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लिव-इन के अधिकार

Posted On June - 30 - 2019

अधिकार

मधु गोयल
तुषार एक लड़की के साथ छह साल से लिव-इन-रिलेशनशिप में था। अचानक उसने उस लड़की से ब्रेकअप कर उसको छोड़ दिया और किसी दूसरी लड़की से सगाई कर ली, जिसके बाद लड़की ने उस पर रेप का आरोप लगा दिया।
इस पर तुषार ने सुप्रीम कोर्ट से मदद मांगी। सवाल थे :-
क्या, लिव-इन-रिलेशनशिप को भी शादी की ही तरह देखा जायेगा? क्या उस महिला या लड़की को भी अधिकार, एक शादी-शुदा की तरह मिलेगा?
यह रिलेशनशिप पूरी तरह से हम दोनों की आपसी सहमति पर आधारित थी। ऐसे में अगर इस लिव-इन-रिलेशनशिप को तोड़ रहा हूं तो क्या उसे हर्जाना देना ज़रूरी है?
आइए, जानते हैं इस बारे में, विस्तार से, दिल्ली हाईकोर्ट के एडवोकेट एनके अग्रवाल से बातचीत के द्वारा लिव-इन से जुड़े अधिकारों के बारे में…
लिव-इन में अधिकार से आपका क्या तात्पर्य है?
हम उस रिश्ते को लिव-इन मानेंगे, जिसमें महिला और पुरुष विवाह के बिना पति-पत्नी की तरह रहते हैं।
क्या वे शादीशुदा हो सकते हैं?
नहीं। यदि दोनों में से कोई भी एक पहले से शादीशुदा है तो उसे लिव-इन- रिलेशनशिप नहीं कहा जाएगा, लेकिन दोनों के तलाकशुदा होने पर हम इस रिश्ते को लिव-इन मानेंगे।
इस रिश्ते के तहत क्या महिला को कानूनी प्रोटक्शन मिल सकती है?
जी हां, मिल सकती है। शादी का झांसा देकर शोषण करना और लिव-इन में होना अलग बात है। इस रिश्ते में रह रही महिला को भी घरेलू हिंसा कानून का अधिकार है। इस रिश्ते के तहत अगर महिला को किसी भी तरह से प्रताड़ित किया जाता है तो वह अपनी शिकायत दर्ज कर सकती है। उसे राइट-टु-शेल्टर का अधिकार भी है।
राइट-टु-शेल्टर का अधिकार क्या है?
सीधा-सा अर्थ है कि जब तक वह महिला इस रिलेशनशिप में रह रही है, उसको जबरदस्ती घर से नहीं निकाल सकते। राइट-टु-शेल्टर का अधिकार सिर्फ इस संबंध के कायम रहने तक होता है उसके बाद में नहीं।
क्या ऐसी महिलाओं को गुज़ारा-भत्ता पाने का अधिकार भी प्राप्त है?
इस रिश्ते में रहने वाली महिलाओं को गुजारा-भत्ता मिलने का तो अधिकार है लेकिन संपत्ति पर कोई अधिकार नहीं होता क्योंकि आजकल ये रिश्ते समाज में तेज़ी से बढ़ रहे हैं। आजकल लोग शादी से परहेज़ कर रहे हैं और लिव-इन में रहना पसंद कर रहे हैं। उन्हें इसमें कोई ख़तरा नहीं लगता। इसलिए गुज़ारा-भत्ता का अधिकार शुरू हो जाएगा तो कुछ डर रहेगा और इस रिलेशनशिप को भी लोग गंभीरता से लेंगे।
ऐसी कौन-सी परिस्थितियां हैं, जिसमें महिला को गुजारा-भत्ता के अलावा संपत्ति पर अधिकार मिल सकता हो?
वैसे तो इस संबंध में रहने वाली महिला सिर्फ गुजारा-भत्ता पाने की अधिकारी है। वह भी तब तक जब तक कि पुरुष पार्टनर साथ में है। जब उसके लिव-इन पार्टनर की मृत्यु हो जाती है तो उसका संपत्ति पर कोई अधिकार नहीं रहता लेकिन यदि पार्टनर सक्षम हो और उसने पहले तय कर लिया हो कि उसकी मृत्यु के बाद भी महिलाओं को गुजारा-भत्ता या संपत्ति पर अधिकार दिया जाएगा, उस स्थिति में वह महिला दावा कर सकती है। जैसे कि बालीवुड के दिवंगत अभिनेता राजेश खन्ना का केस है।
क्या यह संभव है कि महिला संपत्ति में भी अधिकार रखती हो?
वैसे तो यह बहुत मुश्किल होता है लेकिन यदि मरने से पहले उसका लिव-इन पार्टनर वसीयत कर जाए और उसने साफ-साफ लिख दे कि उसकी मृत्यु के बाद उसकी वसीयत लिव-इन पार्टनर के नाम है तो महिला का पूरी तरह से अधिकार बनता है।


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