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सोशल मीडिया पर छलकती देशभक्ति

Posted On August - 10 - 2019

दीप्ति अंगरीश

स्वाधीनता ने हमें बुलंद, बेबाक व बेखौफ बना दिया है। इसके पीछे की कहानियां, कुर्बानियां अब सब धुंधली पड़ती जा रही हैं। गांधी, नेहरू, भगत सिंह और अनेक क्रांतिकारियों ने देश के लिये क्या-क्या किया, बहुत से युवा नहीं जानते। लेकिन फिर भी आज के डिज़िटल दौर के भारतवासियों को देश से अथाह प्रेम है। कोई प्रोफाइल पिक्चर बदलकर स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं देने में लगा है तो कोई देश को बुराई से आज़ादी दिलाने के लिए अपना योगदान देने का संदेश देता दिख रहा है।
डीपी में स्वाधीनता
डिज़िटल युग में तमाम चीज़ें भी डिज़िटल हो गई हैं। देश के लिए किसने और कैसे-कैसे बलिदान दिए, ये दिन क्यों खास है? आज की डिज़िटल पीढ़ी के पास ऐसे सवालों का कोई जवाब नहीं है। ये दिन खास है और सामने वाले पर ज़माना है इंप्रेशन, तो बस डिज़िटल खिड़कियों में ओढ़ लेते हैं तिरंगा। चाहे वह व्हाट्सएप, फेसबुक, टि्वटर या इंस्टाग्राम हो या कोई भी डिज़िटल खिड़की। यानी स्वाधीनता दिवस पर ज्यादा राष्ट्र-प्रेम दिखाने का बेहतरीन माध्यम। सोशल नेटवर्किंग साइट मूषक के संस्थापक अरविंद गौड़ बताते हैं कि मूषक ने स्वतंत्रता दिवस के लिए खास फीचर पेश किए हैं। हम जब अपनी पूरी बातचीत हिन्दी में करते हैं, तो डीपी का पहला अक्षर भी तो हिन्दी में आना चाहिए। इसके लिए कोई भी हमारे फीचर्स का उपयोग कर सकता है। मूषक पर जाएं मूष करें और तिरंगे से लबरेज़ अपनी डीपी बना लें।
शेयरिंग भी राष्ट्रभक्ति वाली
15 अगस्त से लगभग एक सप्ताह पहले तक भारत वर्ष से राष्ट्रप्रेम की खुमारी दिखने लगती है। प्रोफाइल फोटो तक बात नहीं बनती। यहां देशभक्ति का भाव इस कदर दिलो-दिमाग पर छा जाता है कि हर डिज़िटल मंच पर शेयरिंग, फॉरवर्ड, टैग, पोस्टिंग व अपलोडिंग राष्ट्रभक्ति तक ही सिमट जाती है।
कोई राष्ट्र भक्ति के गाने, राष्ट्रीय प्रतीकों की शानदार तस्वीरें, सैनिकों के प्रति सम्मान का भाव और इसी से मिलती-जुलती बातें शेयर कर रहा है तो कोई ट्राई कलर का भारतीय परिधान पहनकर डिज़िटल क्रांतिकारी बन रहा है। कमाल की बात है कि यह वसंती चोला 15 अगस्त की रात को अलमारी में चला जाता है।
गूगल देता डूडल बनाकर सलामी
आज के युवाओं के जीवन में गूगल सर्च इंजन अहम हो गया है। सुख में दुख में वे गूगल का सहारा लेते हैं। गूगल में काम करने वाले दिलीप खांडेकर कहते हैं कि गूगल ने भारत पर बेहद फोकस किया हुआ है। इसलिए 15 अगस्त को हर बार नया डूडल बनता है। उस दिन भारत सहित दुनिया के कई देशों में 15 अगस्त और भारत का स्वतंत्रता दिवस कीबोर्ड पर काफी सर्च किया जाता है। इसके लिए हम खास तरीके से ऑप्टिमाइजेशन पर ध्यान रखते हैं।
वाहवाही बटोरने का माध्यम
सोशल साइट पर लोग स्वतंत्रता के समय से लेकर देश की आधुनिक तस्वीरें साझा कर विकास की बयार पेश करते दिखते हैं। देश के लालकिले, इंडिया गेट, कनाट प्लेस और कुतुबमीनार की पुरानी और नई तस्वीरें साझा कर लिखते हैं, मेरा देश बदल रहा है। सामाजिक बुराई से आज़ादी का संकल्प स्वतंत्रता दिवस पर देश को सामाजिक बुराई से आज़ादी दिलाने का संकल्प और संदेश का दौर जारी है। खास दिन पर खास कार्य करने होते हैं। आखिर तभी तो वाहवाही होगी। 15 अगस्त पर प्रधानमंत्री के ध्वज फहराने की कवरेज तो बहुत होती है, लेकिन अन्य भारतवासियों का क्या। इस मौके पर अपनी पहचान गढ़ने में सोशल मीडिया से अच्छा कोई माध्यम नहीं। अपनी सोशल मीडिया कवरेज खुद ही करनी होती है।
