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परमाणु ऊर्जा में तरक्की की नयी राह

Posted On August - 31 - 2019

केवल तिवारी

परमाणु ऊर्जा का नाम सुनते ही जेहन में कई तरह के सवाल कौंधते हैं। मसलन, कोई इसे परमाणु बम से जोड़ता है तो कोई ऐसे ही किसी और रूप में। असल में परमाणु ऊर्जा तरक्की की नयी राह खोल रही है। परमाणु शक्ति का संदेश तो गीता में दिया गया था। गीता संदेश के जरिये भगवान श्रीकष्ण ने कहा, कण-कण में मैं हूं। यह वाक्य जहां ईश्वर के सर्वव्यापी होने का ज्ञान देता है, वहीं कण-कण की ताकत के बारे में भी बताता है। कण-कण यानी अणु और परमाणु। इतनी ताकत है अणु और परमाणु में कि इसका सदुपयोग दुनिया को तरक्की की राह पर ले जाएगा और दुरुपयोग विनाश की ओर।
विनाश की विभीषिका मनुष्य जापान के नागासाकी और हिरोशिमा में देख चुका है। आज बदले परिवेश में परमाणु शक्ति से चौतरफा विकास के द्वार खुले हैं। सबसे सस्ती बिजली के स्रोत से लेकर तमाम प्रौद्योगिकी में परमाणु शक्ति का अनुपम नजारा दिखने लगा है। विकिरण शक्ति का इस्तेमाल मानवमात्र की सेवा में तो हो ही रहा है, कैंसर जैसी घातक बीमारी की जांच, इलाज में भी इसका प्रयोग हो रहा है। यही नहीं सबसे बड़ी समस्या के तौर पर उभर रहे कचरे के प्रबंधन के लिए भी ऑटोमिक एनर्जी के जरिये नये रास्ते बने हैं। वैज्ञानिकों का दावा है कि भारत अगले दस सालों के दौरान परमाणु ऊर्जा जिसे हरित ऊर्जा भी कहा जाता है, के क्षेत्र में महत्वपूर्ण सफलता हासिल करेगा। एक अध्ययन के अनुसार 2030 तक कुल ऊर्जा उत्पादन में हरित ऊर्जा की हिस्सेदारी 50 फीसदी तक पहुंच जाएगी। सभी जानते हैं कि तरक्की के सोपानों पर चढ़ने के लिए बिजली सबसे अहम है। बिजली उत्पादन कोयला, पानी, गैस और परमाणु से होता है। देश में स्थित कुछ प्रमुख परमाणु ऊर्जा केंद्रों में से एक रावतभाटा (कोटा) परमाणु संयंत्र से जुड़े वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने पिछले दिनों दावा किया कि परमाणु ऊर्जा सबसे सस्ती है। उन्होंने बताया कि थर्मल पावर में अपनी तरह की दिक्कतें हैं, जबकि पन बिजली के लिए भी पर्याप्त डैम आदि चाहिए होते हैं। गैस से बनने वाली बिजली अपेक्षाकृत सस्ती होती है, लेकिन वह भी परमाणु ऊर्जा से महंगी ही पड़ती है।
परमाणु शक्ति का इस्तेमाल चिकित्सा क्षेत्र में भी खूब हो रहा है। आज जांच और इलाज के लिए इस्तेमाल की जाने वाली तमाम तकनीक में परमाणु संयंत्रों का विशेष योगदान है। इस संबध में टाटा मेमोरियल सेंटर के डॉ वेंकटेश रंगराजन ने बताया के परमाणु ऊर्जा से प्राप्त तकनीक के जरिये आज जल्दी कैंसर का पता चल जाता है और इलाज भी संभव हो पाया है।
यह धुआं नहीं, वाष्प का है गुबार
अगर आप कभी परमाणु ऊर्जा केंद्र के आसपास से गुजरें तो आपको बेहद लंबी-चैड़ी चिमनियों से धुआं सा निकलता दिखेगा। असल में यह धुआं नहीं बल्कि वाष्प हुआ पानी है। वैज्ञानिकों के मुताबिक न्यूक्लियर पावर प्लांट में कूलेंट गतिविधि के दौरान कुछ पानी वाष्प बनकर उड़ जाता है, कुछ पानी प्लांट में घूमता हुआ वापस कूलेंट में जाता है। रावतभाटा ऑटोमिक एनर्जी के साइट निदेशक वीके जैन के मुताबिक संयंत्र में सुरक्षा के व्यापक व्यवस्था होती है। उनके मुताबिक परमाणु संयंत्र का मंत्र है ‘सेफ्टी फर्स्ट, प्रोडक्शन नेक्स्ट।’ ऊर्जा संवर्धन के तहत विभन्नि प्लांट में लगातार काम के रिकॉर्ड का जिक्र करते हुए डीएई के सार्वजनिक जागरूकता विभाग के रवि शंकर ने कहा कि परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के आसपास रेडिएशन के खतरों के बारे में जो कहा जाता है वह असल में सही नहीं है। उन्होंने कहा कि हमारे वातावरण में मौजूद कुल रेडिएशन का 85 फीसदी तो खाद्य पदार्थों, हवा, पानी आदि से आता है। ऊर्जा संयंत्र महफूज़ हैं।


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