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मुसीबत में अपनों का साथ

Posted On July - 7 - 2019

मोनिका शर्मा
जीवन में कोई भी परेशानी पैदा हुई है तो उसका कोई न कोई कारण होगा ही। आमतौर पर तकलीफें, किसी अपने की नासमझी के कारण भी पैदा होती हैं। याद रखें कि उस समय जो कुछ भी गलत हुआ है या जो भी तकलीफदेह हालात बने हुए हैं, उनमें अपनी ऊर्जा अपनों को संभालने में लगाएं।
गलतियां याद न दिलाएं
बेहतर यही होता है कि ऐसे में नासमझी के चलते अगर रिश्तों में कोई दुविधापूर्ण स्थिति आ ही गई है तो बेवजह के सवाल न करें। गलतियां याद न दिलाएं। न ही ऐसे समय पर तानेबाजी न करें। कोई भी कटाक्ष कर उनका मन दुखाने की बजाय दुःख को कम करने वाला संवाद करें। ‘हमने तो पहले ही समझया था’ या ‘यह कैसी नासमझी कर दी’ जैसी बातें करना, ऐसे समय के लिए सही नहीं हैं। साथ देने का भाव, सकारात्मक सोच लिये हो। सबसे पहले उस समस्या से पार पाने के लिए मदद का हाथ बढ़ायें।
न करें बेवजह के सवाल
उस हालात को संभालने की ओर ध्यान दें जो हुआ है| पहले से ही उलझनों में फंसे रिश्तेदार के परिवार से बेवजह सवाल भी न करें। आपके प्रश्न उनके लिए नई दुविधाएं पैदा करते हैं। हो सकता है कि वे उस परिस्थति में किसी सवाल का जवाब देने की हालत में ही न हों| कोई अनहोनी होने या संकट में फंस जाने का असली कारण वे खुद भी नहीं समझ पा रहे हों। इसीलिए भूलकर भी उनकी पीड़ा बढ़ाने वाले प्रश्न न करें। आपका साथ इन हालातों में सहारा न दे सके तो कम से कम शिकायती सवाल करने वाला तो बिलकुल भी नहीं होना चाहिए|
मन से करें मदद
अपनों का साथ देते हुए हमेशा सहायता करना जताने का नहीं, निभाने का भाव लिये हो। मन से मदद का हाथ आगे बढ़ाएं। बीते समय की छोटी-छोटी बातों को लेकर उस समय कोई रंजिश न निकालें। न ही उस परिस्थिति में उनका मज़ाक बनाएं। कई बार, हर तरह से साथ दे रहे अपने भी अक्सर मन से ही साथ देने में पीछे रह जाते हैं। ऐसे मौके पर अपनेपन और खुले मन से साथ दें। स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानी हो, कोई दुर्घटना या रिश्तों में आये उतार-चढ़ाव, ऐसी कोई परेशानी नहीं, जिस पर साथ, संयम और हिम्मत से पार न पाया जा सके| दिल से साथ देते हुए अपनों को इन तकलीफों से बाहर निकालें।


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