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पंजाब से वार्ता में केंद्र को मध्यस्थ बनाएगा हरियाणा

Posted On July - 11 - 2019

चंडीगढ़, 10 जुलाई (ट्रिन्यू)
हरियाणा और पंजाब के बीच चल रहे सतलुत यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर विवाद में अब नया मोड़ आ गया है। सुप्रीमकोर्ट द्वारा पहले ही हरियाणा के हक में फैसला सुनाया जा चुका है। मंगलवार को सुप्रीमकोर्ट में हुई सुनवाई के बाद अदालत ने केंद्र सरकार के साथ दोनों राज्यों पंजाब व हरियाणा को बैठक कर नहर निर्माण की दिशा में कदम आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
सुप्रीमकोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई 3 सितंबर को होनी है। इससे पहले केंद्र, हरियाणा व पंजाब के बीच बैठक होने की संभावना है। पंजाब में कैप्टन अमरेंद्र सिंह के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार पूरी तरह से एसवाईएल निर्माण के खिलाफ है। इससे पूर्व, प्रकाश सिंह बादल के नेतृत्व वाली अकाली-भाजपा गठबंधन सरकार ने भी हरियाणा को पानी देने से इनकार कर दिया था। पंजाब से अलग होने के बाद से ही हरियाणा पानी की मांग करता आ रहा है।
सुप्रीमकोर्ट के ताजा निर्देशों पर सीएम मनोहर लाल खट्टर ने कैबिनेट की साप्ताहिक बैठक में अपने कैबिनेट सहयोगियों से चर्चा की। बुधवार को बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी देने के लिए मीडिया से रूबरू हुए समाज कल्याण राज्यमंत्री कृष्ण कुमार बेदी ने कहा कि एसवाईएल हरियाणा की प्राथमिकताओं में टॉप एजेंडे पर है। कैबिनेट में फैसला लिया गया है कि राज्य सरकार इस मुद्दे पर पंजाब से सीधे बात करने की बजाय केंद्र से मध्यस्थता कराएगी। बताते हैं कि इस मुद्दे पर सीएम जल्द ही केंद्रीय जल संसाधन मंत्री सहित अन्य वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात कर सकते हैं। सुप्रीमकोर्ट के ताजा निर्देशों पर राज्य सरकार ने एडवोकेट जनरल से भी राय मांगी है।

शाह से भी होगी चर्चा
माना जा रहा है कि इस मुद्दे पर सीएम केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से भी विचार-विमर्श करें। सुप्रीमकोर्ट अपने फैसले में स्पष्ट कर चुका है कि पंजाब के हिस्से में नहर का निर्माण होना चाहिए। इस फैसले को लागू करवाने के लिए हरियाणा ने सुप्रीमकोर्ट में याचिका दायर की हुई है।

एजेंसी का फैसला भी केंद्र के हाथ

कृष्ण कुमार बेदी

एक सवाल के जवाब में बेदी ने कहा कि दोनों राज्यों के साथ बातचीत केंद्र की कौनसी एजेंसी करेगी, इसका फैसला केंद्र के स्तर पर ही होगा। उनका कहना है कि पानी पर हरियाणा का अधिकार है और यह पानी एसवाईएल के जरिये ही हरियाणा में आना है। ऐसे में सरकार की हरसंभव कोशिश रहेगी कि जल्द नहर का निर्माण पूरा करवाया जाए। यहां बता दें कि पिछले 3 साल से लगातार खट्टर सरकार नहर के लिए 100 करोड़ का बजट रखती आ रही है।


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