सनी देओल, करिश्मा ने रेलवे कोर्ट के फैसले को दी चुनौती !    मेट्रो की तारीफ पर अमिताभ के खिलाफ प्रदर्शन !    तेजस में रक्षा मंत्री की पहली उड़ान, 2 मिनट खुद उड़ाया !    अयोध्या पर चुप रहें बयान बहादुर !    पीएम के प्रति ‘अपमानजनक' शब्द राजद्रोह नहीं !    अस्त्र मिसाइल के 5 सफल परीक्षण !    एनडीआरएफ में अब महिलाएं भी !    जेल में न कुर्सी मिली, न तकिया ; कम हुआ वजन !    दिल्ली में नहीं चलीं टैक्सी, ऑटो रिक्शा !    सीएम पद के लिए चेहरा पेश नहीं करेगी कांग्रेस: कैप्टन यादव !    

हिंदी फीचर फिल्म : फर्ज़

Posted On August - 17 - 2019

शारा

वर्ष 1967 में रिलीज हुई ‘फर्ज’ फिल्म जेम्स बांड की फिल्मों से प्रेरित थी। सूट-बूट यहां तक कि उछलकूद भी उनकी फिल्मों से ही प्रोत्साहित थीं। कॉलेज के युवा वर्ग के उनकी मूवी के प्रति क्रेज़ ने जितेंद्र को हीरो बना दिया। उछलकूद के साथ इस जम्पिंग-जैक के तीखी नोक वाले सफेद जूते भी कॉलेज के छात्रों में खूब लोकप्रिय थे। फिल्म में जितेंद्र सी.आई.डी. के 116 नंबर एजेंट बने हैं। यह 116 ही जितेंद्र का पर्याय बन गया। लोग भूल गए कि फिल्म में उनका असली नाम गोपाल भी था। फर्ज़ राष्ट्रभक्ति से प्रेरित फिल्म थी।
नगाइच ने इस फिल्म को पहले गुडाचरी 116 के नाम से तेलुगू में बनाया था, फिर ‘फर्ज’ के निर्देशन से उन्होंने हिन्दी फिल्मों में पैर पसारे। उसके बाद उन्होंने ‘फर्ज’ फिल्म के दो सीक्वल भी बनाये। पहला धर्मेंद्र को लेकर ‘कीमत’ तथा दूसरा सीक्वल ‘रक्षा’ इसी हीरो को लेकर बनाया। बात ही कुछ ऐसी थी कि ‘फर्ज’ को मिले बॉक्स ऑफिस के रिस्पांस को देखकर नगाइच सीक्वल बनाने के मोह से बच नहीं सके। फिल्म की कामयाबी के पीछे एक और बड़ी वजह इसका संगीत भी था। हीरो-हीरोइन के चेहरों में ताजगी भी सिनेमा हॉल में भीड़ जुटाने में मददगार साबित हुई। गीत हल्के-फुल्के थे मगर काफी मकबूल हुए। एक गीत तो मानो जन्मदिन का थीम सांग बनकर मशहूर हुआ। ‘हैप्पी बर्थडे टू यू’ आज भी हर किसी के जन्मदिवस पर खूब बजता है। यह विशुद्ध मनोरंजक फिल्म थी।
वैसे भी जितेंद्र ऐसी ही फिल्मों में अभिनय करते हैं, ‘परिचय’ तथा ‘गीत गाया पत्थरों ने’ सरीखी अपवाद फिल्मों को छोड़ दें तो खासकर निर्देशक अगर दक्षिण भारतीय फिल्मों से हों तो।
सिर से लेकर पैरों तक एक रंग के मैच मिलाकर परिधान और एक्सेसरी पहनने वाले दक्षिण भारतीय निर्देशकों को तब खूब पसंद आते थे। उनकी शादी रमेश सिप्पी की बहन शोभा सिप्पी से हुई है। वही ‘शोले’ वाले रमेश सिप्पी। शोभा से उनका बचपन का इश्क था, लेकिन हेमामालिनी के रूप-लावण्य को देखकर वे फिसल गए थे।
हेमामालिनी के हिस्से में ज्यादा हिट पिक्चर्स भी थीं और वह पायेदार फिल्में भी करती थीं, नृत्यकला में प्रवीणता सो अलग। ऐसी ड्रीम गर्ल से भला कौन शादी नहीं करना चाहेगा? जितेंद्र हेमा के साथ लगन मंडप में बैठने वाले ही थे कि अचानक धर्मेंद्र ने आकर सारी कहानी बिगाड़ दी और दोनों के रास्ते अलग हो गए। तब हेमा का धर्मेंद्र से ताज़ा-ताज़ा रोमांस शुरू हुआ था, लेकिन विवाहित होने के कारण धर्मेंद्र को कोई राह नहीं सूझ रही थी, इसलिए अपना प्यार बचाने के लिए पंजाबी जट को इससे बढ़िया कोई रास्ता नहीं सूझा।
