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ऐसे बनाया गया था तिरंगा

Posted On August - 11 - 2019

विद्या

तिरंगा देश की शान है, आन है। बच्चों शायद आप नहीं जानते होंगे कि तिरंगा किसने डिज़ाइन किया था। हम आपको बता दें कि तिरंगे को पिंगली वेंकैया नामक शख्स ने डिजाइन किया था। पिंगली वेंकैया ब्रिटिश आर्मी में शामिल हुए थे और अफ्रीका में एंग्लो-बोअर जंग में हिस्सा लिया था, जहां उनकी मुलाकात महात्मा गांधी से हुई थी। गांधी से वे बहुत प्रभावित हुए।
कैसे बना राष्ट्रीय ध्वज
1916 में पिंगली वेंकैया ने एक ऐसे झंडे के बारे में सोचा, जो सभी भारतवासियों को एक धागे में पिरोकर रखें। एस.बी. बोमान जी और उमर सोमानी जी ने उनका इस काम में साथ दिया और इन तीनों ने मिलकर ‘नेशनल फ्लैग मिशन’ की स्थापना की। वैकेंया महात्मा गांधी से काफी प्रेरित थे। उन्होंने राष्ट्रीय ध्वज के लिए उन्हीं से सलाह लेना बेहतर समझा। गांधीजी ने उन्हें इस ध्वज के बीच में अशोक चक्र रखने की सलाह दी, जो संपूर्ण भारत को एक सूत्र में बांधने का संकेत बनेगा। आपको बता दें, पिंगली वेंकैया लाल-हरे रंग की पृष्ठभूमि पर अशोक चक्र बनाकर लाए पर गांधी जी को यह ध्वज ऐसा नहीं लगा कि जो संपूर्ण भारत का प्रतिनिधित्व कर सकता है। इसके बाद काफी वक्त तक राष्ट्रीय ध्वज में रंग को लेकर तरह-तरह के वाद-विवाद चलते रहे थे।
ऐसे बना तिरंगा
वर्ष 1947 में भारत ने अंग्रेजों को देश छोड़ने पर मजबूर कर दिया। आजादी की घोषणा से कुछ दिन पहले फिर कांग्रेस के सामने ये प्रश्न आ खड़ा हुआ कि अब राष्ट्रीय ध्वज को क्या रूप दिया जाए? इसके लिए फिर से डॉ. राजेंद्र प्रसाद के नेतृत्व में एक कमेटी बनाई गई। तीन सप्ताह बाद 14 अगस्त को कमेटी ने अखिल भारतीय कांग्रेस के ध्वज को ही राष्ट्रीय ध्वज घोषित करने की सिफारिश की। 15 अगस्त, 1947 को तिरंगा हमारे देश की आज़ादी का प्रतीक बन गया।
बच्चों, भारत के राष्ट्रीय ध्‍वज तिरंगे का डिज़ाइन बनाने वाले पिंगली वेंकैया के सम्मान में भारत सरकार ने उनके नाम पर डाक टिकट जारी किया था। राष्ट्रीय ध्वज बनाने के बाद पिंगली वेंकैया का झंडा ‘झंडा वेंकैया’ के नाम से लोकप्रिय हुआ।
भारत का राष्ट्रीय ध्वज
भारतीय राष्‍ट्रीय ध्‍वज को इसके वर्तमान स्‍वरूप में 22 जुलाई, 1947 को आयोजित भारतीय संविधान सभा की बैठक के दौरान अपनाया गया था। यह बैठक 15 अगस्‍त, 1947 को अंग्रेजों से भारत की स्‍वतंत्रता के कुछ ही दिन पूर्व की गई थी। इसे 15 अगस्‍त, 1947 और 26 जनवरी, 1950 के बीच भारत के राष्‍ट्रीय ध्‍वज के रूप में अपनाया गया था।
महत्वपूर्ण बातें
0 जब भी तिरंगा फहराया जाए तो उसे सम्मानपूर्ण स्थान दिया जाए। उसे ऐसी जगह लगाया जाए, जहां से वह स्पष्ट रूप से दिखाई दे।
0 सरकारी भवन पर तिरंगा रविवार और अन्य छुट्टियों के दिनों में भी सूर्योदय से सूर्यास्त तक फहराया जाता है, विशेष अवसरों पर इसे रात को भी फहराया जा सकता है। तिरंगे का प्रदर्शन सभा मंच पर किया जाता है तो उसे इस प्रकार फहराया जाएगा कि जब वक्ता का मुंह श्रोताओं की ओर हो तो तिरंगा उनके दाहिने ओर हो।
0 तिरंगा किसी अधिकारी की गाड़ी पर लगाया जाए तो उसे सामने की ओर बीचोंबीच या कार के दाईं ओर लगाया जाए।
0 फटा या मैला तिरंगा नहीं फहराया जाता है। जब तिरंगा फट जाए या मैला हो जाए तो उसे एकांत में पूरा नष्ट किया जाए।


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