती है, मगर उसे मां मिलने नहीं आती। उधर, बेटे की गुमशुदगी की रिपोर्ट थाने में देने के कारण विकास राजू को ढूंढ़ने में कामयाब हो जाता है और घर ले आता है। कहानी में नया मोड़ तब आता है जब समुद्र के किनारे एक रात जूही बनी गीता बाली बेहोश पायी जाती है। देवानंद का घर निकट होने के कारण गांव के लोग उसे वहीं ले आते हैं। गीता बाली को घर में आया देखकर राजू उसे ही मां समझने लगता है। शाम को जब विकास घर आता है तो गीता बाली उसे बताती है कि वह एक वेश्या की बेटी है, जिसे उसकी मां उसे उसी धंधे में धकेलना चाहती है, जिससे बचने के लिए वह एक दिन उसी फेरी में भाग आती है। देवानंद उसे अपने घर में रहने की इजाज़त दे देता है। मगर गीता बाली के अतीत के लिए नवाब नामक व्यक्ति उन दोनों को ब्लैकमेल करने लगता है तो देवानंद का कुत्ता उसे काट खाता है और वहां से भागने के लिए मजबूर कर देता है। बाद में राजू की खातिर देवानंद गीता बाली को अपना लेता है। इस कहानी में एक और सस्पेंस है, इसके लिए पाठक मूवी देखें तो पता चलेगा।


Comments Off on  हिंदी फीचर फिल्म : फेरी
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading...
Both comments and pings are currently closed.

Comments are closed.

Powered by : Mediology Software Pvt Ltd.