आखिर हर किसी का अपना स्वाधीनता दिवस है और पूरी आज़ादी से लोग इस दिन का उपयोग करते है। जैसे गली-कूचे में तिरंगा फहराया, छोटे नेताओं ने अच्छाई का लिबास पहना, एनजीओ ने पौधरोपण कराया, कुछ छुटभैये नेताओं ने स्कूल व कॉलेजों में कुछ सांस्कृतिक कार्यक्रम करवाये, सफाई अभियान चलाया। राष्ट्रीय पर्व के आयोजन की तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर करना नहीं भूलते।
इस तरह सोशल मीडिया परस्पर गतिविधियों की जानकारी देने वाला सबसे बड़ा और प्रमुख मंच बन जाता है। जो खबरें अखबारों और टीवी चैनलों में जगह नहीं पा पातीं, वे सोशल मीडिया पर खूब लोकप्रिय होती हैं।
अभी भी आज़ादी की दरकार
सोशल मीडिया में 15 अगस्त का राग अलापने वाले भूल गए हैं कि हम आज़ाद तो हो गए हैं भू-भाग पर, मगर, अभी भी कई तरह की आज़ादी की है दरकार। हम भारतवासी एक दूसरी आज़ादी की जंग लड़ें। यह जंग है सांप्रदायिक विचारों से, जाति-पाति से, गरीबी से, बेकारी से, अश्लीलता से, नारी के प्रति संकीर्ण विचारों से, प्लास्टिक से, विदेशी भाषा के प्रभुत्व से भी, महंगाई से, महंगी चिकित्सा प्रणाली से, टैक्स चोरों से, साइबर चोरों से, महिला सुरक्षा से।
सोशल मीडिया बन गया फैशन
सबसे ज्यादा राष्ट्र-प्रेम कहां नज़र आता है? सीधा-सा जवाब है सभी जगह, लेकिन सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा। यहां राष्ट्रप्रेम का प्रदर्शन करना आसान भी है और फैशन भी। सोशल मीडिया के सभी प्रमुख प्लेटफॉर्म पर तिरंगी डीपी नज़र आती है। स्वाधीनता दिवस पर लोग राष्ट्र भक्ति के गाने, राष्ट्रीय प्रतीकों की शानदार तस्वीरें, सैनिकों के प्रति सम्मान का भाव और इसी से मिलती-जुलती बातें शेयर करना पसंद करते हैं। स्वाधीनता दिवस पर सेल के बहाने बिक्री बढ़ाने के नए-नए टोटके सोशल मीडिया पर भी नज़र आ जाते हैं। लोग सोशल मीडिया पर अपने ये विचार भी शेयर करते हैं कि उन्हें अभी भी आज़ादी की ज़रूरत है। हल्के-फुल्के लफ्जों में कहें तो लाखों लोग ऐसे भी हैं, जो सोशल मीडिया पर टैग करने वालों से आज़ादी चाहते हैं। कुल मिलाकर स्वतंत्रता दिवस का माहौल सोशल मीडिया पर भी है। कुछ लोग इसे गंभीरता से लेते हैं और कुछ उतने गंभीर नहीं हैं।
आज़ादी का दिन, छुट्टी का दिन
आज़ादी को 71 साल हो गए… बदलाव की बयार में आज़ादी भी डिज़िटल हो गयी है, वर्चुअली ज्यादा नज़र आती है और असल जिंदगी में कम। शायद इसलिए भी क्योंकि असल ज़िंदगी में हमारे पास उतना वक्त और धैर्य नहीं है अपने देश के गौरव के प्रतीकों के बारे में जानने का।
लेकिन फैशन की दृष्टि से देखें तो अब आज़ादी का जश्न मनाना भी ट्रेंड में है… फेसबुक, ट्विटर पर अच्छे से अच्छे स्टेटस और फोटो डालने की होड़ नज़र आती दिखती है। ऐसा इसलिए, जिससे कम से एक दिन के लिए ही सही, लेकिन लोग हमारे बारे में जान सकें कि हां हम भी देशभक्त हैं, वर्चुअल ही सही। आज़ादी का दिन अब छुट्टी के दिन में परिवर्तित होता जा रहा है।


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