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एकदा

Posted On July - 24 - 2019

इंसाफ का तकाजा
महमूद गज़नवी के दरबार में एक गरीब आदमी फरियाद लेकर आया- हुज़ूर, आपका भानजा मेरी पत्नी से जबरन मिलता है और उसे सताता है। विरोध करने पर मुझे भी मारता है। गज़नवी ने उसे सांत्वना देते हुए कहा-डरो मत। तुम बस एक बार उसे रंगे हाथों मुझे दिखा दो। मैं उसे स्वयं अपने हाथों से सज़ा देकर तुम्हें इंसाफ दूंगा। वह आदमी आश्वस्त होकर चला गया और फिर तीसरे दिन गज़नवी को उनके मिलने की जगह बता दी। गज़नवी रात को उस जगह पहुंचा तो भानजे को उस गरीब की पत्नी को तंग करते हुए पाया। गज़नवी ने तुरंत जलता हुआ चिराग बुझा दिया और शैतान को ललकारा। भानजा स्थिति से अनजान बादशाह से आ भिड़ा मगर गज़नवी की मार झेल ना सका और गिर पड़ा। गज़नवी ने तुरंत उसे गला दबाकर मार डाला। अत्याचारी के अंत के बाद गज़नवी ने पानी मांगा और जीभर कर पीया। गरीब ने पूछा- हुज़ूर, अत्याचारी के अंत से पहले चिराग बुझाना और अंत के बाद संतुष्ट होकर पानी पीना, कुछ समझ नहीं आया। तब गज़नवी ने समझाया-भानजे को सामने देखकर आंखों की शर्म इंसाफ के आड़े ना आ जाए, इस ख्याल से चिराग को बुझा दिया। जब तुम फरियाद लेकर आए थे तभी ख़ुदा से वादा किया था कि अत्याचारी के अंत के पश्चात ही खाना पीना लूंगा, इसलिए पेट भरकर पानी पीया है। ऊपर वाले का शुक्र है कि इंसाफ की अदायगी में आंखों की शर्म हावी न हो सकी।
प्रस्तुति : मुकेश जैन


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