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सीक्वल की भरमार

Posted On June - 29 - 2019

असीम चक्रवर्ती
बॉलीवुड में ’90 की महेश भट्ट की फिल्म ‘सड़क’ सुपरहिट थी। फिल्म में एक्शन, मारधाड़ और ग्राउंडब्रेकिंग माने जाने वाले बैकग्राउंड स्कोर के साथ-साथ वह सारी सामग्री थी, जो उस दौर में किसी फिल्म को हिट कराने के लिए ज़रूरी थी। फिल्म की कामयाबी के साथ फिल्मकार महेश भट्ट की बड़ी बेटी पूजा भट्ट का करिअर ग्राफ भी ऊंचा हो गया। अब जल्द ही भट्ट अपनी छोटी बेटी आलिया के साथ ‘सड़क-2’ लेकर आएंगे। बॉलीवुड में कुछ महीनों बाद सीक्वल फिल्मों की बाढ़-सी आने वाली है। यहां सीक्वल की बात सबसे पहले ‘सड़क’ के साथ…
‘सड़क’ का सीक्वल क्यों
‘सड़क-2’ आलिया और आदित्य रॉय कपूर की प्रेम-कहानी पर आधारित फिल्म होगी, जो 90 के दशक की ‘सड़क’ का सीक्वल है। वहीं सवाल दर्शकों के मन में यह भी उठता है कि कई सालों बाद वापस लौटे इस निर्देशक के पास ऐसी क्या मजबूरी थी कि कोई अलग सब्जेक्ट पर फिल्म बनाने की बजाय उन्होंने अपनी एक सुपरहिट फिल्म का सीक्वल बनाना ठीक समझा। ट्रेड पंडित आमोद मेहरा के अनुसार असल में कई निर्माताओं को यह एक सेफ साइड गेम लगता है। इसके चलते ही इन दिनों ‘दबंग-2’, ‘सड़क-2’, ‘गोलमाल-5’, ‘फुकरे-3’, ‘तनु वेड्स मनु री-युनाइट’, ‘प्यार का पंचनामा’, ‘रेस सीरीज़’, ‘धूम-4’ सलमान के साथ, ‘एबीसीडी-3’, ‘स्ट्रीट डांसर’, ‘हाउसफुल-4’, ‘हेराफेरी-3’, ‘सिंघम-3’, ‘आशिकी-3’, ‘कृष-4’ और ‘सूर्यवंशी’ जैसी कई सीक्वल फिल्मों की धूम मची हुई हैं। कुल मिलाकर जैसे निर्माताओं के बीच होड़ लगी हुई है। जिस भी निर्माता की पिछली फिल्म हिट हुई, वह तुरंत उसी फिल्म का सीक्वल बनाने का प्लान कर लेता है। आमोद मेहरा कहते हैं, ‘उन्हें लगता है कि पिछली हिट के सहारे सीक्वल फिल्म को आसानी से दर्शकों को परोसा जा सकता है। जहां तक दर्शकों का सवाल है, वह इस भम्र में है कि पिछली फिल्म मनोरंजक थी तो यह भी मनोरंजक होगी।’
क्या वे मुगालते में हैं
कई मौकों पर तो ऐसा लगता है कि निर्माता-निर्देशक इस मुगालते में रहते हैं कि पहली हिट हो तो दूसरी भी दर्शक पसंद करेंगे। ज्यादातर निर्माता सिर्फ मार्केट को ध्यान में रखकर इस तरह के प्रोजेक्ट की घोषणा कर रहे हैं। इस वजह से यह हो रहा है कि उन्हें प्रोजेक्ट को समझाने के लिए ज्यादा समय की ज़रूरत नहीं पड़ रही है। फिल्म के सीक्वल की घोषणा होते ही ट्रेड इस मुगालते में आ जाता है कि हिट फिल्म का सीक्वल है, अच्छा ही बनेगा। लेकिन ‘रेस’ और ‘हाउसफुल’ सीरीज की पिछली फिल्मों का अनुभव अच्छा नहीं था।
हाउसफुल कब तक…
