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पेंसिल-कॉपी का आनंद

Posted On July - 21 - 2019

राघव जैन
स्कूल का वह पहला दिन, हर बच्चे के लिए बहुत सारी यादें संजोकर रखता है। मुझे याद है उस दिन, घर में एक अलग-सा माहौल था। स्कूल की वर्दी पहनाकर मुझे कहा गया कि तेरी फोटो खिचवाएंगे और फिर स्कूल जायेंगे। मैं खुशी-खुशी मम्मी-पापा के साथ घर से चल पड़ा। मेरी सबसे पहले स्टूडियो में तस्वीरें निकालीं और उसके बाद बहुत सारी खाने-पीने की चीज़ें दिलाईं। इसी बीच, मुझे स्कूल वाली बात भूल चुकी थी। फिर वह समय भी आया जब मम्मी मुझे अपने साथ स्कूल ले गयीं और कहा कि मैं तेरे पास ही रहूंगी। मम्मी मेरे साथ कक्षा में गईं और वहां मुझे अध्यापक के पास छोड़ दिया और चली गईं। मैं ज़ोर-ज़ोर से रोने लगा इतना ज़ोर से कि जैसे मां को मेरी आवाज़ घर में सुन जाये। इसी बीच अध्यापक ने मुझे चुप कराया और बेंच पर बैठा दिया। उन्होंने प्यार से हमें गणित पढ़ाना शुरू किया। उस दिन पहली बार पेंसिल और कॉपी के इस्तेमाल को अहसास किया, जो आनंद देने वाला था। सबसे ज्यादा मज़ा तो आधी छुट्टी के समय आया जब मेरे सामने हरियाली वाला मैदान था। उस दिन अपने नये साथियों के साथ खूब मस्ती की। उसके बाद मैं घर जाने का ही इंतज़ार कर रहा था। पहले दिन हर बच्चा एक पाठ तो जरूर सीखता है कि लालच बुरी बला है, जैसे कि मैं तस्वीर और खाने-पीने की लालच में आ गया था।
आख़िरकार जब छुट्टी हुई तो मां मुझे लेने आयीं लेकिन मैं तब नराज़ नहीं था। लेकिन हां, मन में उस समय अगले दिन स्कूल जाने का एक डर ज़रूर था। मैंने बचपन में बहुत सारे बहाने बनाकर स्कूल की छुट्टियां की हैं। आज जब बचपन की तस्वीरें देखता हूं तो मैं हर तस्वीर में रो रहा हूं। एक बार घर वालों ने पूछा ऐसा क्यों हैं। तब मैंने उनको स्कूल के पहले दिन वाली घटना याद कराई कि कैसे आप मुझे तस्वीर और खाने-पीने का लालच देकर स्कूल ले गए थे। तभी से इस बात का डर बैठ गया था। इसीलिए हर तस्वीर में मेरा रोने वाला चेहरा है। ये सुनकर सभी हंस पड़े।


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