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डीजीपी को पुलिसकर्मियों की दया याचिका स्वीकारने का अधिकार

Posted On August - 14 - 2019

चंडीगढ़, 13 अगस्त (ट्रिन्यू)
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को पुलिसकर्मियों की दया याचिका स्वीकार करने का अधिकार है। कोर्ट की यह व्यवस्था सेवा से निष्कासित किए गए एक पुलिसकर्मी की दया याचिका पर सुनवाई के दौरान आयी। उसकी दया याचिका पांच साल में दूसरी बार यह कहकर खारिज कर दी गयी कि डीजीपी द्वारा ऐसी किसी भी याचिका को स्वीकार करने का प्रावधान ही नहीं है। 16 अक्तूबर 2006 को सेवा से बर्खास्त किए जाने के आदेश को दरकिनार करते हुए खंडपीठ ने पूर्व के आदेश को बरकरार रखा। इसके तहत बर्खास्तगी की सजा को तीन इनक्रीमेंट रोकने में तब्दील किया गया था।
जस्टिस राजीव शर्मा और जस्टिस हरिंदर सिंह सिद्धू की बेंच ने यह आदेश सुभाष चंद्र की ओर से हरियाणा एवं अन्य के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। दिसंबर 1988 में वह हरियाणा पुलिस में बतौर कांस्टेबल भर्ती हुआ था। वर्ष 1996 में 118 दिन गैर हाजिर रहने पर अगले साल उसको बर्खास्त किया गया।
डीजीपी ने सितंबर 2001 में उसकी उस दया याचिका को स्वीकार किया। उसको दिए गए दंड को बदलकर तीन बार इनक्रीमेंट को रोकने में तब्दील कर दिया गया। फिर उसे हेड कांस्टेबल के तौर पर वर्ष 2005 में नौकरी पर ले लिया गया। एक साल बाद नए डीजीपी ने उसे कारण बताओ नोटिस जारी किया और उससे पूछा गया कि क्यों न उसकी बर्खास्तगी को बहाल रखा जाए। नोटिस में कहा गया कि डीजीपी को दया याचिका स्वीकारने का कोई अधिकार नहीं है। इसके बाद याचिकाकर्ता हाईकोर्ट पहुंच गया। उसकी याचिका को दो अन्य के साथ सुना गया।


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