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गरीबी, भुखमरी, शिक्षा और स्वास्थ्य सबसे बड़ी चुनौती

Posted On July - 15 - 2019

आफत बनती  आबादी

ज्ञानेन्द्र रावत

आज बढ़ती आबादी का विकराल संकट समूची दुनिया के लिए चुनौती है। बढ़ती आबादी सीमित संसाधनों पर बोझ बनती जा रही है। 1987 में दुनिया की आबादी 5 अरब थी। 2018 में यह बढ़कर 7.8 अरब हो गई। इसमें हर साल अस्सी लाख की दर से बढ़ोतरी हो रही है। 2050 तक इसके 9.8 अरब होने की संभावना है। माना जा रहा है कि इस सदी के अंत तक दुनिया की आबादी साढ़े 12 अरब का आंकड़ा पार कर जायेगी। यह भी सत्य है कि वर्तमान तकनीकी बदलाव के दौर में हम कोई आशंका-संभावना ही व्यक्त कर सकते हैं, भविष्यवाणी नहीं। सिवाय इसके कि आने वाले 31 साल में दुनिया में भीड़ काफी बढ़ जायेगी। आबादी का आंकड़ा 9 अरब को पार कर जायेगा। इस सच्चाई को भी अनदेखा नहीं किया जा सकता कि आबादी का गणित हमेशा से ही दुनिया को बदलने में अपनी अहम भूमिका निभाता रहा है। इसके कारण दुनिया को समय-समय पर चुनौतियाें का सामना करना पड़ा है। बढ़ती आबादी का खाद्य संकट गहराने में योगदान जगजाहिर है। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते शहरीकरण के चलते लागोस, साओ पाउलो और दिल्ली जैसे कई महानगर बनेंगे। जाहिर सी बात है कि इसका दबाव पर्यावरण पर पड़ेगा।
उस स्थिति में खतरा और भी बढ़ जाता है, जब पर्यावरण प्रदूषण इतने खतरनाक स्तर तक पहुंच चुका है, जिसके कारण प्राकृतिक संसाधन खत्म होने के कगार पर पहुंच गए हैं। भूजल, नदी जल और वायु सभी भयावह स्तर तक प्रदूषित हैं। पीने का साफ पानी सपना बनता जा रहा है। व्यावसायिक व निजी हितों की खातिर भूजल का बेतहाशा अंधाधुंध दोहन जारी है। बिना यह सोचे कि जब यह भी खत्म हो गया, तब क्या होगा?
पिछले महीने जारी संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में कहा गया है कि 2050 तक जिन 9 देशों में दुनिया की आधी से ज्यादा आबादी की बढ़ोतरी होगी, उनमें भारत शीर्ष पर है। उस सूची में भारत के बाद नाइजीरिया, पाकिस्तान, डेमोक्रेटिक रिपब्लिकन आॅफ कांगो, इथियोपिया, तंजानिया, इंडोनेशिया, मिस्र और अमरिका हैं। इन देशों को बूढ़ी होती आबादी की चुनौतियों से भी जूझना होगा। संयुक्त राष्ट्र के आर्थिक व सामाजिक मामलों के अवर महासचिव लियु झेनमिन ने कहा है कि सबसे तेज गति से आबादी अधिकांश मामलों में गरीब देशों में बढ़ रही है। यहां गरीबी, भुखमरी, कुपोषण, असमानता और शिक्षा व स्वास्थ्य की आम आदमी तक पहुंच न होना सबसे बड़ी चुनौती है। भारत भी इन चुनौतियों से जूझ रहा है। उसका परिणाम है कि भारत विश्व भुखमरी सूचकांक में दुनिया के 119 देशों में 103वें स्थान पर है। इसमें दो राय नहीं कि भारत की कई समस्याओं की जड़ में आबादी की अहम भूमिका है। इसमें प्रशासनिक और नेतृत्व की विफलता का बड़ा योगदान है। हमारे यहां जनसंख्या नियंत्रण के प्रयासों को नाकाम करने में जाति-धर्म के नाम पर अपनी रोटी सेंकने वाले स्वयंभू ठेकेदारों और राजनैतिक दलों ने कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी है। कारण, इसी के बलबूते वे अपनी वोट की राजनीति कर भीड़ के जरिये सत्ता के शीर्ष पर पहुंचते रहे हैं। इन पर अंकुश आज तक नहीं लग सका है। जनसंख्या नियंत्रण की दिशा में एक कानून का अभाव हमारे राजनीतिक नेतृत्व की विफलता का सबूत है। हमारे यहां वोट बैंक की राजनीति सरकारों को कठिन निर्णय लेने से रोकती रही है। लोक कल्याणकारी सरकारों का दायित्व है कि वह देशहित को सर्वोपरि मानकर संभावनाओं के व्यापक हित में धर्म-जाति के मोह को त्याग कठिन निर्णय लें यह जानते-समझते हुए कि जनसंख्या वृद्धि, राष्ट्र के सर्वांगीण विकास में सबसे बड़ा अभिशाप है। इसलिए अब समय आ गया है कि हम इस मामले में चीन से सबक लें। जनसंख्या नियंत्रण की प्रभावी नीति के बिना रोजगार, भोजन, आवास, चिकित्सा, शिक्षा सहित अन्य समस्याओं से निपटना आसान नहीं है। अब जनसंख्या वृद्धि का इलाज बेहद जरूरी है। यह गर्व की बात है कि वर्तमान में देश की सरकार बहुमत वाली सरकार है। उससे अपेक्षा यही है कि वह चीन की तरह इस दिशा में पहल करे। यदि ऐसा नहीं हुआ तो दुनिया के मशहूर वैज्ञानिक स्टीफन हाॅकिंग की चेतावनी आने वाले दिनों में सही साबित होगी कि पृथ्वी पर टिके रहने में हमारी प्रजाति का कोई दीर्घकालिक भविष्य नहीं है। यदि मनुष्य  बचे रहना चाहता है तो उसे 200  से 500 साल के अंदर  पृथ्वी को छोड़कर अंतरिक्ष में नया ठिकाना खोज लेना होगा। तभी कुछ बेहतर भविष्य की उम्मीद की जा सकती है, अन्यथा नहीं।

