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बीमारियां भी लाता है मानसून

Posted On July - 20 - 2019

मानसून में लगातार बारिश, संक्रमित पानी और दूषित खाद्य पदार्थों के ज़रिए कई तरह के रोगों की आशंका पैदा होती है। भीगने से सर्दी, जुकाम होना आम है। इसके अलावा पीलिया इस मौसम में तेज़ी से फैलता है। मच्छरों की ब्रीडिंग भी कई बीमारियां लाती हैं।

टाइफाइड
बरसात में टाइफाइड का खतरा भी रहता है। टाइफाइड एक संक्रामक बीमारी है, जिसमें तेज़ बुखार आता है। बुखार घटता-बढ़ता रहता है और कई दिनों तक बना रहता है। टाइफाइड ठीक होने के बाद भी संक्रमण व्‍यक्ति के पित्ताशय में बना रहता है, जो अन्य बीमारियों का खतरा पैदा कर सकता है। इसीलिये डॉक्टर टाइफाइड से ग्रस्‍त व्‍यक्ति को परिवार के अन्‍य सदस्‍यों से दूरी बनाने की सलाह देते हैं। इसे रोकने के लिए टीकाकरण बहुत ज़रूरी होता है। टाइफाइड से बचने के लिये बरसात के दिनों में लिक्विड डाइट भरपूर मात्रा में लेनी चाहिए।

हेपेटाइटिस-ए
हेपेटाइटिस-ए भी एक वायरल डिज़ीज़ है। यह बीमारी दूषित खाने, पानी और इस बीमारी से ग्रस्त व्यक्ति के संपर्क में आने से फैलती है। पीलिया, थकावट, भूख न लगना, मितली, हल्का बुखार, पीले रंग का यूरिन और सारे शरीर में खुजली इसके आम लक्षण हैं। इस बीमारी को रोकने के लिए टीकाकरण, हाइजेनिक फूड और साफ पानी का इस्‍तेमाल ज़रूरी है। मरीज को पूरा आराम और उच्च कैलोरी का आहार लेना चाहिए।

हैजा
हैज़ा खराब या दूषित पानी से फैलता है। बरसात में दूषित पानी की समस्‍या काफी बढ़ जाती है। इसके अलावा लगातार बारिश, जल-भराव, वातावरण में नमी, घर के अंदर और बाहर स्‍वच्‍छता की कमी रोग को फैलने में मदद करती है। हैज़ा होने पर रोगी को दस्त और उल्टियां अधिक आनी लगती हैं। पेट में दर्द, बेचैनी महसूस होती है और बहुत प्यास लगने लगती है। इससे बचाव के लिये टीकाकरण सबसे अच्‍छा उपाय है। इस टीके का असर करीब 6 महीने तक रहता है।

मलेरिया
मानसून के मौसम में बारिश की वजह से सड़कों या नालों में जमे हुए पानी में मच्छर पनपते रहते हैं, जिनमें से कुछ मलेरिया के मच्छर भी होते हैं। घर की टंकी में भी लार्वा और मच्छर मलेरिया का कारण बनते हैं। यह रोग होने पर बुखार, मांसपेशियों में दर्द और कंपकंपाना जैसे लक्षण दिखते हैं।
डेंगू
डेंगू का मच्छर साफ पानी में भी पैदा हो सकता है। डेंगू की बीमारी के लक्षण जोड़ों, शरीर में दर्द हो सकते हैं। ऐसे में आप पूरे कपड़े पहनकर ही रखें। पानी को हमेशा ढक कर रखें और आसपास पानी इकट्ठा न होने दें।

चिकनगुनिया
चिकनगुनिया भी मच्छरों के काटने से होता है। ऐसे मच्छर, जो रुके हुए पानी में ब्रीडिंग करते हैं और दिन में ही काटते हैं, इस रोग को फैलाते हैं। चिकनगुनिया में बुखार, जोड़ों में दर्द जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं।

