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चौमासा 12 से, मंगल कार्यों को विराम

Posted On July - 7 - 2019

भगवान विष्णु का विश्राम

मदन गुप्ता सपाटू
आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी बेहद खास है। देवशयनी कहलाने वाली यह एकादशी इस बार 12 जुलाई को है। पुराणों में कहा गया है कि इस एकादशी की रात भगवान विष्णु क्षीरसागर व पाताल में 4 माह के विश्राम के लिए चले जाते हैं। इसे चातुर्मास या चौमासा की शुरुआत भी कहते हैं। धार्मिक मान्यता है कि चातुर्मास में विवाह, गृह प्रवेश जैसे मंगल कार्य नहीं किये जाते। इसके पीछे कारण यह है कि इस दौरान लोग पूरी तरह ईश्वर की भक्ति में डूबे रहें, सिर्फ पूजा-अर्चना करें। बदलते मौसम में जब शरीर में रोगों का मुकाबला करने की क्षमता यानी प्रतिरोधक शक्ति बेहद कम होती है, तब आध्यात्मिक शक्ति प्राप्ति के लिए व्रत-उपवास करना और ईश्वर की आराधना करना बेहद लाभदायक माना गया है।
देवशयनी एकादशी के दिन व्रत रखने विधान है। माना जाता है कि यह व्रत रखने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं, पापों का नाश होता है। इस दिन भगवान विष्णु की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।

मदन गुप्ता सपाटू

इस व्रत की शुरुआत दशमी तिथि की रात से ही हो जाती है। दशमी तिथि की रात के भोजन में नमक का प्रयोग नहीं करना चाहिए। अगली सुबह व्रत का संकल्प करके भगवान विष्णु की प्रतिमा को आसन पर आसीन करें। पंचामृत से स्नान करवायें। धूप, दीप, पुष्पोंं से पूजा करें। भगवान को पान, सुपारी अर्पित करें। शास्त्रों में व्रत के जो सामान्य नियम बताये गए हैं, उनका दृढ़ता से पालन करना चाहिए। व्रत का पारण अगले दिन सूर्योदय के बाद किया जाता है। एकादशी व्रत का पारण हरि वासर के दौरान नहीं करना चाहिए।

एकादशी तिथि प्रारम्भ : 11 जुलाई रात 01:02 बजे
एकादशी तिथि समाप्त : 12 जुलाई रात 12:31 बजे
व्रत खोलने का समय : 13 जुलाई सुबह 6:30 से 08:19 बजे तक
पारण तिथि 13 जुलाई को हरि वासर समाप्त : सुबह 6:30 बजे


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