अहम सवाल स्कि्रप्ट का है। सच तो यह है कि दीपक की पिछली सारी फिल्मों की स्कि्रप्ट अच्छी नहीं थीं। अब सड़क में आ चुके यह डायरेक्टर अपनी एक औसत सफल फिल्म ‘टॉम डिक हैरी’ की स्कि्रप्ट में क्या कमाल दिखाएंगे, यह जिज्ञासा का विषय है। इसी तरह से हाउसफुल का भूत, निर्माता साजिद नाडियाडवाला का पीछा कब छोड़ेगा, पता नहीं। पहले हाउसफुल ने 100 करोड़ का बिजनेस किया तो वह काफी उत्साहित थे। फिर साजिद खान के निर्देशन में ही हाउसफुल-2 ने सौ करोड़ की तो नहीं लेकिन ठीक-ठाक कमाई की। इससे साजिद का सीक्वल बनाने का उत्साह बदस्तूर बना रहा। हाउसफुल-3 में उन्होंने अक्षय के प्रिय लेखक-निर्देशक साजिद फरहाद को इसकी जिम्मेदारी सौंपी, लेकिन इस बार अक्षय की मौजूदगी के बावजूद 50 करोड़ की इस फिल्म ने मात्र 80 करोड़ का व्यवसाय किया। इससे साजिद खुश तो हैं पर अब उन्हें लगता है कि सीक्वल से अच्छा तो उनके दूसरे प्रोजेक्ट हैं। लेकिन फिर भी वह इसी डायरेक्टर युगल के साथ ‘हाउसफुल-4’ का निर्माण कर रहे हैं।
अरसे बाद ‘सड़क’ और ‘हेरा-फेरी
डेविड धवन जैसे कई हिट फिल्मों के निर्देशक भी इस अंधी दौड़ में शामिल हो चुके हैं। अब वह वरुण धवन को लेकर ‘जुड़वा’ के बाद ‘हीरो-1’ का सीक्वल बनाएंगे। वरुण के इस प्रोजेक्ट में देरी है, मगर वह उत्साहित हैं, ‘पापा की यह फिल्म मुझे टाइमपास लगती है। आज इसका सीक्वल आसानी से बन भी सकता है। इसलिए पापा से विशेष आग्रह कर उन्हें इसे बनाने के लिए राज़ी किया है।’ कुछ यही हाल है निर्माता गौरांग दोषी का वह अरसे बाद 2002 की हिट फिल्म ‘आंखें’ का सीक्वल बना रहे हैं। इस बार अमिताभ के अलावा सारी कास्टिंग में एक बड़ा बदलाव किया गया है। निर्देशन भी अनीस बज्मी को सौंपा गया है।
मुन्नाभाई का क्रेज़
देखा जाए तो एकमात्र ‘मुन्नाभाई’ ऐसी फिल्म है, जिसका सीक्वल हर दृष्टि से सही लगता है। इसके क्रिएटर राजकुमार हिरानी के क्रिएशन पर अब कोई प्रश्नचिन्ह नहीं उभरता है। हिरानी कहते हैं, ‘मुन्नाभाई एमबीबीएस’ की लोकप्रियता के बाद मेरे जेहन में ख्याल आया था कि यह वह फिल्म है, जिसका सही सीक्वल बन सकता है। मैंने इस पर पूरा वक्त दिया, जिसका नतीजा था ‘लगे रहो मुन्नाभाई’ की सफलता। इसके बाद भी मैंने कोई जल्दबाज़ी नहीं दिखाई। इसके सीक्वल की अगली स्कि्रप्ट पर काम जारी रखा। इस बीच ‘पीके’ भी बना डाली। फिर संजय दत्त की बायोपिक ‘संजू’ भी बनाई। अब शायद मुन्नाभाई के अगले सीक्वल पर फिल्म बनाऊं। इसे मैं 2020 के अंत में शूट करूंगा। असल में सीक्वल भी मेरे लिये एक पूरी नई फिल्म है। इसलिए जब तक मैं इसकी स्कि्रप्ट से संतुष्ट नहीं होता, इसकी शूटिंग करना मेेरे लिए संभव नहीं है।’ लेकिन वह अपनी एक और फिल्म ‘थ्री इडियट्स’ के सीक्वल के बारे में भी सोच रहे हैं।
