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घटता दबदबा  नायिकाओं का

Posted On August - 24 - 2019

असीम चक्रवर्ती

एक अर्से से नायिका प्रधान फिल्में नहीं बन पा रही हैं। ऐसा देखने को मिल रहा है कि हाल की करीब 95 फीसदी फिल्मों में हीरोइनें खुलकर सामने नहीं आ पा रही हैं। वरना कभी नर्गिस, मीना कुमारी से लेकर माधुरी दीक्षित तक के दौर में फिल्मों में नायिकाओं का दबदबा साफ नज़र आता था। यही नहीं, वह बाकायदा अपना रोल बढ़ाने का दावा भी करती थी। आज विद्या बालन, कंगना रनौत, दीपिका ही इस मामले में थोड़े अपवाद हैं। वैसे कंगना भी अपने लिए अच्छी फिल्मों का चयन नहीं कर पा रही हैं। ‘जजमेंटल है क्या’ जैसी दोयम दर्जे की फिल्में करके वह ज्यादा दिन अपनी साख बचाकर नहीं रख पाएंगी। दूसरी ओर दीपिका ने हाल ही में ‘छपाक’ का काम पूरा किया है। वरना ‘पद्मावत’ जैसी नायिका बेस्ड फिल्म में भी दीपिका की बजाय रणवीर सिंह को ज्यादा तवज्जो मिली है। आखिर ऐसी क्या बात है कि तमाम स्टारडम हासिल करने के बावजूद हमारी ज्यादातर एक्ट्रेस अपना दावा मजबूती के साथ पेश नहीं कर पाती हैं।

वैजयंती माला का रहा दबदबा
सिने जगत की दिग्गज अभिनेत्री वैजयंतीमाला के साथ जुड़े एक वाकये से इस चर्चा की शुरुआत करते हैं। बात उनकी और दिलीप कुमार की एक सुपरहिट फिल्म ‘नया दौर’ के दिनों की है। उन दिनों दिलीप-वैजयंती में काफी मतभेद चल रहे थे। दोनों ही दिग्गज थे। पर दोनों ने अपने ईगो को फिल्म निर्माण में कभी सामने नहीं आने दिया। लेकिन वैजयंतीमाला ने फिल्मकार बीआर चोपड़ा के सामने सिर्फ एक शर्त रखी थी, किसी भी तरह से दिलीप कुमार को उनसे ज्यादा फुटेज नहीं मिले। यानी यदि 12 सीन दिलीप के हैं, तो 12 सीन उनके भी होने चाहिए। यही नहीं, उन्होंने फिल्म के एक लोकप्रिय गाने ‘साथी हाथ बढ़ाना…साथी रे’ में भी अपने कई फ्रेेम रखवाये। जबकि इस गाने में उनके मौजूद रहने की बात बिल्कुल नहीं थी।

दीपिका का स्टारडम
अब ज़रा बात नए दौर की नायिका दीपिका पादुकोण की। वह चाहें तो कभी भी वैजयंतीमाला जैसे तेवर दिखा नहीं पाएंगी। असल में उन पर हमेशा उनका स्टारडम हावी रहता है। ट्रेड विश्लेषक तरण आदर्श भी मानते हैं कि असल में दीपिका का ज्यादातर ध्यान खुद को संभालने में लगा रहता है। इसलिए भी बतौर एक्ट्रेस उनकी स्थिति गड्डमड्ड रहती है। कभी- कभी कुछ हिट ‘फाइंडिंग फेनी’ या पीकू से ही उन्हें संतुष्ट होना पड़ा है। यहां तक कि अपने प्रिय निर्देशक संजय लीला भंसाली की फिल्मों ‘बाजीराव मस्तानी’ और ‘पद्मावत’ में भी उनका रुतबा खुलकर सामने नहीं आ पाता है। और यह कोई नई बात नहीं। कोमल नाहटा इसकी वजह बताते हैं,‘दीपिका की मुश्किल यह है कि उन्हें हमेशा यह डर सताए रहता है कि ज्यादा मांग रखने पर कहीं उनकी मांग न घट न जाए। बड़े बैनर उनके हाथ से फिसल न जाएं। इससे उनके पीछे खड़ी दूसरी स्टार तारिकाएं उनसे आगे बढ़ जाएंगी।

