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बंटी कांग्रेस, बिखरा विपक्ष कैसे आएगा साथ

Posted On August - 13 - 2019

हरीश लखेड़ा/ट्रिन्यू
नयी दिल्ली, 12 अगस्त
फिर से कांग्रेस की कमान थाम चुकी सोनिया गांधी के सामने अब पहले से ज्यादा बड़ी चुनौतियां हैं। सबसे पहले तो धारा 370 को लेकर बंटी कांग्रेस के लिये इस मुद्दे पर एक लाइन तय करनी है। कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम के बयान और मणिशंकर अय्यर के लेख से कांग्रेस का अंतर्विरोध और सामने आ गया हैै। इसके अलावा बिखरते पार्टी संगठन को दुरुस्त करना भी सोनिया के लिये बड़ी चुनौती है, वह भी तक जब कांग्रेस को अगले कुछ माह के भीतर 4 राज्यों के चुनाव में जाना है। इसके अलावा बिखरे विपक्ष को मोदी सरकार के खिलाफ एक मंच पर लाना भी एक चैलेंज है।
सोनिया के सामने एक बड़ी मुश्किल उनका खुद का स्वास्थ्य भी है। वे लंबे समय से अस्वस्थ चल रही हैं और अब उम्रदराज हो चुकी हैं। हालांकि उनकी बेटी और पार्टी महासचिव प्रियंका वाड्रा अब उनके सहयोग के लिए उनके साथ रहेंगी जिससे वे कुछ राहत या सुकून पा सकती है। माना जा रहा है कि राहुल गांधी के अध्यक्ष पद से हटने के बाद अब पार्टी पर फिर से बुजुर्ग नेताओं का दबदबा और बढ़ सकता है। इसके में बुजुर्ग और युवा नेताओं में तकरार बढ़ने की आशंका है। कांग्रेस में लंबे समय से मांग होती रही है कि संगठन के पदों पर दशकों से जमे नेताओं को बदल कर नये नेतृत्व को मौका दिया जाना चाहिए। हालांकि यह काम राहुल गाधी भी नहीं कर पाए और इसी निराशा के चलते उन्होंने इस पद से मुक्ति पाने में भलाई समझी। अब माना जा रहा है कि राहुल के दौर में आगे आए नेताओं को फिर से नेपथ्य में जाना पड़ सकता है। ऐसे में पार्टी में गुटबाजी बढ़ने की संभावना है। इसके अलावा धारा 370 को लेकर कांग्रेस नेताओं के लगातार आ रहे बयानों से भी पार्टी का संकट बढ़ रहा है। इधर, कांग्रेस को अब 4 राज्यों के विधानसभा चुनाव में उतरना है, जबकि उसकी तैयारी शुरू भी नहीं हुई है।
सोनिया ने पहली बार 1997 में कांग्रेस की सदस्यता ली थी। उसके बाद 1998 में वह कांग्रेस की अध्यक्ष चुनीं गई। तक लोकसभा में कांग्रेस के 144 सांसद थे, इनमें तिवारी कांग्रेस के 4 सांसद भी शामिल थे। 161 सीटें जीतकर पहले नंबर पर रही भाजपा ने अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में 13 दिन की सरकार बनाई थी। इसके बाद 1998 में हुए चुनाव में कांग्रेस 141 सीटें ही जीत पाई जबकि भाजपा 182 सीटें लाकर पहले स्थान पर रही और गठबंधन सरकार बनायी। अब जबकि सोनिया ने फिर से कांग्रेस की कमान थामी है, लोकसभा में पार्टी मात्र 52 सांसदों तक सिमट गयी है।


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