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अन्य खेलों को प्रोत्साहन

Posted On August - 12 - 2019

जन संसद

गौरव का पल
‘उड़नपरी’, ‘ढिंग एक्सप्रेस’ और ‘गोल्डन गर्ल’ के नाम से जाने जानी वाली हिमा दास ने एक के बाद एक पांच गोल्ड देश की झोली में डाल दिये, यह एक बड़ी उपलब्धि है। आज देश का सीना गर्व से फूला हुआ है, जिसका कारण केवल हिमा दास है। सरकार का कर्तव्य बनता है कि वह क्रिकेट की भांति अन्य खेलों के लिए भी उचित संसाधन उपलब्ध कराए। निस्संदेह समाज भी इन खेलों को प्रोत्साहित करे ताकि इन्हें बढ़ावा मिल सके। फलतः कई हिमा दास देश का नाम सुनहरे पन्नों पर लिख देंगी। वह पल देश के लिए गौरव का पल होगा।
मनकेश्वर ‘भट्ट’, बिहार
समान सम्मान मिले
बेशक प्रधानमंत्री ने ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, बेटी खिलाओ’ का नारा दिया। लेकिन जब बेटियां गोल्ड मेडल लायीं तो देश ने उनकी जीत पर अपेक्षित प्रतिसाद नहीं दिया। हिमा दास ने पांच गोल्ड मेडल जीते, लेकिन दुती चंद और हिमा दास के स्वर्ण पदकों को वैसा सम्मान नहीं मिला, जैसे क्रिकेट की जीत पर मिलता है। क्रिकेट को देश की अस्मिता का पर्याय बनाने की कोशिश हुई है। इसी वजह से अन्य खेलों में देश की प्रतिभाओं को पर्याप्त पहचान व प्रतिष्ठा नहीं मिल पाती। जरूरी है प्रत्येक खेल को समान रूप से सम्मान मिले।
पूनम कश्यप, बहादुरगढ़
प्रचार तंत्र हावी
देश में अत्यधिक लोग क्रिकेट के दीवाने हैं और क्रिकेट की जीत से अगर आमजन को खुशी मिलती है तो हारने से आहत भी होते हैं। अगर बाकी खेल पीछे हैं तो उसका कारण है प्रचार। क्रिकेट वर्ल्ड कप का प्रचार जितने जोरों-शोरों से किया जाता है, उतना अन्य खेलों का प्रचार नहीं होता। दूसरा सरकार इन खिलाड़ियों को न तो आर्थिक सहायता प्रदान करती है और न ही कोई संसाधन। स्कूलों में भी इन खेलों के प्रोत्साहन के लिए कदम उठाने चाहिए। इन खेलों का हर स्तर पर मैच करवाया जाना चाहिए ताकि बच्चे खुद इन खेलों से रूबरू हो पाएं।
जानवी बिट्ठल, जालंधर
सरकार पहल करे
हमें ऐसे खिलाड़ियों का सम्मान करना चाहिए, जिन्होंने संसाधनों की कमी को दरकिनार करते हुए स्वर्णिम इतिहास रचा। क्रिकेट के मुकाबले अन्य खेलों के प्रति देशवासी व सरकार गंभीर क्यों नहीं हैं? सरकार को सभी खेलों को समान प्रोत्साहन देना चाहिए। एक खिलाड़ी अपने देश का नाम रोशन करने के लिए अपना पूरा जीवन खेल के नाम कर देता है। लेकिन बदले में उसे पर्याप्त सम्मान और आर्थिक सहायता न मिले तो निराशा में डूब जाता है। इस कारण अन्य खिलाड़ी भी इन खेलों से दूरी बनाने लगते हैं। सरकार को अन्य खेलों के प्रोत्साहन के लिए सार्थक प्रयास करने चाहिए।
अमन सिंह, बरेली, उ.प्र.
प्रतिभाएं खोजें
क्रिकेट आईपीएल की तरह ही सरकार को खेल-नीति बनाकर अन्य खेलों के लिए भी राष्ट्रीय, राज्य और स्थानीय स्तर पर आयोजन कर प्रतिभाओं की खोज करनी चाहिए। इसके साथ ही तैयारी एवं प्रशिक्षण के लिए उचित आर्थिक सहयोग प्रदान करना चाहिए। इससे गरीबी के कारण संसाधनों की कमी से जूझ रहे खिलाड़ियों को अपनी आर्थिक स्थिति के कारण खेल को मजबूरन छोड़ना नहीं पड़ेगा। फिर ओलंपिक सहित सभी अंतर्राष्ट्रीय आयोजनों में भारत सुनहरे अक्षरों में अपना नाम अंकित करवा सकेगा। तभी अन्य खेलों के साथ आम लोग भी जुड़ेंगे।
विकास बिश्नोई, हिसार
आर्थिक संबल मिले
जहां एक तरफ क्रिकेटर करोड़ों कमा रहे हैं तो वहीं अन्य खेलों के खिलाड़ी घर भी मुश्किल से चला रहे हैं। क्रिकेट विश्व कप हाथ से गया तो इसका सबको बहुत दुख है लेकिन हिमा दास ने भारत को पांच गोल्ड मेडल जिताये, उसकी ख़ुशी की कोई लहर नहीं। आखिर सरकार अन्य खेलों को प्रोत्साहित क्यों नहीं कर रही है? सरकार को अन्य खेलों को प्रोत्साहित करने के लिए बड़े स्तर पर खेल प्रतियोगिताएं करवानी चाहिए। मीडिया अन्य खेलों के बारे में लोगों को अवगत करवाए। अच्छी नौकरियां देने के साथ-साथ उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत करनी होगी। मीडिया हिमा दास जैसे देश को गौरवान्वित करने वाले खिलाड़ियों को भी आगे लाये। हमें भी अन्य खेलों के खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करना होगा।
राघव जैन, जालंधर
पुरस्कृत पत्र
प्रतिभाओं को प्रोत्साहन दें
विडम्बना है कि ओलंपिक खेलों को भी उतनी मीडिया कवरेज नहीं मिलती, जितनी कि क्रिकेट के आईपीएल मैच को। निःसंदेह देश में अन्य खेलों को भी प्रोत्साहन की नितांत आवश्यकता है। इसके लिए आवश्यक है कि विद्यालय स्तर से ही खेल की बेहतर व्यवस्था की जाए तथा खिलाड़ियों की प्रतिभा को निखारा जाए। उन्हें बेहतर डाइट, कुशल कोच, ट्रेनिंग कैम्प, सुविधाओं से युक्त स्टेडियम मिले तथा खेल के प्रदर्शन के लिए व्यापक स्तर पर खेल प्रतियोगिताएं आयोजित हों। ऐसे खिलाड़ियों को सरकारी कार्यक्रमों व अभियानों का ब्रांड एंबेसडर बनाया जाए। मीडिया कवरेज सहित विज्ञापनों में भी इन्हें अवसर प्रदान किए जाए।
मंजर आलम, रामपुर डेहरू, मधेपुरा


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