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अमन की ईद

Posted On August - 13 - 2019

घाटी के लिये सुखद संकेत

जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा वापस लेने और दो केंद्र शासित प्रदेश बनाये जाने के बाद केंद्र व राज्य प्रशासन के सामने दो बड़ी तात्कालिक चुनौतियां थीं। पहली जुम्मे की नमाज ठीक-ठाक निपट जाये। दूसरे, बकरीद शांतिपूर्वक मना ली जाये। हालांकि राज्य में कड़े सुरक्षा प्रबंध जारी हैं और संचारबंदी के बीच कई तरह के अन्य प्रतिबंध लगे हैं, मगर रविवार व सोमवार को इन बंदिशों में कई तरह की ढील दी गई ताकि लोग बकरीद की तैयारी कर सकें। कुल मिलाकर राज्य से अमन-चैन से बकरीद मनाये जाने की खबरें मिली हैं, जिसे बहुलवादी भारतीय लोकतंत्र के लिये शुभ संकेत माना जा सकता है। हालांकि प्रशासन ने इस त्योहार को शांतिपूर्वक मनाने के लिये व्यापक-चाकचौबंद उपाय किये थे ताकि लोग बकरीद के लिये आवश्यक खरीदारी कर सकें। इसके लिये विशेष कुर्बानी के जानवरों की मंडियां व बाजार बनाये गये थे। नागरिकों की सुविधा के लिये मोबाइल वैनों के जरिये घरों में आवश्यक सामान, गैस, सब्जियों की आपूर्ति तथा संचारबंदी के चलते तीन सौ विशेष टेलीफोन बूथ बनाये गये थे ताकि लोग त्योहार पर अपने लोगों से बात कर सकें। निस्संदेह कड़े सुरक्षा कारणों के चलते बकरीद के मौके पर बड़े जमावड़े की इजाजत नहीं थी, लेकिन इसके बावजूद लोग उत्साहपूर्वक त्योहार मनाते देखे गये। निस्संदेह उम्मीदों के मुताबिक जम्मू-कश्मीर में बकरीद शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न होने पर प्रशासन व सुरक्षा बलों ने राहत की सांस ली होगी। खासकर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने जो बकरीद पर लाल चौक से लेकर अन्य संवेदनशील इलाकों में आम जन का मन पढ़ने की कोशिश करते नजर आये। निस्संदेह किसी भी राज्य का जनमानस आमतौर पर शांतिप्रिय व तरक्की पसंद होता है। कमोबेश यही स्थिति जम्मू-कश्मीर की भी रही मगर सत्ता के दावेदारों तथा सीमा पार से मुहिम चलाने वाले लोग अपने खतरनाक मंसूबों के लिये दशकों से स्थानीय लोगों को इस्तेमाल करते रहे हैं।
वहीं दूसरी ओर जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा वापस लिये जाने व इससे  अलग करके लद्दाख को भी केंद्र शासित राज्य का दर्जा दिये जाने से पाक की बौखलाहट कम होने का नाम नहीं ले रही है। अमेरिका व अरब देशों का समर्थन न मिलने तथा रूस द्वारा खुलकर भारत का समर्थन करने से पाक की स्थिति सांप-छछूंदर जैसी हो गई है। उसके परममित्र चीन ने लद्दाख के मुद्दे पर प्रतिक्रिया देकर कर्तव्य की इतिश्री कर ली है। यही वजह है कि पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी की नौ अगस्त की चीन यात्रा के बाद अब भारतीय विदेशमंत्री एस. जयंशकर चीन पहुंचे हैं। उन्होंने चीनी विदेशमंत्री वांग यी से मुलाकात की है। दरअसल, जयशंकर चीनी राष्ट्रपति की अक्तूबर में होने वाली भारत यात्रा की तैयारी के सिलसिले में बातचीत करेंगे। ऐसे में इस्लामिक देशों व विकसित देशों के अपेक्षित समर्थन न मिल पाने से पाक स्तब्ध है और भारत पर तरह-तरह के एकतरफा प्रतिबंध लगा रहा है। निस्संदेह ये कदम उसके खुद के लिये आत्मघाती साबित होंगे। पहले से ही जर्जर अर्थव्यवस्था से दो चार पाकिस्तान को एकतरफा व्यापारिक प्रतिबंधों से और ज्यादा हानि होने वाली है, जिसे समझने की कोशिश पाक नहीं कर रहा है। दरअसल, पाक ने अपनी जनता को कश्मीर हासिल करने के जो सब्जबाग दिखाये थे, अब वे ही वायदे उसकी गले की फांस बन गये हैं। उसका संयुक्त राष्ट्र का दांव भी खाली जाता प्रतीत हो रहा है। ऐसे में सामान्य हालात की ओर अग्रसर जम्मू-कश्मीर के प्रशासन व सुरक्षा बलों को सीमा पार से आने वाले आतंकवादी समूहों के खतरे से चौकन्ना रहने की जरूरत है। जम्मू-कश्मीर में दखल का रास्ता बंद होने तथा अंतर्राष्ट्रीय बिरादरी के भारत के पक्ष में खड़ा होने से स्तब्ध पाक जम्मू-कश्मीर में अशांति फैलाने के लिये किसी भी हद तक जा सकता है।


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