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भारत, चीन एक-दूसरे की ‘मुख्य चिंताओं’ का सम्मान करें : जयशंकर

Posted On August - 15 - 2019

बीजिंग, 14 अगस्त (एजेंसी)

नयी दिल्ली में बुधवार को एक कार्यक्रम में विदेश मंत्री एस. जयशंकर। – मानस रंजन भुई

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा है कि भारत और चीन को आपसी तालमेल मजबूत करने वाले क्षेत्रों का पता लगाने के साथ-साथ एक-दूसरे की चिंताओं का सम्मान करना चाहिए और मतभेदों को दूर करना चाहिए। उन्होंने इस बात का भी जिक्र किया कि एशिया की इन दोनों शक्तियों के बीच संबंध विशाल हो गए हैं कि इसने वैश्विक आयाम हासिल कर लिए हैं।
जयशंकर ने सोमवार को बीजिंग की अपनी तीन दिवसीय यात्रा संपन्न कर ली। उन्होंने भारत-चीन संबंधों के सभी पहलुओं पर अपने समकक्ष वांग यी के साथ व्यापक वार्ता की। जयशंकर ने रविवार को यहां सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि दो सबसे बड़े विकासशील देशों और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के रूप में भारत और चीन के बीच सहयोग दुनिया के लिए काफी अहमियत रखता है। चीन और भारत विश्व की ऐसी दो उभरती अर्थव्यवस्थाएं हैं जिनकी आबादी एक अरब से अधिक है। शिन्हुआ ने जयशंकर को उद्धृत करते हुए कहा, ‘हमारे संबंध इतने विशाल हैं कि यह अब महज द्विपक्षीय संबंध नहीं रह गया है। इसके वैश्विक आयाम हैं।’
उन्होंने बदलती हुई वैश्विक व्यवस्था में विश्व को बहुध्रुवीय बताते हुए कहा कि भारत और चीन को वैश्विक शांति, स्थिरता एवं विकास में योगदान देने के लिए संचार और सहयोग बढ़ाना चाहिए। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को तालमेल वाले मजबूत क्षेत्रों का पता लगाना चाहिए, एक दूसरे की मुख्य चिंताओं का सम्मान करना चाहिए, अपने मतभेदों को दूर करने के रास्ते तलाशने चाहिए और द्विपक्षीय संबंधों की दिशा पर एक रणनीतिक नजर रखना चाहिए। जयशंकर साल 2009 से 2013 तक चीन में भारत के राजदूत रहे थे। बीजिंग में किसी भारतीय राजनयिक का यह सबसे लंबा कार्यकाल था। उन्होंने कहा कि वह भारत के विदेश मंत्री के तौर पर अपनी नयी भूमिका की शुरूआत करने के लिए चीन आने से खुश हैं। उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि इस जिम्मेदारी के साथ मैं एक बार फिर भारत-चीन संबंधों में योगदान दे सकता हूं। मेरे लिए यह मेरी संपूर्ण विदेश नीति जिम्मेदारी का एक बड़ा हिस्सा है।’


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