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अब सीधे जनता ही चुनेगी परिषद, पालिका अध्यक्ष

Posted On July - 11 - 2019

दिनेश भारद्वाज/ट्रिन्यू
चंडीगढ़, 10 जुलाई
हरियाणा में नगरपरिषदों (नप) और नगरपालिकाओं (नपा) के अध्यक्ष के चुनाव भी अब डायरेक्ट करवाए जाएंगे। अभी केवल निगम में मेयर के ही सीधे चुनाव होते हैं। यह फैसला भी सरकार ने पिछले वर्ष ही लिया था और इसी के तहत 5 निगमों यमुनानगर, करनाल, पानीपत, रोहतक और हिसार में मेयर के सीधे चुनाव हुए। अब परिषदों और पालिकाओं के अध्यक्ष भी शहर की जनता सीधे वोट डालकर चुनेगी।
मंगलवार देर रात सीएम मनोहर लाल खट्टर के चंडीगढ़ आवास पर हुई कैबिनेट की अनौपचारिक बैठक में यह निर्णय लिया गया। बैठक में जिला परिषदों और नगर निगमों में विधानसभा की तर्ज पर सत्र चलाने का भी निर्णय लिया गया। पंचायती राज संस्थाओं को मजबूत बनाने के लिए सरकार ने यह फैसला लिया है। हरियाणा ऐसा पहला राज्य होगा, जहां नगरपरिषदों और नगरपालिकाओं में भी अध्यक्ष के सीधे चुनाव होंगे। अभी तक दूसरे किसी राज्य में नगर निगम और जिला परिषद के सत्र चलाने की भी परंपरा नहीं है। इन दोनों नये फैसलों को लागू करने के लिए पहले इन्हें औपचारिक कैबिनेट में पास किया जाएगा और इसके बाद पंचायती राज और निकाय के कानून में बदलाव होगा। माना जा रहा है कि अगस्त में प्रस्तावित विधानसभा के मानसून सत्र में सरकार संशोधित विधेयक पेश कर सकती है।
दूसरी ओर, विधानसभा सत्र की तर्ज पर जिला परिषदों और नगर निगमों के भी सत्र चलेंगे। ये सत्र हर 3 माह बाद बुलाए जाएंगे, जो 3-3 दिन चलेंगे। परिषद व निकायों के सत्रों में मेयर, चेयरमैन और अध्यक्ष सदन के नेता के तौर पर काम करेंगे। वहीं, विपक्षी दलों के पार्षद अपने लिए विपक्ष के नेता का चुनाव कर सकेंगे। वरिष्ठ पार्षदों में से ही किसी को ‘स्पीकर’ चुना जाएगा।
इसलिए लिया फैसला
खट्टर सरकार ने जिला परिषदों और निकायों के सत्र बुलाने का फैसला इसीलिए लिया कि शहरों के विकास के लिए बेहतर रूपरेखा तैयार हो सके। विकास परियोजनाओं के अलावा अन्य मुद्दों पर भी पार्षदों को चर्चा करने का अवसर मिलेगा। अब तक साल में एक बार हाउस की बैठक बुलाकर घंटेभर में ही बजट पास करने की परंपरा है। विधानसभा में विधायकों की तरह अब पार्षद भी निकायों में बजट पर अपनी राय रख सकेंगे और विकास के मुद्दों पर बहस कर सकेंगे।
उपाध्यक्ष का चुनाव पार्षद ही करेंगे
अभी केवल नगर निगम में ही मेयर के सीधे चुनाव का प्रावधान है। निगमों में सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव पहले की तरह निगम पार्षदों द्वारा सर्वसम्मति या फिर वोटिंग के जरिये किया जाता है। अब यही फार्मूला नगरपरिषदों के चेयरमैन और नगर पालिकाओं के अध्यक्ष के चुनाव में भी लागू होगा। दोनों ही निकायों में डिप्टी-चेयरमैन और उपाध्यक्ष का फैसला चुने हुए पार्षद ही करेंगे।


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