मानसून की बूंदें गर्मी से राहत तो देती हैं लेकिन अगर ज़रा-सी भी लापरवाही हुई तो इस मौसम में बीमारियों की आफत भी बरसती है। बारिश की फुहार किसे नहीं भाती ? लेकिन इस मौसम में सही खानपान और बीमारियों से बचाव बेहद ज़रूरी हो जाता है। बरसात में वायरल बुखार और स्किन एलर्जी जैसे रोग आम हैं, लेकिन कुछ ऐसे संक्रामक रोग भी हैं, जो इसी मौसम में ज्यादा तंग करते हैं। इससे पहले कि ये रोग पनपें, इनसे बचाव के उपाय कर लेना आवश्यक है।

टिप्स

  • इस मौसम में भारी भोजन, मसलन तले हुए चटपटे स्वाद वाले पदार्थ नहीं खाने चाहिए।
  • बरसात में हल्के कपड़े, यानी नायलॉन, सिंथेटिक जैसे फैब्रिक पहनने चाहिए। यह गीले होने पर जल्दी सूख जाते हैं।
  • घर को साफ-सुथरा रखने के लिये फिनाइल का प्रयोग करें ।
  • खाने-पीने के सामान को कभी खुला न छोड़ें।
  • बच्चों को टाइफाइड व हेपेटाइटिस का वैक्सीन लगवाएं।

रोग प्रतिरोधक आहार
इस मौसम में हल्का व जल्दी पचने वाला आहार लेना चाहिए। मूंग की छिलके वाली दाल इस मौसम के लिये मुफीद मानी जाती है। खान-पान में तोरई, लौकी का सेवन फायदेमंद माना जाता है। इसके अलावा किचन में रखे मसाले व ड्राई फ्रूट इम्युनिटी को मजबूत बनाने के लिये अवश्य इस्तेमाल में लाने चाहिए।

हरी मूंग और काला चना: यह दोनों दालें प्रोटीन, फाइबर और विटामिन-बी के अलावा पोटेशियम और मैग्नेशियम से भरपूर होती हैं। इन्हें दाल के रूप में, अंकुरित अनाज (स्प्राउट) के तौर पर खान-पान में शामिल करना लाभादायक माना जाता है। ये दालें आंतों को साफ रखती हैं, जिससे शरीर के दूषित तत्व बाहर निकल जाते हैं और किडनी के फिल्टरेशन पर जोर नहीं पड़ता। इम्यून सिस्टम भी मजबूत होता है। कब्ज, हाई बीपी, वेट लॉस में भी कारगर हैं।
मेथी दाना: फाइबर और कई विटामिन्स, मिनरल्स से भरा मेथी दाना खाने में मसालों के तौर पर शामिल करें। इससे कई पोषक तत्वों की कमी दूर हो जाती है। इसमें प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, आयरन, कैल्शियम, पोटेशियम, मैग्नीशियम, कॉपर, मैगनीज और जिंक के साथ ही विटामिन-बी6, विटामिन-ए, विटामिन-सी, फोलिक एसिड, थायमिन, राइबोफ्लेविन तथा नियासिन पाया
जाता है।
मुनक्का: आमतौर पर हर घर में पाया जाता है मुन्नका। इसे आयुर्वेदिक औषधि कहा जाता है। ये स्टेमिना बढ़ाने के साथ इम्यून सिस्टम को भी मजबूत बनाता है। इसमें मौजूद मैग्नीशियम, पोटेशियम और आयरन, एनीमिया, स्टोन और कब्ज जैसी दिक्कतों से राहत दिलाते हैं।
अलसी : ओमेगा-3
फैटी एसिड से भरा अलसी किसी दवा से कम नहीं है। इसे लेना केवल शरीर ही नहीं, बल्कि शरीर की नसों तक को खोलने का काम करता है। अलसी न्यूरो-डिजनरेटिव बीमारियों के साथ ही कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने वाला होता है।


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