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विवादित स्थल पर मंदिर था, मान चुका है हाईकोर्ट

Posted On August - 14 - 2019

नयी दिल्ली, 13 अगस्त (एजेंसी)
अयोध्या मामले पर पांचवें दिन की सुनवाई के दौरान मंगलवार को इस मुद्दे पर बहस शुरू हुई कि क्या इस विवादित स्थल पर पहले कोई मंदिर था। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली 5 सदस्यीय संविधान पीठ के समक्ष रामलला विराजमान की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सीएस वैद्यनाथन ने पक्ष रखा। वैद्यनाथन ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के 3 जजों की पीठ ने अपने फैसले में कहा है कि विवादित स्थल पर मंदिर था। हाईकोर्ट के जस्टिस एसयू खान ने अपने फैसले में कहा था कि मंदिर के अवशेषों पर मस्जिद का निर्माण किया गया।
संविधान पीठ अयोध्या में विवादित 2.77 एकड़ भूमि 3 पक्षकारों- सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला के बीच बराबर बांटने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के सितंबर 2010 के फैसले के खिलाफ दायर 14 अपीलों पर 6 अगस्त से नियमित सुनवाई कर रही है। हालांकि, मुस्लिम पक्षकार एम. सिद्दीक और आॅल इंडिया सुन्नी वक्फ बोर्ड ने सप्ताह के सभी 5 कार्य दिवसों पर इसकी सुनवाई किये जाने पर आपत्ति की थी, लेकिन संविधान पीठ ने इसे अस्वीकार कर दिया। संविधान पीठ ने सिद्दीक की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन को यह भरोसा जरूर दिलाया कि उन्हें बहस की तैयारी के लिए सप्ताह के बीच में विश्राम देने पर विचार किया जायेगा। संविधान पीठ के अन्य सदस्यों में जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस धनन्जय वाई चन्द्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस अब्दुल नजीर शामिल हैं।


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