कैसी होती है सीक्वल की कहानी
राजकुमार हिरानी की खासियत है कि वह अपने सीक्वल में भी एक नई कहानी पेश करते हैं। बस, पिछली फिल्म के दो-तीन प्रमुख पात्रों को लेकर वह इसकी कहानी को आगे बढ़ाते हैं। इसलिए उनकी फिल्में पूरी तरह से सीक्वल नहीं होती हैं। लेकिन दूसरे फिल्मकार इस तरह का परिवर्तन करके भी एक नई कहानी पेश नहीं कर पाते हैं। इसकी मुख्य वजह है कमजोर कहानी, जिसके चलते ये फिल्में न सीक्वल बन पाती हैं, न ही कोई अलग-थलग फिल्म। ट्रेड विश्लेषक कोमल नाहटा बताते हैं, ‘असल में सारा खेल फ्रेंचाइची का है। एक हिट फिल्म का पीछा निर्माता आसानी से छोड़ना नहीं चाहते हैं। इसलिए सीक्वल के बहाने वह कुछ भी बना डालते हैं। यदि हिट फ्रेंचाइची का सहारा ही लेना है तो हर बार कुछ नया बनाइए। वरना ‘रेस-3’ जैसी हालत होती है और यह काम अच्छी स्कि्रप्ट की मदद से सहज किया जा सकता है। लेकिन हमारे ज्यादातर फिल्मकार इसी मेहनत से काफी दूर हैं।’ बात वाजिब है। इसके लिए फिल्मकार राकेश रौशन का उदाहरण देना ठीक होगा। वह इन दिनों कृष-4 की स्कि्रट की तैयारी कर रहे हैं। ‘कोई मिल गया’ के बाद उन्होंने ‘कृष’ बनाई। फिर कृष-2, कृष-3 बनाई और हर बार एक नई कहानी के साथ वह दर्शकों के बीच में आए। लेकिन पिछली कहानी से उसका रिश्ता जुड़ा रहा। देखा जाए तो इन्हें एक परफेक्ट सीक्वल फिल्म कहा जा सकता है। फ्रेंचाइची का उपयोग कैसे सही ढंग से किया जा सकता है, यह भला राकेश रौशन से बेहतर कौन बता सकता है।
‘हेरा-फेरी-3’ का चक्कर
इन दिनों फिरोज नाडियाडवाला की ‘हेरा-फेरी-3’ के प्री-प्रोडक्शन को तेज़ी से पूरा किया जा रहा है। 2000 की हिट फिल्म हेरा-फेरी का सीक्वल 2006 में ‘फिर हेरा-फेरी’ बनकर सामने आया। इसमें परेश रावल, अक्षय और सुनील शेट्टी की तिकड़ी थी। लेकिन 2017 में ‘हेरा-फेरी-3’ की कास्टिंग में काफी बदलाव किया गया। इस बार तीनों ही मुख्य पात्र बदल गए। उनकी जगह नाना पाटेकर, जॉन अब्राहम और अभिषेक बच्चन आ गए। उम्मीद है कि इस बार सीक्वल में बदलाव देखने को मिलेगा।
नई क्रिएशन से बच रहे
ट्रेड पंडित मानते हैं कि दूसरे अन्य फिल्मी बुखार की तरह सीक्वल का बुखार भी फिल्मवालों पर ज्यादा दिन तक नहीं रहेगा। क्रिएशन की कमी के चलते इसमें भी बहुत सारी लिबट्री ली जाएगी। कहानी में अपने मन मुताबिक बहुत बदलाव किए जाएंगे और बहाना सिर्फ सीक्वल का होगा। लेकिन असल खेल फ्रेंचाइची का होगा। नयेपन के अभाव में जब फ्रेंचाइची का क्रेज भी खत्म होने लगेेगा तो सीक्वल का फंडा भी अपने आप ठंडा पड़ जाएगा। तब सिर्फ राजकुमार हिरानी और राकेश रौशन जैसे संजीदा फिल्मकार ही मैदान में डटे रहेंगे।


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