जितेंद्र और शोभा के दो बच्चे हैं—बेटा तुषार कपूर तो फिल्मों में कोई खास नहीं चला लेकिन बेटी एकता कपूर ने अपने सीरियलों के माध्यम से टीवी धारावाहिकों की रंगत ही बदल दी। पहली बार टीवी दिनचर्या में फुर्सतों के दौरान विशुद्ध मनोरंजन परोसता आया। परिवार की छोटी-छोटी नोक-झोंक सीरियलों का सॉलिड टॉपिक बनती दिखीं। इसलिए तो एकता को सोप ऑपेरा क्वीन कहा जाता है। बहरहाल, फर्ज़ की कहानी में आज की दृष्टि से नया कुछ भी नहीं है लेकिन तब इन खुफिया विषयों की चाशनी में पगी फिल्मों पर दर्शक टूट पड़ते थे।
फिल्म में सी.आई.डी. के खुफिया जासूस एजेंट 303 का कत्ल हो जाता है। विभागीय उच्चाधिकारियों को शक है कि इस हत्या से माफिया डॉन के तार जुड़े हैं, जो स्थिति का फायदा उठाकर देश में अस्थिरता फैलाना चाहते हैं। हत्या किसने की तथा उनका नेटवर्क कहां तक फैला हुआ है, इस बात का पता लगाने के लिए एजेंट 116 की ड्यूटी लगाई गयी है। गोपाल बना जितेंद्र मृतक की बहन कमला को जब छानबीन के लिए संपर्क करता है तो हत्यारों ने पहले ही कमला को पट्टी पढ़ाई होती है कि अमुक व्यक्ति सी.आई.डी. एजेंट के भेष में हत्यारा है, इसलिए कमला कुछ भी बताने से इनकार कर देती है। इस बीच दामोदर नामक माफिया डॉन कमला को गोपाल नामक व्यक्ति से सचेत होने को कहता है। दामोदर वही है, जिसकी बेटी सुनीता (बबीता) से जितेंद्र प्यार करता है। जब सुनीता अपने डैडी से जितेंद्र का परिचय करवाती है तो जितेंद्र को शक हो जाता है। वह केस की छानबीन तेज करता है तो दामोदर उसे मरवाने के लिए अपने गुर्गे भेज देता है। जितेंद्र किसी तरह बचकर मामले की तह तक पहुंच ही जाता है। पूरी कहानी में षड्यंत्रों के अलावा जितेंद्र के बबीता के साथ लव-सीन काफी अच्छे हैं। पाठक मनोरंजन के लिए यह फिल्म देख सकते हैं।

निर्माण टीम
प्रोड्यूसर : सुंदर लाल नाहटा, पी.डी. राव
निर्देशक : रविकांत नगाइच
मूलकथा : विश्वमित्र आदिल
पटकथा : अरुद्रा
संवाद : वी.डी. पुराणिक
सिनेमैटोग्राफी : रविकांत नगाइच
गीतकार : आनंद बख्शी
संगीतकार : लक्ष्मीकांत, प्यारेलाल
सितारे : जितेंद्र, बबीता, आगा, मुकरी, मोहन चोटी, अरुणा ईरानी आदि

गीत
आजा आजा मेरे पास : आशा भौसले
देखो देखो जी सोचो जी : लता मंगेशकर
बार बार दिन ये आये : मोहम्मद रफी
हम तो तेरे आाशिक हैं : लता मंगेशकर, मुकेश
मस्त बहारों का मैं आशिक : मोहम्मद रफी
तुमसे ओ हसीना : मोहम्मद रफी, सुमन कल्याणपुर


Comments Off on हिंदी फीचर फिल्म : फर्ज़
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading...
Both comments and pings are currently closed.

Comments are closed.

Powered by : Mediology Software Pvt Ltd.