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बेदम न कर दे दमा

Posted On August - 17 - 2019

अस्थमा यानी दमा, जो बेवक्त जाने कितने लोगों को बेदम कर रहा है। यह बीमारी होने पर श्वसन मार्ग सिकुड़ जाता है और इसकी वजह से मरीज़ की सांस की नलियों में सूजन आ जाती है। सिकुड़न के चलते रोगी को सांस लेने में परेशानी, आवाज़ आना, सीने में जकड़न या खांसी जैसी समस्‍याएं होने लगती हैं। अस्थमा के दो प्रकार होते हैं—बाहरी और आंतरिक अस्थमा।

अस्थमा के लक्षण

  • सामान्य लक्षणों में अस्थमा की पहचान बलगम वाली खांसी या सूखी खांसी के जरिये होती है।
  • सीने में जकड़न महसूस होना। मरीज़ को सांस लेने में कठिनाई या घरघराहट की आवाज़ आना।
  • रात में या सुबह के समय सांस लेने में ज्यादा तकलीफ होना।
  • ठंडी हवा में सांस लेने से हालत गंभीर होना।
  • व्यायाम के दौरान स्‍वास्‍थ्‍य ज्‍यादा खराब होना। जोर-जोर से सांस लेना, थकान महसूस होना।
  • कई बार उल्टी की भी आशंका बढ़ जाती है।

प्रमुख कारण

प्रदूषण : अस्थमा के अहम कारणों में वायु प्रदूषण एक है। स्मोकिंग, धूल, कारखानों से निकलने वाला धुआं, धूप-अगरबत्ती और कॉस्मेटिक जैसी सुगंधित चीजों से भी दिक्कत बढ़ जाती है।
सर्दी, फ्लू, धूम्रपान, मौसम में बदलाव के कारण भी लोग अस्‍थमा से ग्रसित हो रहे हैं। कुछ ऐसे एलर्जी वाले फूड्स हैं, जिनकी वजह से सांस संबंधी बीमारियां होती हैं। कुछ दवाइयां, शराब का सेवन और कई बार तनाव भी अस्‍थमा का कारण बनते हैं। ज्यादा एक्सरसाइज़ से भी दमा रोग हो सकता है। कुछ लोगों में यह समस्‍या अनुवांशिक भी होती है।

अस्‍थमा के प्रकार
एलर्जिक अस्थमा : एलर्जिक अस्थमा के दौरान आपको किसी चीज से एलर्जी है, जैसे धूल-मिट्टी के संपर्क में आते ही आपको दमा हो जाता है या फिर मौसम में बदलाव के साथ ही आप दमा के शिकार हो जाते हैं।

नॉन-एलर्जिक अस्थमा
इस तरह के अस्थमा का कारण किसी एक चीज़ की अति होने पर होता है। जब आप बहुत अधिक तनाव में हों या बहुत ज़ोर से हंस रहे हों, बहुत अधिक सर्दी लग गई हो या बहुत अधिक खांसी-जुकाम हो।
मिक्सड अस्थमा : इस प्रकार का अस्थमा किन्हीं भी कारणों से हो सकता है। कई बार ये अस्थमा एलर्जिक कारणों से होता है तो कई बार नॉन-एलर्जिक कारणों से। इतना ही नहीं, इस प्रकार के अस्थमा के होने के कारणों का पता लगाना भी थोड़ा मुश्किल होता है।

ऑक्यूपेशनल अस्थमा
ये अस्थमा अटैक अचानक काम के दौरान पड़ता है। नियमित रूप से लगातार आप एक ही तरह का काम करते हैं या अपने कार्यस्थल का वातावरण सूट नहीं करता तो इस प्रकार के अस्थमा के शिकार हो जाते हैं।

एक्सरसाइज़ इनड्यूस अस्थमा
एक्सरसाइज़ या फिर अधिक शारीरिक सक्रियता के कारण अस्थमा हो जाता है।
कफ वेरिएंट अस्थमा : कई बार अस्थमा का कारण कफ होता है। जब आपको लगातार कफ की शिकायत होती है या खांसी के दौरान अधिक कफ आता है तो आपको अस्थमा अटैक पड़ जाता है।

