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फ्लैशबैक

Posted On July - 6 - 2019

हिंदी फीचर फिल्म : एक बार मुस्कुरा दो

शा. रा.
वर्ष 1972 में रिलीज फिल्म ‘एक बार मुस्कुरा दो’ दो कारणों से बॉक्स ऑफिस पर टिकी रही। एक तो ओपी नैयर का सुरीला संगीत और दूसरा इसमें करीब सारे के सारे किरदार निभाने वाले घर के ही लोग थे। कुल मिलाकर यह होम प्रोक्शन थी। उस जमाने में बॉलीवुड के अधिकांश एक्टर्स एक्टर दर्शकों के रोल मॉडल हुआ करते थे और उन्हें एकसाथ पर्दे पर देखना मानो उनका समपना सच होने सरीखा था। फ्लैश बैक के पाठक भी बॉलीवुड के इस परिवार की पृष्ठभूमि के बारे में जानना चाहेंगे। ताजा-ताजा अभिनय के क्षेत्र में कूदी इस फिल्म की हिरोइन दरअसल फिल्म के प्रोड्यूसर शोमू मुखर्जी की पत्नी है, जिसकी बेटी काजोल ने जाने-माने एक्टर अजय देवगर से शादी की है। उसने स्वयं भी ‘दिल वाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ सरीखी फिल्में बॉलीवुड को दी हैं। ‘एक बार मुस्कुरा दो’ फिल्म के हीरो जॉय मुखर्जी जो बॉलीवुड के रोमांटिक हीरो के रूप में जाने जाते हैं, शोमू मुखर्जी के भाई हैं। फिल्म में एक अन्य साइड हीरो का रोल करने वाले देव मुखर्जी भी शोमू मुखर्जी का भाई है। ये चारों भाई शशाधर मुखर्जी के बेटे हैं। यह शशाधर मुखर्जी वही हैं, जिन्होंने अशोक कार के साथ मिलकर फिल्मीस्तान स्टूडियो शुरू किया था। इस प्रोजेक्ट में संगीतकार मदन मोहन के पिता राय बहादुर चुन्न लाल भी हिस्सेदार थे। बाद में शशाधर ने स्वतंत्र रूप से काम करने की गरज से फिल्मालय स्टूडियो की स्थापना की, जिसने जॉय मुखर्जी अभिनीत दिल दे के देखो, एक मुसाफिर एक हसीना, लव इन शिमला और लीडर जैसी फिल्में प्रोड्यूस की, जिसमें उनके बड़े भाई के बेटे रवीन्द्र मोहन मुखर्जी के बेटे राम मुखर्जी ने प्रोडक्शन भी संभाला था और कई फिल्मों को निर्देशित भी किया था। पाठक रानी मुखर्जी को तो जानते ही होंगे, राम मुखर्जी की ही बेटी हैं। फिल्म की स्टोरी सुनाने से पहले पाठकों को बता दें कि फिल्म के गीत गाने वाले किशोर कुमार भी शोमू मुखर्जी के रिश्तेदार ही हैं। दरअसल, अशोक कुमार व किशोर कुमार की बहन सतीदेवी शोमू मुखर्जी की मां है। फिल्म में तनुजा के अलावा वयोवृद्ध नायिका शोभना सामर्थ हैं। मतलब पूरा का पूरा परिवार है फिल्म में, किसी बाहर वाले की क्या ज़रूरत है?
जिस फिल्म का संगीत ओपी नैयर ने दिया हो, वह फिल्म भले ही हिट न हो, फ्लाप नहीं हो सकती। इस फिल्म के थ भी कुछ ऐसा हुआ। एक से बढ़कर एक गीत। खासकर ‘कितने अटल थे तेरे इरादे’ किशोर कुमार का गीत अच्छे गीतों में से एक है। यह दिल को छू लेने वाला गीत है। ‘एक बार मुस्कुरा दो’ फिल्म एक ‘लव ट्रायंगल’ है। सत्तर के दशक के आसपास की मूवीज में लव ट्रायंगल फिल्म की कामयाबी का अहम कारण हुआ करता था। इसकी कहानी कुछ-कुछ ‘संगम’ फिल्म से मेल खाती है। यह फिल्म हालांकि ‘दिल दे के देखो’ जैसी फिल्मों सरीखी हिट नहीं थी लेकिन ऊबाऊ भी नहीं थी। दर्शक अंत तक कहानी से बंधा रहता है। इसमें तनुजा बेहद खूबसूरत लग रही हैं। अशोक बने जॉय मुखर्जी और दिलीप बने देव मुखर्जी बचपन के दोस्त हैं। अशोक एक अमीर बाप का बेटा है जबकि दिलीप छोटी-मोटी नौकरी करके अपनी आजीविका कमाता है। उसे माला बनी तनुजा से प्यार हो जाता है लेकिन माला के पिता को अपनी बेटी का किसी गरीब लड़के से इश्क कैसे गवारा हो सकता है। इसलिए वह टालमटोल करता है और लड़के के सामने शर्त रख देता है कि वह पहले इस काबिल बन जाए कि उसमें माला का हाथ मांगने की हैसियत हो। प्यार जो न करवाए वह थोड़ा है। दिलीप बड़ा आदमी बनने की खातिर किसी दूसरे शहर में (मानो दूसरा शहर कामयाबी की गारंटी हो) चला जाता है। जब वापस लौटता है तो यह देखकर उसका दिल टूट जाता है कि माला ने उसका थोड़ा भी इंतजार नहीं किया और अशोक नामक अमीरजादे से शादी कर ली। माला ने अशोक से शादी क्यों की? यह तो फिल्म देखने पर ही पता चलेगा।

निर्माण टीम
प्रोड्यूसर : शोमू मुखर्जी
निर्देशक : राम मुखर्जी
पटकथा व संवाद लेखन : शोमू मुखर्जी
गीतकार : इन्दीवर, एचएस बिहारी
संगीतकार : ओपी नैयर
सिनेमैटोग्राफर : मोहन केशवानी
सितारे : तनुजा, जॉय मुखर्जी, देव मुखर्जी इफ्तिखार, टुनटुन, शोभना सामर्थ, राजेंद्रनाथ

गीत
चेहरे से जरा आंचल : मुकेश, आशा भोंसले
एक बार मुस्कुरा दो : आशा भोंसले, किशोर कुमार
कितने अटल थे मेरे इरादे : किशोर कुमार, आशा भोंसले
रूप तेरा ऐसा : किशोर कुमार
सवेरे का सूरज : किशोर कुमार
यह दिल लेकर नजराना : मुकेश, आशा भोंसले
जमाने की आंखों ने : मुहम्मद रफी


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