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24 व्रतों के बराबर निर्जला एकादशी

Posted On June - 9 - 2019

मदन गुप्ता सपाटू
साल में 24 एकादशियां पड़ती हैं। अधिक मास यानी मलमास की अवधि में इनकी संख्या 26 हो जाती है। ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला एकादशी कहा जाता हैै। इस साल यह एकादशी 13 जून को पड़ रही है। इस दिन व्रत रखने का विशेष महत्व माना गया है। एकादशी के सूर्योदय से लेकर अगले दिन के सूर्योदय तक 24 घ्ांटे का यह व्रत पानी पिये बगैर रखा जाता है। इसलिए, इसे निर्जला एकादशी कहा जाता है।
इस एकादशी का प्रारंभ महाभारत काल के एक संदर्भ से माना गया है। कथा है कि महर्षि वेदव्यास ने पांडवों को एकादशी व्रत का संकल्प करवाया। माता कुंती और द्रोपदी सहित सभी एकादशी का व्रत रखते, लेकिन भीम के लिए भोजन से दूर रहना मुश्किल था। अपने उदर पर आयी इस विपत्ति का समाधान उन्होंने महर्षि वेदव्यास से ही जाना। भीम ने उनसे कहा कि उपवास रखना मेरे सामर्थ्य की बात नहीं है, कुछ उपाय बतायें। इस पर महर्षि वेदव्यास ने गदाधारी भीम को निर्जला एकादशी व्रत के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि यह उपवास है तो बड़ा ही कठिन, लेकिन इसे रखने से सभी एकादशियों के उपवास का फल प्राप्त हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि इस उपवास के पुण्य के बारे में स्वयं भगवान श्री कृष्ण ने बताया है। तुम ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला उपवास रखकर भगवान विष्णु की पूजा करना।
भीम द्वारा उपवास रखे जाने के कारण ही निर्जला एकादशी को भीमसेन एकादशी भी कहा जाता है। इस दिन लोग खुद प्यासे रहकर दूसरों को पानी पिलाते हैं। इस दिन भगवान विष्णु की आराधना का विशेष महत्व है।
ऐसे रखें व्रत
सूर्याेदय से पहले उठें और भगवान विष्णु की मूर्ति या शालिग्राम को पंचामृत यानी दूध, दही, घी, शहद व शक्कर से स्नान कराएं। नये वस्त्र अर्पित करें। दीप जलाकर तुलसी और फल अर्पित करते हुए आराधना करें। या किसी मंदिर में भगवान विष्णु के दर्शन करें। ‘ओम नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें। इस दिन जरूरतमंदों को पानी, सफेद कपड़ा, छतरी, घड़ा, खरबूजा, फल, शरबत का दान करना लाभकारी रहता है। गर्मी से बचने की सामग्री दान करनी चाहिये। इस व्रत में एकादशी तिथि के सूर्योदय से अगले दिन द्वादशी तिथि के सूर्योदय तक पानी और भोजन ग्रहण नहीं किया जाता। इस व्रत को लंबी उम्र व स्वास्थ्य देने वाला और पापों का नाश करने वाला माना गया है।
निर्जला एकादशी 12 जून को शाम 6:27 से 13 जून शाम 4:50 बजे तक रहेगी। व्रत 13 जून को सूर्योदय से रखा जाएगा और इसका पारण 14 जून को सुबह 5:27 से 8:13 बजे तक किया जा सकता है।


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