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लौट-लौट आती थप्पड़ की अनुगूंज

Posted On August - 14 - 2019

अरविंद तिवारी

थप्पड़ जो होता है, उसे कनपटी पर ही मारा जा सकता है, जबकि घूंसा, लात आदि जहां चाहें वहां मार सकते हैं। थप्पड़ के लिए कनपटी या गाल चाहिए ही चाहिए। ऐसा नहीं है कि आप थप्पड़ दीवार पर मारें और फिर आग्रह करें कि उसे थप्पड़ मान लिया जाए। माना दीवार पर थप्पड़ मारने में आपकी हथेली घायल हो गई पर केवल इसी आधार पर थप्पड़ मारना प्रमाणित नहीं हो सकता।
कल जब दही-बड़े की लघुता को इग्नोर कर देश ने कुछ ‘बहुत बड़ा’ कर दिया तो पाक के टीवी चैनल चीखने लगे कि इंडिया ने अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप की गाल पर ज़ोरदार थप्पड़ जड़ा है! ये पाक टीवी चैनल यह भी बता रहे थे कि इस थप्पड़ से ट्रंप साहब के गाल पर खून छलछला आया है गो कि उनके गाल पहले से ही पर्याप्त रूप से लाल थे! शायद भारत और अमेरिका के बीच की दूरी का अनुमान पाक चैनल नहीं लगा पाए।
भारत इतनी दूर से थप्पड़ नहीं मार सकता। हां पाक के गाल पर मार सकता है क्योंकि पाक उसका पड़ोसी है। थप्पड़ मारना कोई मिसाइल छोड़ना नहीं है कि इधर दिल्ली से छोड़ दी और उधर व्हाइट हाउस में बैठे ट्रंप साहब के गाल पर जा लगी। आपका थप्पड़ मारना तभी प्रमाणित होगा जब आपका हाथ आपके शरीर से जुड़ा हो।
अगर यह मान भी लें कि भारत ने ट्रंप साहब को थप्पड़ मारा भी है तो यह इसलिए हुआ है क्योंकि भारत अपना हाथ अपने शरीर से जोड़े रखना चाहता है! इधर हमारे देश में बहस चल निकली है कि हमने कल जो थप्पड़ मारा है वह किस-किस को लगा। जिस तरह पाक अपनी कनपटी सहला रहा है, उससे जाहिर है कि उसको लगा है। इधर कुछ लोगों का मानना है कि यह थप्पड़ भारत की सियासत को भी लगा है। सवाल है किस-किस दल की कनपटी पर थप्पड़ लगा है? कुछ दल मौका ताड़कर अपनी कनपटी बचा ले गए। बचे हुए दलों को उनके हिस्से का थप्पड़ भी झेलना पड़ा। उनकी कनपटी लगातार पिरा रही है और यह पीर उन्हें अगले चुनाव तक झेलनी है।
इधर देश में थप्पड़ वाला जश्न शुरू हो गया। हमारे आगरा क्षेत्र में पेठे वाले अगला स्टोर डल झील के किनारे खोलने की प्लानिंग में जुट गए हैं। हमारे जिले फिरोजाबाद के चूड़ी व्यवसायी अपना गोदाम श्रीनगर में बनाने जा रहे हैं। वे फेसबुकिए जो अपने प्लॉट चांद पर बुक करवा चुके थे, बुरी तरह हलकान हैं कहीं करवा चौथ पर पत्नी डल झील में शिकारा खरीदने की जिद न कर बैठे। पाकिस्तान फिर यूएनओ की धमकी दे रहा है। यूएनओ भी आजिज आ गया है उससे। कभी रोटी मांगने चला आता है तो कभी कर्ज मांगने। पाकिस्तान उस अवांछित साले की तरह है जो पत्नी के साथ ही यूएनओ के घर में डेरा डाल कर रहने लगा है।


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