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बेटियों को जीवनदान देने में हरियाणा से जगी उम्मीदें

Posted On July - 10 - 2019

अदिति टंडन/ट्रिन्यू
नयी दिल्ली, 9 जुलाई
बेटियों के जन्म पर माथे पर चिंता की लकीरें ले आने वाले हरियाणा प्रदेश के लोगों के तौर तरीके बेटियों के प्रति बदल रहे हैं। धीमे ही सही लेकिन लगातार स्थिति में सुधार लाते हुए हरियाणा देश भर में लिंगानुपात के मामले में अहम स्थान पर पहुंच गया है।
भारत के लिंगानुपात पर रजिस्ट्रार जनरल के डाटा के मुताबिक जन्म लेने वाले बच्चों के आंकड़ों के अनुसार हरियाणा ने पूरे उत्तर भारत में बेहतर प्रदर्शन किया है। जन्म के समय दर्ज लिंगानुपात के अनुसार वर्ष 2011 में प्रदेश में 1 हजार लड़कों पर 833 लड़कियां थीं, जोकि लिंगानुपात की सबसे खराब स्थिति थी। लेकिन रजिस्ट्रार जनरल आफ इंडिया की ओर से मुहैया कराए गए आंकड़ों के अनुसार 2016 में यह स्थिति एक हजार लड़कों पर 865 लड़कियों की हो गई। इस तरह से 32 अंकों का इजाफा हुआ। इस रिपोर्ट के अनुसार एक हजार लड़कों (उम्र 0 से 6 वर्ष) के आधार पर वर्ष 2018 में यह आंकड़ा 914 हो गया है।
पड़ोसी राज्यों की स्थिति
यह वास्तव में सबसे बेहतरीन प्रदर्शन है, जबकि हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में यह आंकड़ा क्रमश: 8 और 44 दर्ज किया गया। वर्ष 2011 में यह डाटा दर्ज किया गया। वर्ष 2011 में हिमाचल प्रदेश की स्थिति एक हजार लड़कों पर 918 लड़कियों की थी, जबकि वर्ष 2016 में वह 910 पर पहुंच गया। वहीं उत्तराखंड में एक हजार लड़कों पर वर्ष 2011 में 869 लड़कियां थीं, लेकिन वर्ष 2016 में यह आंकड़ा 825 पर पहुंच गया।
पंजाब में सुधार
इस दौरान पंजाब ने पांच अंकों का इजाफा किया है। वर्ष 2011 के रजिस्ट्रार जनरल आफ इंडिया के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में एक हजार लड़कों पर 852 लड़कियां थीं लेकिन वर्ष 2016 में यह आंकड़ा 857 हो गया। इसी प्रकार जम्मू-कश्मीर में वर्ष 2011 से 2016 के बीच एक हजार लड़कों पर आंकड़ा 913 और 914 ही रहा।
गौरतलब है कि हरियाणा सरकार की ओर से केंद्र को बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना के तहत भेजी रिपोर्ट में अहम सुधार की जानकारी दी गई है। बताया गया है कि यह सुधार बेटियों को बचाने के लिए बनाए कानून और भ्रूण की जांच रोकने के लिए उठाए गए कड़े कदमों की बदौलत हुआ है। साल 1994 में देश में 2122 मशीनें सील की गई थी, इस दौरान हरियाणा में 580 मशीनों को सील किया गया था।

कानून के मुताबिक कार्रवाई
हरियाणा में लिंगानुपात सुधरने के पीछे एक वजह यह भी बताई गई है कि राज्य सरकार ने लिंग निर्धारण रोधी कानून को महाराष्ट्र के बाद सबसे बेहतर तरीके से लागू किया है। पीएनडीटी कानून के तहत 1994 में देश भर में जहां 586 को दोषी ठहराया गया, इनमें 79 जहां महाराष्ट्र के मामले थे, वहीं 21-21 हरियाणा और राजस्थान में अंजाम दिए गए। स्वास्थ्य मंत्रालय के एक सूत्र के अनुसार उपलब्ध डाटा के अनुसार हरियाणा ने जो भी सुधार किए हैं, वे वर्ष 2011 के बाद से ही हैं। सजा मिलने के बाद सरकार ने 15 डॉक्टरों के लाइसेंस कैंसिल किए हैं, पूरे देश में हरियाणा तीसरा ऐसा राज्य है, जहां सबसे ज्यादा इस मामले में कोर्ट केस लंबित हैं।


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