कैट को बड़े हीरो का सहारा
अभिनेत्री कैटरीना कैफ तो इस बारे में कोई दावा ही नहीं करती हैं। बड़े हीरो की टाइमपास हीरोइन बनकर ही वह अपने एक्टिंग के शौक को पूरा कर रही हैं। सलमान के साथ फिल्म ‘भारत’ में भी उन्होंने यही काम किया है। कैट भी उन हीरोइनो में से एक है जो बड़े हीरो को सफलता का बड़ा फार्मूला मानती हैं। तीनों खान हीरो के साथ काम करके वह खुश हैं क्योंकि वह खुद भी अच्छी तरह से जान गई हैं कि उनकी एक्टिंग स्किल कितनी है। कभी उन्होंने ‘फितूर’ और ‘बार-बार देखो’ जैसी फिल्मों के ज़रिए अपने एक्टिंग के तेवर दिखलाने की कोशिश की थी। पर अब यह बात उन्हें अच्छी तरह से समझ में आ गई है कि एक्टिंग उनके बस की बात नहीं, वह खाली ग्लैमर डॉल है। नाहटा कहते है,‘कैट जैसी कई हीरोइनें अपने ग्लमैर को ही अपना स्टारडम मान बैठती हैं और एक दिन इसी सोच के चलते इंडस्ट्री से उनकी विदाई हो जाती है।

अनुष्का गंभीर नहीं
काफी अर्से से न के बराबर फिल्में कर रहीं अभिनेत्री अनुष्का शर्मा उम्दा एक्टर हैं। कई ऐसी फिल्में हैं, जिनमें उनकी एक्टिंग की काफी सराहना हुई। पर कोई फिल्म ऐसी नहीं है, जिसके बारे में यह कहा जा सके कि इसमें उनका दबदबा था। बस, ‘एनएच-10’ और ‘फिल्लौरी’ में ही वह दमदार एक्टिंग करती नज़र आती हैं। बाकी बड़े हीरो की फिल्मों में उनसे जो भी कहा जाता है, उसे करके वह अपनी छुट्टी ले लेती हैं। वरना उन जैसी समझदार एक्टर को ए दिल है मुश्किल, जब हैरी मेट सेजल जैसी साधारण फिल्मों में काम करने की क्या मजबूरी थी? अब तो आलोचक यह मानने लगे हैं कि यदि अनुष्का की यही सोच रही तो बहुत जल्द दर्शक उन्हें भुला देंगे।
इसकी शुरुआत हो भी चुकी है क्योंकि अब इंडोर्समेंट के मामले में वह काफी पीछे चली गई हैं। उन्होंने अच्छी फिल्में करने की बजाय अपना स्टारडम बड़ा बैनर, बड़े हीरो या फिर विराट कोहली में खोजने की कोशिश की थी।

बेफ्रिक आलिया
अचानक मिले स्टारडम के बाद आलिया भट्ट अभी भी मेच्योर नहीं हो पाई हैं। कई फिल्मों की सफलता ने उन्हें एक बेफ्रिकी दे दी है। ‘बद्रीनाथ की दुल्हनिया’ हो या फिर ‘हाईवे’, अपनी ज्यादातर फिल्मों में आलिया ने खुद को अच्छी तरह से साबित किया है। पर उनकी मजबूरी है जो भी फिल्म मिले, उसे कर ही डालो। वैसे वह अब यह कहने लगी हैं कि वह फिल्म की स्क्रिप्ट को बहुत ध्यान से पढ़ती हैं। पर ऐसा नहीं लगता।
फिलहाल तो वह सिर्फ स्टारडम को बचाने की कोशिश कर रही हैं। ‘इंशाअल्लाह’ जैसी फिल्में भी वह इसी वजह से करती हैं कि उन्हें सलमान जैसे बड़े हीरो का साथ चाहिए। सच तो यह है कि वह खुद से कोई बड़ा दावा पेश करने की स्थिति में ज़रा भी नहीं हैं।

