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बुज़ुर्गों के अधिकार

Posted On August - 18 - 2019

मधु गोयल

बुजुर्गों के प्रति आज की पीढ़ी असंवेदनशील होती जा रही है। ऐसे में बहुत ज़रूरी है कि बुज़ुर्गों के प्रति उनके अधिकारों के लिए जानकारी मुहैया कराई जाए। दिन-प्रतिदिन बुजुर्गों के प्रति लापरवाही के केस बढ़ते जा रहे हैं। बच्चे मां-बाप को संपत्ति से बेदखल कर दर-दर की ठोकरें खाने के लिए छोड़ देते हैं या फिर उससे भी बदतर हालत में। हमारे देश में भी बुजुर्गों पर होने वाले अत्याचारों को रोकने के लिए कुछ कानून बनाये गए हैं। इन अधिकारों के बारे में जानते हैं दिल्ली हाईकोर्ट के वकील एनके अग्रवाल से…
बुजुर्गों के साथ जो समस्याएं हैं उनसे जुड़े उनके अधिकारों के बारें में बताएं?
घरेलू हिंसा, संपत्ति विवाद, बुज़ुर्गों के साथ मारपीट जैसे मामलों से निपटने के लिए और उनको यह हक दिलाने के लिए वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण व कल्याण अधिनियम-2007 में कई प्रावधान किए गए हैं। इस कानून के तहत बुजुर्गों को बहुत से अधिकार दिये हैं।
0 कोई भी सीनियर सिटीजन यानी कि जिनकी आयु 60 वर्ष या उससे अधिक है चाहे वे दत्तक माता-पिता हैं, चाहे वे सौतेले माता-पिता हैं या सगे पेरेंटस हैं, यदि वे अपने भरण-पोषण में असमर्थ हैं तो वह अपने वयस्क बच्चों या रिश्तेदारों से भरण-पोषण प्राप्त करने के लिए आवेदन कर सकते हैं।
0 भरण-पोषण व कल्याण अधिनियम-2007 के अंतर्गत अगर दादा-दादी या माता-पिता के पास नाबालिग पोता-पोती या बच्चे हैं तो वे अपने रिश्तेदार, जो उनकी मृत्यु के बाद उनका उत्तराधिकारी होगा, पर भी दावा कर सकते हैं।
0 यदि माता-पिता अपनी संपत्ति अपने उत्तराधिकारी को दे चुके हैं और वह उत्तराधिकारी उनका भरण-पोषण ठीक प्रकार से नहीं कर रहा है। उन्हें मानसिक या शारीरिक तौर पर प्रताड़ित करता है। उस केस में भी बुजुर्ग माता-पिता अपनी संपत्ति वापस ले सकते हैं।
0 दस हज़ार रुपये प्रतिमाह का खर्च माता-पिता को राजस्व न्यायालय द्वारा अधिकतम दिलाया जा सकता है।
0 दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 के तहत माता-पिता न्यायालय में भरण-पोषण का आवेदन कर सकते हैं।
0 सीनियर सिटीजन कानून के तहत यह भी प्रावधान किया गया है कि जिन बुजुर्गों का कोई नहीं होता, उन बुजुर्गों को वृद्धा आश्रम में अच्छी प्रकार से देखभाल की जा सके इसलिए वृद्धा आश्रम खोले जाएं।
0 भरण-पोषण व कल्याण अधिनियम 2007 में यह भी प्रावधान किया गया है कि बुजुर्गों को उपचार के दौरान किसी भी चिकित्सालय या सरकारी अस्पताल में लंबी लाइनों में इंतज़ार न करना पड़े। उनके लिए अलग से लाइन की व्यवस्था हो।
0 पोषण व कल्याण अधिनियम-2007 के तहत यह भी सख्त कानून है कि यदि किसी वरिष्ठ नागरिक यानी कि सीनियर सिटीज़न की उसके परिवार द्वारा उपेक्षा की जाती है उन्हें मारा-पीटा जाता है या घर से निकाल दिया जाता है तो यह एक गंभीर अपराध के तहत उन पर ‘5000’ का जुर्माना और 3 महीने की कैद या दोनों हो सकते हैं।
यदि बच्चों ने धोखे से घर को अपने नाम करवा लिया ?
वरिष्ठ नागरिक संरक्षण अधिनियम, 2005 के तहत माता-पिता कार्रवाई की मांग कर सकते हैं। यदि किसी बच्चे ने उनको बहला-फुसलाकर धोखे से उनकी प्रॉपर्टी अपने नाम करवा ली है तो जिला प्रशासन उन्हें वापस कब्जा दिलवा सकता है। यदि जिला प्रशासन भी सहयोग नहीं करता तो उस केस में बुज़ुर्ग माता-पिता कोर्ट केस कर सकते हैं।
बेटे की मौत के बाद क्या बहू, सास-ससुर पर प्रॉपर्टी में हिस्से लेने के लिए दबाव बना सकती है?
कैसी भी संपत्ति हो चाहे अचल या चल, मूर्त, अमूर्त या ऐसी कोई भी संपत्ति, जिसमें सास-ससुर का हित जुड़ा हुआ है, बहू का उस पर कोई अधिकार नहीं है। वरिष्ठ नागरिकों को अपने घर में शांति से रहने का अधिकार है। सास-ससुर को सिर्फ बेटा-बेटी या कानूनी वारिस ही नहीं, बल्कि बहू से भी घर खाली कराने का अधिकार है।


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