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सार्वजनिक स्थल पर शिष्टाचार

Posted On August - 18 - 2019

मोनिका अग्रवाल

प्राचीन समय से बुजुर्ग हमें विनम्र और शालीन व्यवहार की शिक्षा देते आ रहे हैं। शिष्टाचारपूर्ण किया गया व्यवहार ही समाज में मान-मर्यादा, सद‍्भावना, सहानुभूति व सहयोग दिलाता है। वैसे तो शिष्टाचार का क्षेत्र बहुत व्यापक है क्योंकि जीवन में बहुत से क्षेत्रों में रोज नये व्यक्तियों से संपर्क होता है। ऐसे में आपका व्यवहार ही आईना है। सभाओं और मंदिरों में शिष्टाचार के नियमों का पालन कैसे करें आइए जानते हैं…
0 यदि आप किसी धार्मिक स्थल, सभा या मंदिर में जा रहे हैं तो ध्यान रखें कि ऐसी जगहों पर पानी पीकर कुल्ला करना या थूकना सही नहीं। ऐसे स्थानों पर अलग से हाथ धोने और कुल्ला करने का प्रबंध होता है।
0 इन धार्मिक स्थलों पर भी शौचालय का अलग से प्रबंध होता है। इसलिए सब लोगों के बीच में ही हाथ धोना या शौच के हाथ धोना अशिष्टाचार है।
0 मान लीजिए इन सभाओं या तीर्थ स्थान पर किसी वजह से आपको हाथ धोने भी पड़ जाएं तो ध्यान रखें कि साबुन न लगायें क्योंकि साबुन गंदगी ही फैलाएगा। ऐसे स्थानों पर किसी प्रकार की गंदगी नहीं करनी चाहिए। यदि आस-पास कोई नदी है तो उस के किनारे से पर्याप्त दूरी पर मल-मूत्र त्यागना उचित है।
0 ऐसे धार्मिक स्थलों पर पहुंचकर पैर फैलाकर बैठ जाना या एक के ऊपर एक पैर चढ़ाकर बैठना भी गलत है। यह शिष्टाचार नहीं है। कुछ लोगों की आदत होती है कि वह ऐसे स्थलों पर झपकी लेने के बहाने सो जाते हैं। यह अशिष्टता है। ऐसे स्थानों पर किसी भी प्रकार के शोरगुल करने से भी बचना चाहिए ।
0 अक्सर देखने में आता है, जहां कीर्तन या कथा-वाचन हो रहा होता है, महिलाएं या पुरुष अपने अपने मित्रों से बातचीत में मशगूल हो जाते हैं। ध्यान रखें यह सभाएं आपकी बातचीत करने का सभागार नहीं है। न ही वहां किसी भी तरह की कोई पुस्तक या अखबार पढ़ना चाहिए। उस पवित्र जगह के सम्मान की खातिर या कथावाचक के सम्मान की खातिर शांत रहें और शांति के साथ प्रवचन सुनें।
0 सार्वजनिक स्थलों पर खांसना, छींकना या जम्हाई लेना उचित नहीं। यदि आप ऐसी स्थिति में है कि आप खांसना, छींकना या जम्हाई लेना टाल नहीं सकते तो मुंह पर हाथ रख कर या रुमाल रखकर छींके।
0 काफी लोगों को बढ़ती उम्र के साथ गैस बननी शुरू हो जाती है, जिसकी वजह से वह बैठे-बैठे अपान वायु छोड़ते रहते हैं। यदि ऐसी किसी सभा के समय आपको वायु छोड़ना ही पड़े तो वहां से उठकर सभा से अलग चले जाना चाहिए। यदि किसी पास वाले व्यक्ति ने ऐसा कोई व्यवहार किया है तो उसका मज़ाक बनाना उचित नहीं। न ही उस पर हंसें।
0 धार्मिक स्थलों पर पंक्तिबद्ध होकर कार्य करना शिष्टाचार है। कुछ लोगों आदत होती है कि वे भीड़ में घुसकर पंक्ति के नियमों को तोड़ते हैं। पंक्तिबद्ध रहें। बीच में बार-बार उठकर मोबाइल पर बात न करें।
0 कथा या कीर्तन के दौरान झपकी लेना या सोना उचित नहीं। न ही आप ऐसा व्यवहार करने वाले किसी व्यक्ति का मजाक बनाएं। यदि आपको नींद आ रही हो तो साथ वाले को ‘माफ करिएगा’ कहकर खड़े हो जाएं और पीछे जाकर बैठ जाएं।
0 अक्सर ऐसी सभा-स्थलों में लोग सवाल बहुत करते हैं। यदि आपको कथावाचक से कुछ पूछना भी है तो पहले प्रबंधक की सलाह लें। प्रबंधक के हां कहने पर ही आप कथावाचक से किसी प्रकार का सवाल करें। न ही किसी बात पर क्रोधित हों और न ही बहुत ज्यादा उत्साहित।
0 धार्मिक स्थलों पर या ऐसी सभा स्थलों पर अक्सर कुछ लोग अपने साथी के लिए सीट रोकने के चक्कर में अपना चश्मा, टोपी, रूमाल या और कोई अन्य वस्तु सीट पर रख देते हैं। हालांकि, यह गलत है। यदि आप ऐसी किसी स्थिति का सामना कर रहे हैं तो बिना परमिशन लिए आप उनकी वस्तु को सीट से न हटाएं।
0 प्रत्येक स्थान के अपने-अपने नियम होते हैं, जो कि वहां के प्रबंधकों के द्वारा बनाए गए होते हैं। ऐसे स्थलों के प्रबंधक अच्छी प्रकार जानते हैं कि वहां एक बार की सभा में कितने लोगों की उपस्थिति होगी। इसलिए शिष्टाचार के नियमों का पालन करें और प्रबंधक के द्वारा बनाए गए नियम और आदेशों की अवहेलना न करें।
0 किसी भी सभा या सार्वजनिक स्थान पर जाने से पहले सही तरीके से कुल्ला करें। कोई भी तेज महक वाली वस्तु खाकर न जाएं, जिससे की आपके साथ वाले को आपसे बात करते हुए परेशानी हो।
0 धार्मिक स्थल, सार्वजनिक स्थल या किसी भी ऐसी सभा में अपने जूते-चप्पल बीचों-बीच न उतारें। उन्हें एक तरफ खोलकर रखें।


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