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किलोमीटर स्कीम, स्कॉलरशिप घोटालों की जद में 2 मंत्रालय

Posted On July - 11 - 2019

करण दलाल

चंडीगढ़, 10 जुलाई (ट्रिन्यू)
हरियाणा में आम लोगों से जुड़े 2 बड़े मंत्रालय कथित घोटालों की जद में आ चुके हैं। परिवहन विभाग में किलोमीटर योजना के तहत प्राइवेट कंपनियों की बस हॉयर करने के अलावा समाज कल्याण मंत्रालय में हुए स्कॉलरशिप घोटालों को अब विपक्ष ने भी बड़ा मुद्दा बना लिया है। विधानसभा के आगामी मानूसन सत्र में भी इन दोनों कथित घोटालों पर बड़ा हंगामा होने के आसार हैं। बेशक, सरकार दोनों ही मामलों की स्टेट विजिलेंस से जांच शुरू करवा चुकी है, लेकिन कर्मचारी संगठन और विपक्षी दल सीबीआई या फिर हाईकोर्ट के सिटिंग जज से जांच की मांग कर रहे हैं।
हरियाणा कैबिनेट की अनौपचारिक बैठक में भी इन दोनों मामलों पर चर्चा हो चुकी है। सूत्रों का कहना है कि खुद सीएम के निर्देशों पर ही दोनों मामलों की विजिलेंस जांच के आदेश दिए गए। यही नहीं, सीएम इन दोनों कथित घोटालों को लेकर इतने गंभीर हैं कि उन्होंने हर 15 दिन में विजिलेंस को जांच की स्टेट्स रिपोर्ट देने के आदेश दिए हुए हैं। किमी योजना शुरू से ही विवादों में रही है। विभाग के कुछ अधिकारियों पर निजी कंपनियों के साथ मिलीभगत करने के आरोप भी कर्मचारी संगठन लगाते रहे हैं।
रोडवेज में प्राइवेट बस हायर करने में धांधली
इसी मुद्दे को लेकर पलवल से कांग्रेस विधायक व पूर्व मंत्री कर्ण सिंह दलाल ने बुधवार को चंडीगढ़ में प्रेस कांफ्रेंस कर कहा कि प्राइवेट बस हॉयर करने में लगभग 1600 करोड़ रुपए का घोटाला किया गया। दलाल ने कहा, मैंने इस मामले की जांच सीबीआई या फिर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के किसी सिटिंग जज से करवाने के लिए राज्यपाल को पत्र भी लिखा है। मीडिया को दस्तावेज सौंपते हुए दलाल ने कहा कि रोडवेज कर्मचारियों की भावनाओं के खिलाफ जाकर राजस्व को नुकसान पहुंचाने की कोशिश सरकार ने की। उन्होंने कहा कि परिवहन विभाग ने 2018 में किमी योजना के लिए डिपो स्तर पर 700 नॉन-एसी बस हॉयर करने के लिए टेंडर जारी किए। 53 लोगों की तरफ से इसमें बिडिंग की गई। विभाग की कमेटी के सामने यह मामला आया और उसके बाद डिपो स्तर पर रेट तय किए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि गड़बड़ियां 510 बसों के मामले में हुई। इससे विभाग को सालाना 165 करोड़ रुपए का नुकसान होगा। इस तरह इस गड़बड़ी को दस साल के हिसाब से देखा जाए तो यह करीब 1600 करोड़ रुपये का घोटाला बनता है। दलाल ने कहा कि उन्हें विजिलेंस ने पूछताछ में शामिल किया था। विजिलेंस को उन्होंने कहा है कि जब बड़े लोग इस घोटाले में शामिल हैं तो जांच किस बात की चल रही है।
पीछे हटने को राजी नहीं कर्मचारी