नॉक्टेर्नल यानी नाइट टाइम अस्थमा

ये अस्थमा रात के समय ही होता है। यानी जब अकसर रात के समय अस्थमा का अटैक पड़ने लगे तो आपको समझना चाहिए कि आप नॉक्टेर्नल अस्थमा के शिकार हैं।
मिमिक अस्थमा : जब कोई स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी कोई बीमारी जैसे निमोनिया, कार्डियक जैसी बीमारियां होती हैं तो आपको मिमिक अस्थमा हो सकता है।

चाइल्ड ऑनसेट अस्थमा
ये अस्थमा का वह प्रकार है, जो सिर्फ बच्चों को ही होता है। अस्‍थमैटिक बच्चा जैसे-जैसे बड़ा होता जाता है तो बच्चा इस प्रकार के अस्थमा से अपने आप ही बाहर आने लगता है।

एडल्ट ऑनसेट अस्थमा
अकसर 20 वर्ष की उम्र के बाद ही ये अस्थमा होता है। इस प्रकार के अस्थमा के पीछे कई एलर्जिक कारण छुपे होते हैं। हालांकि, इसका मुख्य कारण प्रदूषण, प्लास्टिक, अधिक धूल मिट्टी और जानवरों के साथ रहना।

दवाएं और उपचार
एंटी-इंफ्लेमेटरी : यह सूजन और जलन को कम करने वाली दवा है। यह विशेष रूप से नाक के जरिए ली जाने वाली दवा है। इस दवा से सांस की नली में सूजन और कफ बनना कम होता है।

ब्रोंकोडाइलेटर्स
ये दवाएं सांस की नली को फौरन चौड़ा करती हैं। इसे फौरी राहत के लिए दिया जाता है। लंबी अवधि के लिए इंफ्लेमेटरी या हाइपर एक्टिविटी को कम करने की दवा देते हैं।

इनहेलर
अस्थमा में इनहेलर थेरैपी इस्तेमाल करनी चाहिए। लोगों के मन में धारणा है कि इनहेलर थेरैपी का इस्तेमाल आखिर में करना चाहिए या फिर डॉक्टर बीमारी बढ़ने पर ही इस थेरैपी को देते हैं, लेकिन यह सोच गलत है। जो दवाएं या पाउडर इनहेलर के ज़रिए दिया जाता है, वह ज्यादा असर करता है।

योग और घरेलू नुस्खे
अस्थमा में गर्म पानी पीना लाभदायक होता है और इससे आराम मिलता है। विशेषज्ञों का कहना है कि योग और प्राकृतिक चिकित्सा में दमा का कोई स्थायी समाधान नहीं है। लेकिन योग की मदद से इसे कंट्रोल कर सकते हैं। यह इम्यून सिस्टम को बूस्ट करने का भी काम करता है।

अस्‍थमा से बचाव

  • अस्‍थमा के मरीजों को बारिश और सर्दी से ज्‍यादा धूलभरी आंधी से बचना चाहिए।
  • बारिश में नमी के बढ़ने से संक्रमण की आशंका ज्‍यादा होती है। इसलिए ज्‍यादा गर्म और ज्‍यादा नम वातावरण से बचना चाहिए क्‍योंकि इस तरह के वातावरण में मोल्‍ड स्‍पोर्स के फैलने की आशंका बढ़ जाती है। धूल-मिट्टी और प्रदूषण से बचें। घर से बाहर निकलने पर मास्‍क साथ रखें।
  • सर्दी के मौसम में धुंध में जाने से बचें। धूम्रपान करने वाले व्‍यक्तियों से दूर रहें।
  • एलर्जी वाली जगह और चीजों से दूर रहें। हमेशा गर्म या गुनगुने पानी का सेवन करें।
  • अस्‍थमा के रोगियों को प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा वाली चीजों का सेवन कम से कम करना चाहिए।
  • कोल्‍ड ड्रिंक, ठंडा पानी और ठंडी प्रकृति वाले आहारों का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • सूखी सफाई यानी झाड़ू से घर की साफ-सफाई से बचें। अगर ऐसा करते हैं तो ठीक से मुंह-नाक ढक कर करें। वैक्यूम क्लीनर का इस्तेमाल करना बेहतर है।
  • बेडशीट, सोफा, गद्दे की नियमित सफाई करें। तकिया साफ रखें।
  • हफ्ते में 2 बार चादर और तकिए के कवर बदल लें और कम से कम दो महीने में परदे धो लें।

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