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सावन बरसे

Posted On July - 21 - 2019

झूम-झूम के बरसे सावन
उमड़-घुमड़ के गरजे सावन।
गांव-बस्ती पड़ गये झूले
याद आये जिनको भूले।
पकड़ रस्सी झूले की हाथ
आओ अम्बर को हम छू लें।
देख बिजलियां हरषे सावन
झूम-झूम के बरसे सावन।
निखरी अपनी धरती रानी
क्यारी-क्यारी लगे सुहानी।
जहां तलक भी नजरें जाएं
भरा हुआ बस पानी-पानी।
मेघों से मिल लरजे सावन
झूम-झूम के बरसे सावन।
मोर-पपीहा, नाचे-गाये
मेढक भी तो शोर मचाये।
लेकर हल खेतों में हलधर
मन ही मन बड़े हर्षाये।
गीत नये नित रचते सावन
झूम-झूम के बरसे सावन।

गोविंद भारद्वाज


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