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आज़ादी का संघर्ष

Posted On August - 11 - 2019

ललित शौर्य

कमल पांचवीं कक्षा में पढ़ता था। हर साल वह पन्द्रह अगस्त के कार्यक्रमों में बड़े उत्साह के साथ भाग लेता था। लेकिन उसको एक बात समझ में नहीं आती थी कि आखिर हर साल पंद्रह अगस्त क्यों मनाया जाता है। हर साल स्वतंत्रता दिवस मनाने से क्या लाभ है। वैसे उसे इस दिन खूब मजा आता था। उसे खाने को लड्डू और टॉफियां भी मिलती थीं। कमल को गीत-संगीत सुनने की बहुत इच्छा रहती थी। इसके बावजूद ये प्रश्न उसका पीछा नहीं छोड़ रहा था। क्लास में पंद्रह अगस्त की तैयारियां चल रही थीं। इतने में राहुल सर क्लास में आते हैं। राहुल सर सभी बच्चों के अत्यंत प्रिय हैं। वे बच्चों से कहते हैं, ‘क्या तुम लोग आजादी की कहानी सुनना पसंद करोगे।’ सभी बच्चे कहानी का नाम सुनकर उछल पड़ते हैं और वे सब एक स्वर में बोल पड़ते हैं, ‘जी सर।’ ‘वाह ये तो बहुत अच्छी बात है। हमें अपनी आजादी के बारे में और इसके महत्व के बारे में पता होना ही चाहिए। क्या कोई बता सकता है हम पंद्रह अगस्त इतने धूमधाम से क्यों मनाते हैं।’ राहुल सर ने पूछते हुए कहा।
मुकेश ने कहा, ‘पंद्रह अगस्त के दिन हमारा देश आजाद हुआ था। इसी ख़ुशी में हम पंद्रह अगस्त मनाते हैं।’
‘सही जवाब। चलो ये बताओ हमारा देश किसका गुलाम था।’ राहुल सर ने पूछा।
‘हमारा देश अंग्रेजों का गुलाम था।’ कमल ने जवाब देते हुए कहा।
‘वाह तुम सब तो बहुत होशियार हो।’ राहुल सर ने मुस्कुराते हुए कहा।
‘सर अब प्लीज कहानी तो सुनाइये।’ सभी बच्चे एक स्वर में बोल पड़े।
‘अरे हां। मैं तो भूल ही गया था। मैं तो तुम्हें आजादी की कहानी सुनाने वाला था।’ राहुल सर ने कहा।
इसके बाद राहुल सर कुर्सी पर बैठ गए, और कहानी सुनाने लगे, ‘अंग्रेज हमारे देश में व्यापार करने आये थे। उन्होंने देखा भारत में बहुत अधिक संपदा है। धन-धान्य है क्यों न भारत और भारतीयों को लूटा जाए। इसके लिए वे धीरे-धीरे षड्यंत्र रचने लगे। उस समय देश में छोटे-छोटे राज्य हुआ करते थे। अंग्रेजों ने उन राज्यों के राजाओं को आपस में लड़वाकर अपना लाभ उठाया। व्यापारी की शक्ल में आये अंग्रेजों ने सेना रखना शुरु कर दिया। उन्होंने आपसी फूट डालकर देश के कई राज्य हड़प लिए। वे उन राज्यों में अपना शासन चलाने लगे। इसी तरह धीरे-धीरे उन्होंने पूरे देश को अपने अधीन कर लिया और भारत देश को अपना गुलाम बना लिया। लेकिन हमारे देश के लोगों ने, वीर जवानों ने गुलामी स्वीकार नहीं की। वे संघर्ष करते रहे। उन्होंने अपने प्राणों का बलिदान दिया। देश की आजादी के लिए हंसते-हंसते फांसी का फंदा चूम लिया। लम्बे संघर्ष के बाद पन्द्रह अगस्त 1947 को हमारा देश आजाद हो गया। ये थी हमारे देश के संघर्ष की कहानी।’
बच्चे ये सब कहानी सुनकर रोमांचित हो उठे। लेकिन अभी भी कमल को अपने प्रश्न का उत्तर नहीं मिल पाया था। राहुल सर ने बच्चों से कहा, ‘किसी को कुछ पूछना तो नहीं है।’मानों राहुल सर ने कमल के मन की बात जान ली हो। कमल तपाक से खड़ा हुवा और पूछने लगा, ‘देश तो पन्द्रह अगस्त, 1947 को आजाद हो गया था। उस दिन देशभर में जश्न भी मनाया गया होगा। लेकिन हम आजादी के इतने वर्षों बाद भी इस दिन को क्यों मनाते हैं।’‘कमल तुमने बहुत अच्छा प्रश्न किया। पन्द्रह अगस्त, 1947 को हमारा देश आजाद हो गया था। लेकिन हम आज भी आजादी को उल्लास के साथ मनाते हैं। ऐसा इसलिए कि हम आजादी के संघर्ष को न भूलें। उन अमर शहीदों की याद हमेशा हमारे दिलों में बनी रहे, जिन्होंने इस देश को आजाद करने के लिए कुर्बानियां दी हैं। गुलामी कितनी पीड़ादायक है और स्वतंत्रता में कितना आनंद है ये बात हमें हमेशा महसूस होती रहे।’ राहुल सर ने विस्तार से बताया। राहुल को अपने प्रश्न का उत्तर मिल चुका था। अब उसके दिल में पंद्रह अगस्त के लिए और अधिक सम्मान उमड़ पड़ा था। वह अभी कुछ और सोच ही रहा था इतने में किशोर पीछे से ‘भारत माता की जय’ का उद्घोष करने लगा। सभी बच्चे ‘भारत माता की जय’ बोलने लगे। इसमें एक ऊंचा स्वर कमल का भी था। राहुल सर क्लास से जा चुके थे। सभी बच्चे फिर से पन्द्रह अगस्त की तैयारियों में जुट गए थे।


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