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यौन-उत्पीड़न के खिलाफ अधिकार

Posted On July - 7 - 2019

मधु गोयल

अक्सर देखा है जब भी कोई महिला या लड़की यौन उत्पीड़न की शिकार होती है, तब वह घटना सुर्खियां बनती है और हर कोई सरकार से कड़े फैसले लेने की गुज़ारिश करता दिखता है।  यौन-उत्पीड़न के खिलाफ महिलाओं के अधिकारों के बारे में विस्तार से बता रहे हैं दिल्ली हाईकोर्ट के एडवोकेट एन के अग्रवाल।

रेप की घटनाओं को रोकने के लिए क्या किया जा सकता है?
ध्यान से सोचा जाए तो रेप के लिए बहुत से कारक दोषी हैं। कहीं न कहीं तो हमारा समाज भी कुछ इस तरह का ताना-बाना लिये हुए हैंै। यह कानूनी रूप से नहीं, एक सलाह के तौर पर कहता हूं कि हमें अपने बच्चों को जागरूक करना होगा। उन्हें ऐसी एजुकेशन देनी होगी, बताना होगा कि इस तरह की घटनाओं से कैसे बचें।

ऐसी घटनाओं में दोषियों के लिए सज़ा के प्रावधान क्या हैं?
संसद में बलात्कारियों के लिए कड़ी से कड़ी सजा का प्रावधान, यानी मृत्युदंड विधेयक को पास कर दिया गया है।

क्या नया कानून पुराने कानून से बेहतर है?
दरअसल, इस नये कानून के अंतर्गत महिलाओं के प्रति उन सभी अपराधों को शामिल किया गया है, जिनका वह किसी न किसी मौके पर अक्सर शिकार होती आई हैं।

क्या महिलाएं इस प्रावधान से खुश हैं या उन्हें कोई फायदा है?
जी! महिलाओं ने इसको सकारात्मक रूप से स्वीकार किया है कि उन्हें यौन अपराध के मामलों में न्याय मिल पायेगा। इस विधेयक के अंतर्गत महिला के शरीर पर किसी भी प्रकार का आक्रमण या यौन प्रताड़ना को अपराध की श्रेणी में रखा गया है।

महिला किस धारा के अंतर्गत यौन उत्पीड़न का मामला दर्ज करवा सकती है?
पीड़ित महिला यानी ऐसी महिला, जिसके साथ किसी पुरुष ने जबरन शारीरिक संबंध बनाए हों, वह रेप की श्रेणी में आएगा और वह महिला आईपीसी की धारा 375 के अनुसार केस फाइल कर सकती है।

यदि कोई पुरुष किसी महिला के साथ अप्राकृतिक संबंध बनाता है तो क्या वह भी रेप की श्रेणी में आएगा?
जी बिल्कुल, यदि कोई पुरुष किसी महिला की मर्जी के खिलाफ गलत व्यवहार यानी उसके साथ जबरदस्ती करता है तो वह रेप है।

यदि पुरुष महिला के शरीर को गलत मंशा से छूता है तो क्या वह आईपीसी धारा 375 के अंतर्गत केस फाइल करवा सकती है?
हां, यदि कोई भी पुरुष महिला के शरीर के किसी भी अंग को गलत भावना से छूता है तो वह अवश्य ही रेप के दायरे में होगा।

प्राइवेट पार्ट्स से छेड़छाड़ रेप के दायरे में आएगा?
जी बिल्कुल, महिला के प्राइवेट पार्ट से छेड़छाड़ भी रेप के दायरे में है। सीधे-साधे शब्दों में महिला की सहमति के बिना बनाये गये संबंध रेप है।
यदि लड़की की उम्र 18 साल से कम है और वह शारीरिक संबंध बनाने के लिए सहमति दे देती है तो क्या वह संबंध रेप के दायरे से बाहर है?
लड़की की उम्र 18 साल से कम है और उसने शारीरिक संबंध बनाने में अपनी रज़ामंदी भी दे दी है तो भी उन संबंधों को रेप की श्रेणी में ही रखते हैं।

क्यों?
कानून 18 वर्ष से छोटी (नाबालिग) लड़की की सहमति को सहमति नहीं मानता।

यदि कोई महिला अपनी सहमति दे चुकी हो और बाद में रेप का केस फाइल करे?
ऐसे केस में देखना होता है कि क्या किसी शख्स ने उस महिला को बहला-फुसलाकर या डरा धमकाकर शारीरिक संबंध बनाए हैं। अगर यह बात साबित होती है तो वह अपराध है और वह रेप की श्रेणी में आता है।

किन-किन परिस्थितियों में महिला से बने संबंधों को रेप की श्रेणी में रख सकते हैं?
मान लीजिए महिला धोखे से उस शख्स के झांसे में आकर, अपना पति मान कर संबंध बनाती है जो कि उसका पति नहीं है या ऐसी परिस्थिति, जब उसकी सहमति ली गई तब उसकी दिमागी हालत ठीक नहीं थी या उसको किसी प्रकार का नशा दिया गया था, तो भी महिला रेप का केस दायर करा सकती है।

रेप की सज़ा के लिए कौन-कौन सी धाराएं हैं?
यदि लड़की की उम्र 12 साल से कम है, तब अपराधी को धारा 309 के अंतर्गत फांसी की सज़ा का प्रावधान है। पूरे मामले का ट्रायल दो महीने में पूरा किया जाएगा।
धारा 376 में कम से कम 10 साल और ज्यादा से ज्यादा उम्रकैद की सज़ा है। यदि रेप के दौरान महिला कोमा में चली जाती है तो धारा 376ए में दोषी को फांसी की सजा हो सकती है। धारा 376डी में 20 साल या उम्रभर के लिए जेल। सजा भुगतने के बाद अपराधी फिर से रेप करता है तो धारा 376ई के अंतर्गत उसे उम्रकैद से लेकर फांसी तक की सज़ा का प्रावधान कानून में है।


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