2027 तक सबसे ज्यादा होगी आबादी
इस समय दुनिया में 143 करोड़ की आबादी के साथ चीन शीर्ष पर है, जबकि भारत 140 करोड़ के साथ दूसरे पायदान पर। परिवार नियोजन कार्यक्रमों का जो हश्र है उससे इन आंकड़ों में हाल-फिलहाल बदलाव की उम्मीद नहीं दिखती। आने वाले 8 साल यानी 2027 में भारत चीन को पीछे छोड़ते हुए सबसे बड़ी आबादी वाला देश बन जायेगा। आने वाले 31 सालों में भारत की आबादी में 27 करोड़ 30 लाख लोगों का इजाफा होगा। सदी के अंत तक देश की आबादी का आंकड़ा 150 करोड़ हो जायेगा। कुछ विद्वान यह आंकड़ा 2 अरब 70 करोड़ मानते हैं।

भुखमरी की स्थिति चिंताजनक
वेल्थ हंगर हिल्फे एंड कंसर्न वर्ल्डवाइड द्वारा तैयार संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत दुनिया के उन 45 देशों में शामिल है, जहां भुखमरी की स्थिति काफी गंभीर है। गौरतलब है कि यह आकलन अल्पपोषण, बालमृत्यु, 5 साल तक के कमजोर बच्चे और बच्चों के अवरुद्ध शारीरिक विकास के मानदंडों के आधार पर किया गया, जिसमें भारत अपने पड़ोसियों- चीन 25वें स्थान, नेपाल 72वें, म्यांमार 68वें, श्रीलंका 67वें और बांग्लादेश 86वें स्थान से भी पीछे है।


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