इधर रोडवेज कर्मचारियों का दो-टूक कहना है कि जब तक सरकार किलोमीटर योजना को वापस नहीं लेती उनका आंदोलन जारी रहेगा। हरियाणा रोडवेज कर्मचारी तालमेल कमेटी के वरिष्ठ नेता इंद्र सिंह बधाना, सरबत सिंह पूनिया, वीरेंद्र सिंह धनखड़, पहल सिंह तंवर, दलबीर किरमारा, आजाद गिल, अनूप सहरावत व दिनेश हुड्डा ने संयुक्त तौर पर कहा कि प्रदेश की जनता को प्राइवेट बस नहीं बल्कि सरकारी बसों का जरूरत है। प्राइवेट बसों को हॉयर करके सरकार विभाग का ही निजीकरण करना चाहती है। उन्होंने कहा कि कर्मचारी पहले दिन से इस योजना के खिलाफ थे। यह भी बता दिया गया था कि इस योजना के नाम पर करोड़ों रुपये का घोटाला किया जा रहा है, लेकिन अब जब सच्चाई सामने आई तो विजिलेंस से जांच करवाई जा रही है।
आईएएस वर्मा ने उजागर किया स्कॉलरशिप मामला
वहीं दूसरी ओर, अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग में स्कॉलरशिप के नाम पर 18 करोड़ रुपए का घोटाला हुआ है। विभाग के निदेशक रहते हुए आईएएस अधिकारी संजीव वर्मा ने इसका पर्दाफाश किया। पहले उन्होंने 4 करोड़ रुपये का घोटाला पकड़ा। इस मामले में एफआईआर के लिए उन्होंने चंडीगढ़ पुलिस को पत्र लिखा। चंडीगढ़ पुलिस ने जब कई दिनों तक एफआईआर दर्ज नहीं की तो वर्मा ने कहा कि अगर पुलिस ने एक्शन नहीं लिया तो वे पुलिस मुख्यालय के बाहर सत्याग्रह करेंगे। इसके बाद जाकर पर्चा दर्ज हुआ। इसके बाद उन्होंने स्कॉलरशिप का ही 14 करोड़ रुपए का और घोटाला पकड़ा। इस मामले की भी उन्होंने उच्च स्तरीय जांच की सिफारिश की। हालांकि यह घोटाला उजागर होने के कुछ दिनों बाद ही संजीव वर्मा को विभाग से हटा दिया गया। दरअसल, स्कॉलरशिप घोटाले के पीछे पूरा रैकेट काम कर रहा है। अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों के आधार कार्ड नंबर बदल कर इस घोटाले को अंजाम दिया गया। इसी तरह का एक बड़ा घोटाला हिमाचल प्रदेश में भी हो चुका है और इसके तार भी हरियाणा से जुड़े हुए हैं। वर्मा की रिपोर्ट के अनुसार, अकेले सोनीपत में 352 छात्र-छात्राओं के लिए स्वीकृत साढ़े तीन करोड़ रुपए की छात्रवृत्ति अधिकारी डकार गए। विभाग की चार सदस्यीय जांच कमेटी की रिपोर्ट के बाद संजीव वर्मा ने पांच कर्मचारियों को निलंबित करते हुए दो अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और पूरे मामले की विजिलेंस जांच की सिफारिश की थी। यह घोटाला हरियाणा विधानसभा की पब्लिक अकाउंट कमेटी (पीएसी) के पास भी लंबित है। कमेटी केवल 2016 तक के कथित घोटाले की सीबीआई जांच को तैयार थी लेकिन संजीव वर्मा चाहते थे कि 2019 तक के मामलों को जांच में शामिल किया जाए।
सुनिए क्या कहते हैं विभाग के मंत्री
“स्कॉलरशिप मामले को लेकर खुद सीएम ने विजिलेंस ने जांच करवाने के आदेश दिए। यह मामला पहले ही सीएम साहब के संज्ञान में आ चुका था और उनके ही निर्देशों पर विभाग के निदेशक रहते हुए संजीव वर्मा ने इस मामले में एफआईआर करवाने की सिफारिश की थी। इसी तरह से रोडवेज विभाग में किमी योजना की भी स्टेट विजिलेंस ब्यूरो जांच कर रही है। जब जांच चल रही है तो किसी के खिलाफ कार्रवाईकरने का कोई औचित्य नहीं है। विजिलेंस की जांच में जो भी दोषी मिलेगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।”
-कृष्ण कुमार बेदी, समाज कल्याण राज्य मंत्री


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