प्रियंका की विदाई
बतौर अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा हिंदी फिल्मों में बहुत कुछ कर सकती थी पर अत्यधिक महत्वाकांक्षा ने उनका बहुत कुछ बिगाड़ दिया। आज तो इंडस्ट्री में प्रियंका की स्थिति काफी बिगड़ चुकी है। हां, हॉलीवुड में उनकी कोशिश ज़रूर जारी है। इन दिनों वह सिर्फ निजी जिंदगी की चर्चा ही करती हैं। हिंदी फिल्मों से तो उनकी लगभग विदाई हो चुकी है। पीटी उषा की बायोपिक पर बनने वाली जिस फिल्म में उनके काम करने की बात थी, उसका भी कुछ अता-पता नहीं है।

कंगना की बढ़त
वह खुलेआम कहती हैं कि उन्हें स्टारडम की ज्यादा परवाह नहीं है। कई बड़े एंडोर्समेंट के ज़रिए अपनी आर्थिक स्थिति मज़बूत कर चुकी अभिनेत्री कंगना रनौत ने अपने एक्ट्रेस वाले दमखम को कभी कमज़ोर नहीं होने दिया है। उनकी सफलता पुराने दिनों की हीरोइनों के स्टारडम की याद दिला देती है। ‘मणिकर्णिका’ की बात जाने दें तो उनकी पिछली फिल्में ‘सिमरन’,’जजमेंटल है क्या’ ने दर्शकों को थोड़ा हताश किया। अब दर्शक भी समझ नहीं पा रहे हैं कि यह उम्दा अभिनेत्री जजमेंटल जैसी फिल्मों में अभिनय के नाम पर आखिर क्या कर रही है। अब समय आ गया है, जब कंगना को काम के मामले में बेवजह की दखलअंदाज़ी को भूलकर बेहतर लोगों का ज्यादा सहयोग करना चाहिये।

विद्या मजबूत
नई फिल्म ‘मिशन मंगल’ में अभिनेत्री विद्या बालन अभिनेता अक्षय कुमार के साथ अपने बदले हुए तेवर के साथ नज़र आई। वैसे अब उन्होंने बॉलीवुड में अपनी स्थिति को सुदृढ़ कर लिया है। शादी के बाद से ही विद्या अपने मुताबिक फिल्में करने के लिए मशहूर हो चुकी हैं। विद्या कहती हैं,‘ मैं मानती हूं कि पिछले कुछ सालों से मैं बेखौफ होकर फिल्में कर रही हूं। इसलिए बॉलीवुड में अपनी स्थिति को लेकर ज़रा भी चिंतित नहीं रहती । मुझे सिर्फ अपने मन और दर्शकों को संतुष्ट करना है।’ शायद इसलिए अभी काफी दिनों तक वह बॉलीवुड में अपनी यथास्थिति बनाए रखेंगी। खैर, सोनाक्षी सिन्हा, श्रद्धा कपूर, तापसी पन्नु, परिणति चोपड़ा, जैकलीन फर्नांडीज़ जैसी अभिनेत्रियों की सूची बहुत लंबी है। ये वे अभिनेत्रियां हैं, जिनकी कोई दमदार स्थिति बॉलीवुड में नहीं है। और न ही ये अभिनेत्रियां बॉलीवुड में अपनी कोई मुकम्मल जगह बनाने के लिए प्रयासरत नज़र आती हैं। इसलिए जो चल रहा है, इसे ही उन्होंने अपना मुकद्दर बना लिया है।


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