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मामला संवेदनशील, समय देना चाहिए

Posted On August - 14 - 2019

जम्मू में मंगलवार को चौकस सुरक्षाकर्मी। – प्रेट्र

नयी दिल्ली, 13 अगस्त (एजेंसी)
जम्मू-कश्मीर में संविधान के अनुच्छेद 370 के ज्यादातर प्रावधानों को रद्द करने के बाद राज्य में लगाये गये सभी प्रतिबंधों को तत्काल हटाने का केंद्र और राज्य सरकार को निर्देश देने से मंगलवार को इनकार करते हुए सुप्रीमकोर्ट ने कहा कि वहां की स्थिति ‘बहुत ही संवेदनशील’ है। मामले में न्यायालय ने कहा कि हालात सामान्य करने के लिये सरकार को समुचित समय दिया जाना चाहिए और उसे भी यह सुनिश्चित करना होगा कि राज्य में किसी की जान न जाये।
इसके साथ ही न्यायालय ने इस मामले में दायर याचिका दो सप्ताह बाद सूचीबद्ध करने का आदेश दे दिया। जस्टिस अरुण मिश्रा, जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस अजय रस्तोगी की खंडपीठ कांग्रेस कार्यकर्ता तहसीन पूनावाला की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस याचिका में अनुच्छेद 370 के प्रावधान रद्द करने के बाद जम्मू-कश्मीर में पाबंदियां लगाने और कठोर उपाय करने के केन्द्र के निर्णय को चुनौती दी गयी है।
केन्द्र की ओर से अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने पीठ से कहा कि इस क्षेत्र की स्थिति की रोजाना समीक्षा की जा रही है और अलग-अलग जिलाधिकारियों से रिपोर्ट प्राप्त की जा रही है और इसी के अनुसार ढील दी जा रही है।
अटार्नी जनरल ने कहा, ‘हमें यह सुनिश्चित करना है कि जम्मू-कश्मीर में कानून व्यवस्था बनी रहे।’ उन्होंने जुलाई, 2016 में एक मुठभेड़ में आतंकी बुरहान वानी के मारे जाने की घटना के बाद हुए आंदोलन का हवाला दिया और कहा कि उस समय हालात सामान्य करने में करीब तीन महीने लग गये थे। वेणुगोपाल ने कहा कि 1990 से अब तक आतंकवादी 44,000 लोगों की हत्या कर चुके हैं और सीमा पार बैठे लोग उन्हें निर्देश और हिदायतें दे रहे हैं।
अटॉर्नी जनरल ने कहा कि मौजूदा हालात में जम्मू-कश्मीर में सामान्य स्थिति बहाल करने में कुछ दिन लगेंगे। वेणुगोपाल ने पीठ को बताया कि जम्मू-कश्मीर में पिछले सोमवार से प्रतिबंध लगाये जाने के बाद से एक भी मौत नहीं हुई है। अटार्नी जनरल इस याचिका पर सुनवाई के दौरान पीठ के सवालों का जवाब दे रहे थे। पीठ राज्य में स्थिति सामान्य करने और बुनियादी सेवायें बहाल करने के बारे में प्राधिकारियों द्वारा उठाए जा रहे कदमों के बारे में जानना चाहती थी।
आदेश देने से पहले कई पहलू देखने होंगे
सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि कोई भी आदेश देने से पहले उसे इसके विभिन्न पहलुओं पर गौर करना होगा। पीठ ने याचिकाकर्ता की वकील वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी से कहा, ‘आप हमें स्पष्ट दृष्टांत बतायें और हम उन्हें राहत उपलब्ध कराने का निर्देश देंगे।’ संचार व्यवस्था ठप किए जाने की दलील पर पीठ ने कहा, ‘रातों-रात कुछ भी नहीं हो सकता। कुछ गंभीर मुद्दे हैं। हालात सामान्य होंगे और हम उम्मीद करते हैं कि ऐसा समय के साथ होगा। इस समय महत्वपूर्ण यह सुनिश्चित करना है कि किसी की जान नहीं जाये।’
एलओसी पर तैनाती बढ़ना सामान्य : रावत
नयी दिल्ली (एजेंसी) : सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पास पाकिस्तान द्वारा अतिरिक्त सैन्य बल तैनात करने की खबरों को तवज्जो नहीं देते हुए कहा है कि यह सामान्य बात है। मंगलवार को एक कार्यक्रम के इतर उन्होंने कहा कि किसी भी चुनौती से निपटने को सेना तैयार है। क्या एलओसी के पास युद्ध की स्थिति बनने वाली है? पूछने पर सेना प्रमुख ने कहा, ‘अगर पाकिस्तान एलओसी पर गतिविधि तेज करता है तो यह उसका चयन है।’ खबरें हैं कि पाकिस्तानी सेना एलओसी पर बड़ी तोपों की तैनाती कर रही है।


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